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ताकि काला न रहे काली नदी का जल
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डॉ. सुरेश कुमार
- फोटो : CITY OFFICE
राजा तिवारी
काली नदी की गंदगी, कीचड़ और बदबू से हजारों लोग परेशान हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तो आज तक इस नदी के पानी को स्वच्छ नहीं बना सका, अब शिक्षक जरूर आगे आ रहे हैं, जो इस पर काम कर रहे हैं। इस नदी को पुनर्जीवित कर पानी को पीने योग्य बनाने के लिए अतरौली के वीरांगना अवंतीबाई राजकीय महाविद्यालय के वनस्पति विभागाध्यक्ष व असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुरेश कुमार इस पर शोध कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश शासन ने उनके प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है। सरकार की ओर से 2.29 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं।
असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुरेश कुमार ने बताया कि सरकार ने उनके पायलट प्रोजेक्ट को अनुमति दी। काली नदी को जल्दी साफ नहीं कर सकते है, लेकिन आगामी तीन वर्षों में जिले में अलग अलग जोन बनाकर काम करेंगे। इसमें किसानों, उद्यमियों और जनता की भागीदारी की आवश्यकता है। शोध कार्य पूरा होने के बाद इसको साफ करने का प्रोजेक्ट शुरू करवाएंगे, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ लोगों को राहत दी जा सके।
यह है शोध
डॉ. सुरेश कुमार ने बताया कि रीस्टोर, वेटलैंड्स एंड बायो डाइवर्सिटी थ्रीटेन्ड बाई वाटर पॉल्यूशन, ओवक कटिंग, एक्जोटिंग, स्पीसीज एंड इनएप्रोप्रिएट लैंड यूज प्रैक्टिस एट एलॉंग द काली नदी के नाम से शोध तैयार किया है, जिसे पूरा करने के लिए राज्य सरकार ने धनराशि जारी कर दी है। पिछले कुछ दशकों में नैचुरल रिसोर्सेज का अत्यधिक दोहन किया जा रहा है, जिसके चलते न चाहते हुए भी असंतुलन पैदा हो रहा है। जैव विविधता की बहुत तेज गिरावट, बढ़ता हुआ प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, प्राकृतिक संसाधनों में कमी से ऊर्जा और जल श्रोत में निरंतर कमी आ रही है। काली नदी पर भी उक्त कारणों से पानी दूषित हुआ है।
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ऐसे पूरा करेंगे शोध
डॉ. सुरेश कुमार ने बताया कि सबसे पहले काली नदी के जलस्तर को संतुलित करेंगे। इसके जल को स्वच्छ बनाएंगे। इसके लिए जिले में विभिन्न जोन बनाकर बिंदुवार तथ्य जानेंगे। नदी के आसपास क्रॉपिंग एग्रीकल्चर लैंड का उपयोग करने वाले किसानों से मिलेंगे। किसानों को किस समय पर कौन सी खेती करनी है। इसकी जानकारी देंगे। खेती से काफी हद तक नमी और जल स्तर को सहूलियत मिलेगी। प्लास्टिक और पॉलिथीन का उपयोग न करने के लिए आंदोलन चलाएंगे। वहीं, औद्योगिक संस्थानों में जाकर उद्यमियों से मिलेंगे और ट्रीटमेंट करने के बाद ही वेस्ट निकालने का सहयोग मांगेंगे। काली नदी जहां जहां से होकर गुजर रही है। उस क्षेत्र के ग्रामीणों को जल संरक्षण की शपथ दिलाएंगे। तीन साल बाद जब हमारा शोध कार्य अलीगढ़ में पूरा होगा तो हम सरकार को बताएंगे कि आखिर हमने क्या उपलब्धियां हासिल की हैं। जब अलीगढ़ में काली नदी को साफ कर सकते हैं तो जहां-जहां से होकर यह नदी गुजर रही है। वहां भी इस पर काम हो सकेगा।
शोध का मुख्य मकसद यह है कि हम काली नदी के पानी को स्वच्छ बना सकते हैं। इतना साफ की वह काला दिखने की बजाय साफ दिखाई दे। इसी दिशा में कार्य कर रहा हूं। प्रोजेक्ट फाइल सरकार को दिखाई थी। जिसके आधार पर अनुदान जारी हो गया है। आगामी तीन सालों में काली नदी पर विभिन्न जोन बनाकर काम करेंगे।
डॉ. सुरेश कुमार, असिस्टेंट प्रोफेसर व विभागाध्यक्ष, बॉटनी विभाग, वीरांगना अवंतीबाई राजकीय महाविद्यालय अतरौली।
