फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   Aligarh news

नहीं है कमाई... खुद खाएं या घोड़ों को खिलाएं

Wed, 19 May 2021 12:25 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 19 May 2021 12:25 AM IST
विज्ञापन
Aligarh news
लगातार दूसरे साल कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रकोप के चलते बैंडबाजा कारोबार का बैंड बज गया है। सहालग में काम धंधा न मिलने से बैंड संचालक, हलवाई, डीजे, डेकोरेशन, गुब्बारे, घोड़ी-बग्घी, लाइटिंग, टेंट आदि काम करने वाले लोग परेशान हैं। उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
विज्ञापन

खासतौर पर घोड़ी संचालकों के सामने तो यह समस्या है कि कमाई नहीं है। वह अपने परिवार को खिलाएं या घोड़ों को। आठ-दस घोड़ी-घोड़े रखने वाले दाना-पानी तक का इंतजाम नहीं कर पा रहे हैं। हालात यह हैं कि घोड़ों को खरीदने के लिए भी इस समय कोई तैयार नहीं है। ऐसी स्थिति में ये लोग धंधे को बदलने की तैयारी में हैं। ऐसा ही संकट बैंड संचालकों के सामने भी है। उनका कहना है कि पिछले साल मजदूरों को पूरा भुगतान किया था। हालात सामान्य होने पर मजदूरों को कर्ज लेकर भुगतान किया। लेकिन कोरोना के कारण सहालग में काम नहीं मिल रहा है। कमाई है नहीं। घर का खर्च चलाने में लाले पड़े हैं।
विज्ञापन

सहालग में काम न मिलने से आर्थिक संकट पैदा हो गया है। पुरानी सभी बुकिंग निरस्त हो गई हैं। अगस्त-सितंबर तक कोई कार्यक्रम नहीं आ रहा है। जबकि पिछले साल और इस बार मजदूरों को अग्रिम भुगतान कर चुके हैं। जबकि काम के नाम पर खाली बैठे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

- पवन गुप्ता, अध्यक्ष बैंड एसोसिएशन।
सहालग में काम धंधा बंद रहने से हालात यह हो गए हैं कि दो घोड़ियों को बेच दिया है। अब आठ घोड़ियां बची हैं। कुछ अपना पेट काटते हैं, कुछ जानवरों का। बस इसी तरह समय काट रहे हैं। भगवान से प्रार्थना है कि ऐसे हालात कभी न दिखाए।
- कालीचरण उर्फ कलुआ, सराय हरनारायण।
आठ घोड़ी और उनके चार बच्चे हैं। एक जानवर की खुराक वैसे तो कम से कम 300 रुपये प्रतिदिन की है। जबकि 150 रुपये रोज में इनका पेट भर पा रहे हैं। 10 लोगों के परिवार के साथ जानवर भी खड़े-खड़े खा रहे हैं। यह देखा नहीं जा रहा है। इन्हें बेचकर धंधा बदलने की सोच रहे हैं।

- सलीम मुल्लाजी, देहलीगेट।
15 घोड़े-घोड़ियां थीं। इनमें से पांच घोड़ी और तीन घोड़े ही बचे हैं। कुछ ने पिछले साल तो कुछ जानवरों ने इस साल दम तोड़ दिया है। 300 रुपये प्रतिदिन का दाना-पानी खाने वाले जानवरों को अब 100 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से ही पेट भर पा रहे हैं। खरीदने के लिए भी कोई तैयार नहीं।
-मोहम्मद मुबीन, मदार गेट।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed