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आईटीसी पर रोजाना एक फर्जीवाड़ा आ रहा सामने
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आशीष निगम
बोगस फर्मों से करोड़ों रुपये का कारोबार दिखा कर लाखों रुपये की आईटीसी डकारने के मामले अलीगढ़ में लगातार बढ़ते जा रहे हैं। आईटीसी का पूरा अर्थ इनपुट क्रेडिट टैक्स है, जिसे पहले चुका कर बाद में विभाग से वापस लिया जाता है। आलम ये है कि रोजाना लगभग एक ऐसा मामला सामने आ रहा है। जिससे परेशान वाणिज्य कर विभाग और उसकी एसआईबी टीम इस पर सख्त होती जा रही है। जीएसटीएन पोर्टल का आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस भी इसमें बड़ी मदद कर रहा है।
अलीगढ़ में सितंबर 2020 से 20 मार्च 2021 तक आईटीसी फर्जीवाड़े के ऐसे 167 मामले सामने आ चुके हैं। सबूत पुख्ता होने पर 142 केसों में आईटीसी क्लेम ब्लाक कर दिया गया है। जिससे एक करोड़ 51 लाख 25 हजार रुपये के क्लेम भुगतान रुक गए हैं। वहीं फर्जीवाड़ा करने वाले अलग अलग लोगों से 4.68 लाख रुपये की रिकवरी हुई है। हाल ही में अलीगढ़ में ऐसे चार मामलों में बड़ी कार्रवाई हुई है।
लोहे के धंधे से जुड़े एक प्रमुख कारोबारी ने बताया कि ताला और हार्डवेयर निर्माण का प्रमुख औद्योगिक शहर होने के कारण अलीगढ़ में लोहा, तांबा, जस्ता और पीतल का सर्वाधिक इस्तेमाल होता है। रोजाना टनों के हिसाब से कच्चा माल आता है और तैयार माल बाहर भेजा जाता है। इन धातुओं पर 18 फीसदी की दर से जीएसटी लागू है, जो बहुत अधिक है। ये दर अधिक से अधिक 12 फीसदी तक होनी चाहिए। आईटीसी के फर्जीवाड़े की एक बड़ी वजह ये दर भी है।
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बीेते सोमवार को ही ऊपरकोट स्थित आरजी मेटल कंपनी पर वाणिज्य कर विभाग की एसआईबी टीम ने छापा मार कर 62 लाख रुपये की फर्जी आईटीसी का मामला पकड़ा है। ये फर्म तक पकड़ में आई जब इससे जुड़ी दो अन्य फर्मों सोनी धातु और गोविंद इस्पात की जांच हुई। सोनी धातु और गोविंद इस्पात में भ्री आइटीसी का फर्जीवाड़ा पकड़ा गया था।
जीएसटीएन पोर्टल एक बेहद एडवांस सिस्टम है। जिसमें आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस शामिल है। इसमें डाटा इकट्ठा होता रहता है। फर्जी कारोबार दिखा कर जिन लोगों ने भी झूठा आईटीसी का क्लेम लिया है, वो सभी लोग जांच के दायरे में है। इन सभी से वसूली भी होगी। कोई बच नहीं पाएगा। सितंबर से मार्च के बीच 167 मामले चिन्हित हो चुके हैं। इनके 1,51,25000 रुपये के आईटीसी क्लेम ब्लाक करा दिए हैं। ऐसे लोगों से 4.68 लाख रुपये की रिकवरी हुई है। कार्रवाई जारी रहेगी।
-विनय अस्थाना, एडिश्नल कमिश्नर ग्रेड वन।
समझिए ...ऐसे होती है सरकार से ठगी
अलीगढ़। आईटीसी का फर्जीवाड़ा ऐसे समझते हैं। मान लीजिए कि अलीगढ़ का कोई व्यापारी ए दिल्ली के व्यापारी बी से 100 रुपये का कच्चा माल यानी लोहा खरीदना दिखाता है। इस पर वह कच्चे माल की जीएसटी दर 12 फीसदी के अनुसार 12 रुपये जीएसटी देता है। लागत और मुनाफे के कुल आठ रुपये जोड़ कर 120 रुपये में माल तैयार करता है। ग्राहक से वह तैयार माल की जीएसटी दर के अनुसार 14.40 रुपये की पूरी जीएसटी लेता है, जिससे माल की कुल कीमत 134.40 रुपये हो जाती है।