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काली नदी की गंदगी, कीचड़ और बदबू से हजारों लोग परेशान हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तो आज तक इस नदी के पानी को स्वच्छ नहीं बना सका, अब शिक्षक जरूर आगे आ रहे हैं, जो इस पर काम कर रहे हैं। इस नदी को पुनर्जीवित कर पानी को पीने योग्य बनाने के लिए अतरौली के वीरांगना अवंतीबाई राजकीय महाविद्यालय के वनस्पति विभागाध्यक्ष व असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुरेश कुमार इस पर शोध कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश शासन ने उनके प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है। सरकार की ओर से 2.29 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं।
असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुरेश कुमार ने बताया कि सरकार ने उनके पायलट प्रोजेक्ट को अनुमति दी। काली नदी को जल्दी साफ नहीं कर सकते है, लेकिन आगामी तीन वर्षों में जिले में अलग अलग जोन बनाकर काम करेंगे। इसमें किसानों, उद्यमियों और जनता की भागीदारी की आवश्यकता है। शोध कार्य पूरा होने के बाद इसको साफ करने का प्रोजेक्ट शुरू करवाएंगे, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ लोगों को राहत दी जा सके।
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यह है शोध
डॉ. सुरेश कुमार ने बताया कि रीस्टोर, वेटलैंड्स एंड बायो डाइवर्सिटी थ्रीटेन्ड बाई वाटर पॉल्यूशन, ओवक कटिंग, एक्जोटिंग, स्पीसीज एंड इनएप्रोप्रिएट लैंड यूज प्रैक्टिस एट एलॉंग द काली नदी के नाम से शोध तैयार किया है, जिसे पूरा करने के लिए राज्य सरकार ने धनराशि जारी कर दी है। पिछले कुछ दशकों में नैचुरल रिसोर्सेज का अत्यधिक दोहन किया जा रहा है, जिसके चलते न चाहते हुए भी असंतुलन पैदा हो रहा है। जैव विविधता की बहुत तेज गिरावट, बढ़ता हुआ प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, प्राकृतिक संसाधनों में कमी से ऊर्जा और जल श्रोत में निरंतर कमी आ रही है। काली नदी पर भी उक्त कारणों से पानी दूषित हुआ है।
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ऐसे पूरा करेंगे शोध
डॉ. सुरेश कुमार ने बताया कि सबसे पहले काली नदी के जलस्तर को संतुलित करेंगे। इसके जल को स्वच्छ बनाएंगे। इसके लिए जिले में विभिन्न जोन बनाकर बिंदुवार तथ्य जानेंगे। नदी के आसपास क्रॉपिंग एग्रीकल्चर लैंड का उपयोग करने वाले किसानों से मिलेंगे। किसानों को किस समय पर कौन सी खेती करनी है। इसकी जानकारी देंगे। खेती से काफी हद तक नमी और जल स्तर को सहूलियत मिलेगी। प्लास्टिक और पॉलिथीन का उपयोग न करने के लिए आंदोलन चलाएंगे। वहीं, औद्योगिक संस्थानों में जाकर उद्यमियों से मिलेंगे और ट्रीटमेंट करने के बाद ही वेस्ट निकालने का सहयोग मांगेंगे। काली नदी जहां जहां से होकर गुजर रही है। उस क्षेत्र के ग्रामीणों को जल संरक्षण की शपथ दिलाएंगे। तीन साल बाद जब हमारा शोध कार्य अलीगढ़ में पूरा होगा तो हम सरकार को बताएंगे कि आखिर हमने क्या उपलब्धियां हासिल की हैं। जब अलीगढ़ में काली नदी को साफ कर सकते हैं तो जहां-जहां से होकर यह नदी गुजर रही है। वहां भी इस पर काम हो सकेगा।
शोध का मुख्य मकसद यह है कि हम काली नदी के पानी को स्वच्छ बना सकते हैं। इतना साफ की वह काला दिखने की बजाय साफ दिखाई दे। इसी दिशा में कार्य कर रहा हूं। प्रोजेक्ट फाइल सरकार को दिखाई थी। जिसके आधार पर अनुदान जारी हो गया है। आगामी तीन सालों में काली नदी पर विभिन्न जोन बनाकर काम करेंगे।
डॉ. सुरेश कुमार, असिस्टेंट प्रोफेसर व विभागाध्यक्ष, बॉटनी विभाग, वीरांगना अवंतीबाई राजकीय महाविद्यालय अतरौली।

काली नदी।- फोटो : CITY OFFICE