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पिता ने छोड़ा साथ, छोटे भाई का हाथ पकड़कर सहायक अभियंता बने राज
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मां बबली शर्मा के साथ हर्ष जाहिर करते नौरंगाबाद निवासी राज शर्मा।
- फोटो : CITY OFFICE
14 साल पहले पिता का साथ छूटने पर नौरंगाबाद क्षेत्र निवासी राज शर्मा ने अपने छोटे भाई तनी शर्मा का हाथ पकड़कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। राज शर्मा ने संयुक्त राज्य इंजीनियरिंग सेवा की परीक्षा में पूरे प्रदेश में 43वीं रैंक हासिल की है। राज शर्मा ने कहा कि भाई की प्रेरणा से ही मैं आज सहायक अभियंता बन पाया हूं।
राज शर्मा ने बताया कि 2007 में पिता को ब्रेन ट्यूमर की बीमारी हुई। दिल्ली में डॉक्टरों ने इलाज से मना कर दिया तो वह परेशान रहने लगे। इसी वजह से एक दिन तनाव में छत पर टहलते हुए नीचे गिर गए और उनकी मृत्यु हो गई। मेरी पढ़ाई जारी रखने के लिए तीन साल छोटे भाई तनी शर्मा ने मुझे पढ़ने के लिए प्रेरित किया। मोबाइल रिपेयरिंग का काम सीखकर मामूभांजा में छोटी सी दुकान खोली। पाई पाई जोड़कर मुझे दी और पढ़ने के लिए कहा। राज ने बताया कि लॉकडाउन में पिछले संघर्ष को देखते हुए हताश हो गए थे। इस दौरान भी भाई ने प्रेरित किया कि पढ़कर परीक्षा दे लो, भविष्य बन जाएगा। उसकी प्रेरणा से मन लगाकर पढ़ाई की। दिसंबर 2020 में परीक्षा दी। पूरे प्रदेश में 43वीं रैंक आई है। सहायक अभियंता का पद दिया जा रहा है। यह सब भाई की बदौलत ही है। उन्होंने कहा कि मैं गरीब भाइयों को प्रेरित करने का अभियान चलाऊंगा। क्योंकि जब मैं सफल हो सकता हूं तो सभी सफल हो सकते हैं। बस मन में प्रण लेकर पढ़ाई करनी होगी।
राज शर्मा ने शहर में इन शिक्षण संस्थाओं से की पढ़ाई
राज सक्सेना ने हीरालाल बारहसैनी इंटर कॉलेज से 2008 में हाईस्कूल किया। इसके बाद 2011 में एएमयू के पॉलीटेक्निक डिप्लोमा में दाखिला लिया। तीन साल पढ़ाई करके 2014 में डिप्लोमा की परीक्षा में टॉपर बने। टॉपर होने के चलते एएमयू के बीटेक में सीधे प्रवेश मिल गया। 2018 में राज ने सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। 2019 की अधिसूचना पर राज ने संयुक्त राज्य इंजीनियरिंग सेवा परीक्षा के लिए आवेदन किया। पहली ही बार में सफलता हासिल कर राज ने परिवार के साथ शहर का भी नाम रोशन किया है। उनकी सफलता पर शुभचिंतकों द्वारा बधाई देने का क्रम लगातार जारी है।
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राज शर्मा ने बताया कि 2007 में पिता को ब्रेन ट्यूमर की बीमारी हुई। दिल्ली में डॉक्टरों ने इलाज से मना कर दिया तो वह परेशान रहने लगे। इसी वजह से एक दिन तनाव में छत पर टहलते हुए नीचे गिर गए और उनकी मृत्यु हो गई। मेरी पढ़ाई जारी रखने के लिए तीन साल छोटे भाई तनी शर्मा ने मुझे पढ़ने के लिए प्रेरित किया। मोबाइल रिपेयरिंग का काम सीखकर मामूभांजा में छोटी सी दुकान खोली। पाई पाई जोड़कर मुझे दी और पढ़ने के लिए कहा। राज ने बताया कि लॉकडाउन में पिछले संघर्ष को देखते हुए हताश हो गए थे। इस दौरान भी भाई ने प्रेरित किया कि पढ़कर परीक्षा दे लो, भविष्य बन जाएगा। उसकी प्रेरणा से मन लगाकर पढ़ाई की। दिसंबर 2020 में परीक्षा दी। पूरे प्रदेश में 43वीं रैंक आई है। सहायक अभियंता का पद दिया जा रहा है। यह सब भाई की बदौलत ही है। उन्होंने कहा कि मैं गरीब भाइयों को प्रेरित करने का अभियान चलाऊंगा। क्योंकि जब मैं सफल हो सकता हूं तो सभी सफल हो सकते हैं। बस मन में प्रण लेकर पढ़ाई करनी होगी।
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राज शर्मा ने शहर में इन शिक्षण संस्थाओं से की पढ़ाई
राज सक्सेना ने हीरालाल बारहसैनी इंटर कॉलेज से 2008 में हाईस्कूल किया। इसके बाद 2011 में एएमयू के पॉलीटेक्निक डिप्लोमा में दाखिला लिया। तीन साल पढ़ाई करके 2014 में डिप्लोमा की परीक्षा में टॉपर बने। टॉपर होने के चलते एएमयू के बीटेक में सीधे प्रवेश मिल गया। 2018 में राज ने सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। 2019 की अधिसूचना पर राज ने संयुक्त राज्य इंजीनियरिंग सेवा परीक्षा के लिए आवेदन किया। पहली ही बार में सफलता हासिल कर राज ने परिवार के साथ शहर का भी नाम रोशन किया है। उनकी सफलता पर शुभचिंतकों द्वारा बधाई देने का क्रम लगातार जारी है।
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