ग्राहक से वसूली गई 14.40 रुपये की जीएसटी में से वह व्यापारी विभाग को केवल 2.40 रुपये देता है। 12 रुपये की आईटीसी का क्लेम करता है, जो टैक्स वह पहले दिल्ली के व्यापारी को दे चुका है। अब ये माल न तो कहीं से खरीदा गया था, न ही कहीं बेचा गया। दरअसल, दिल्ली के व्यापारी बी ने भी कोई माल नहीं खरीदा था। केवल अपने थ्री-बी फार्म में खरीद दिखा दी। फर्जी आईटीसी का खेल वहीं से शुरू हुआ। इसलिए विभाग को फर्जी आईटीसी वसूलने से नुकसान होता है। जीएसटी लागू होने के दौरान ग्राहकों को सस्ता माल मुहैया कराने के लिए व्यापारियों को आईटीसी की सुविधा दी गई थी, लेकिन इसका दुरुपयोग कर कई लोगों ने करोड़ों रुपयें की टैक्स चोरी की है।
आईटीसी धोखाधड़ी
1-पहली सिंतबर 2020 से 20 मार्च 2021 तक 167 मामले आए
2-1,51,25000 के क्लेम ब्लाक, 4.68 लाख रुपये की रिकवरी हुई
3-चार वित्तीय वर्ष में लगभग 750 से अधिक केस पकड़े गए हैं
4-वर्ष 2018 में सूबे में पहली गिरफ्तारी अलीगढ़ जिले में हुई थी
आईटीसी फर्जीवाड़ा क्यों बढ़ा
1-पहली जुलाई 2017 को जीएसटी लागू होने के साथ आईटीसी लागू हुआ
2-लोहा, पीतल, तांबा और जस्ता पर 18 फीसदी की दर से जीएसटी लागू
3-अलीगढ़ में लोहा, तांबा, पीतल और जस्ता का सर्वाधिक प्रयोग होता है
4-18 फीसदी की दर बहुत अधिक होने के कारण आईटीसी के फर्जीवाड़े बढ़े
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बोगस फर्मों से करोड़ों रुपये का कारोबार दिखा कर लाखों रुपये की आईटीसी डकारने के मामले अलीगढ़ में लगातार बढ़ते जा रहे हैं। आईटीसी का पूरा अर्थ इनपुट क्रेडिट टैक्स है, जिसे पहले चुका कर बाद में विभाग से वापस लिया जाता है। आलम ये है कि रोजाना लगभग एक ऐसा मामला सामने आ रहा है। जिससे परेशान वाणिज्य कर विभाग और उसकी एसआईबी टीम इस पर सख्त होती जा रही है। जीएसटीएन पोर्टल का आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस भी इसमें बड़ी मदद कर रहा है।
अलीगढ़ में सितंबर 2020 से 20 मार्च 2021 तक आईटीसी फर्जीवाड़े के ऐसे 167 मामले सामने आ चुके हैं। सबूत पुख्ता होने पर 142 केसों में आईटीसी क्लेम ब्लाक कर दिया गया है। जिससे एक करोड़ 51 लाख 25 हजार रुपये के क्लेम भुगतान रुक गए हैं। वहीं फर्जीवाड़ा करने वाले अलग अलग लोगों से 4.68 लाख रुपये की रिकवरी हुई है। हाल ही में अलीगढ़ में ऐसे चार मामलों में बड़ी कार्रवाई हुई है।
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लोहे के धंधे से जुड़े एक प्रमुख कारोबारी ने बताया कि ताला और हार्डवेयर निर्माण का प्रमुख औद्योगिक शहर होने के कारण अलीगढ़ में लोहा, तांबा, जस्ता और पीतल का सर्वाधिक इस्तेमाल होता है। रोजाना टनों के हिसाब से कच्चा माल आता है और तैयार माल बाहर भेजा जाता है। इन धातुओं पर 18 फीसदी की दर से जीएसटी लागू है, जो बहुत अधिक है। ये दर अधिक से अधिक 12 फीसदी तक होनी चाहिए। आईटीसी के फर्जीवाड़े की एक बड़ी वजह ये दर भी है।
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बीेते सोमवार को ही ऊपरकोट स्थित आरजी मेटल कंपनी पर वाणिज्य कर विभाग की एसआईबी टीम ने छापा मार कर 62 लाख रुपये की फर्जी आईटीसी का मामला पकड़ा है। ये फर्म तक पकड़ में आई जब इससे जुड़ी दो अन्य फर्मों सोनी धातु और गोविंद इस्पात की जांच हुई। सोनी धातु और गोविंद इस्पात में भ्री आइटीसी का फर्जीवाड़ा पकड़ा गया था।
जीएसटीएन पोर्टल एक बेहद एडवांस सिस्टम है। जिसमें आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस शामिल है। इसमें डाटा इकट्ठा होता रहता है। फर्जी कारोबार दिखा कर जिन लोगों ने भी झूठा आईटीसी का क्लेम लिया है, वो सभी लोग जांच के दायरे में है। इन सभी से वसूली भी होगी। कोई बच नहीं पाएगा। सितंबर से मार्च के बीच 167 मामले चिन्हित हो चुके हैं। इनके 1,51,25000 रुपये के आईटीसी क्लेम ब्लाक करा दिए हैं। ऐसे लोगों से 4.68 लाख रुपये की रिकवरी हुई है। कार्रवाई जारी रहेगी।
-विनय अस्थाना, एडिश्नल कमिश्नर ग्रेड वन।
समझिए ...ऐसे होती है सरकार से ठगी
अलीगढ़। आईटीसी का फर्जीवाड़ा ऐसे समझते हैं। मान लीजिए कि अलीगढ़ का कोई व्यापारी ए दिल्ली के व्यापारी बी से 100 रुपये का कच्चा माल यानी लोहा खरीदना दिखाता है। इस पर वह कच्चे माल की जीएसटी दर 12 फीसदी के अनुसार 12 रुपये जीएसटी देता है। लागत और मुनाफे के कुल आठ रुपये जोड़ कर 120 रुपये में माल तैयार करता है। ग्राहक से वह तैयार माल की जीएसटी दर के अनुसार 14.40 रुपये की पूरी जीएसटी लेता है, जिससे माल की कुल कीमत 134.40 रुपये हो जाती है।
ग्राहक से वसूली गई 14.40 रुपये की जीएसटी में से वह व्यापारी विभाग को केवल 2.40 रुपये देता है। 12 रुपये की आईटीसी का क्लेम करता है, जो टैक्स वह पहले दिल्ली के व्यापारी को दे चुका है। अब ये माल न तो कहीं से खरीदा गया था, न ही कहीं बेचा गया। दरअसल, दिल्ली के व्यापारी बी ने भी कोई माल नहीं खरीदा था। केवल अपने थ्री-बी फार्म में खरीद दिखा दी। फर्जी आईटीसी का खेल वहीं से शुरू हुआ। इसलिए विभाग को फर्जी आईटीसी वसूलने से नुकसान होता है। जीएसटी लागू होने के दौरान ग्राहकों को सस्ता माल मुहैया कराने के लिए व्यापारियों को आईटीसी की सुविधा दी गई थी, लेकिन इसका दुरुपयोग कर कई लोगों ने करोड़ों रुपयें की टैक्स चोरी की है।
आईटीसी धोखाधड़ी
1-पहली सिंतबर 2020 से 20 मार्च 2021 तक 167 मामले आए
2-1,51,25000 के क्लेम ब्लाक, 4.68 लाख रुपये की रिकवरी हुई
3-चार वित्तीय वर्ष में लगभग 750 से अधिक केस पकड़े गए हैं
4-वर्ष 2018 में सूबे में पहली गिरफ्तारी अलीगढ़ जिले में हुई थी
आईटीसी फर्जीवाड़ा क्यों बढ़ा
1-पहली जुलाई 2017 को जीएसटी लागू होने के साथ आईटीसी लागू हुआ
2-लोहा, पीतल, तांबा और जस्ता पर 18 फीसदी की दर से जीएसटी लागू
3-अलीगढ़ में लोहा, तांबा, पीतल और जस्ता का सर्वाधिक प्रयोग होता है
4-18 फीसदी की दर बहुत अधिक होने के कारण आईटीसी के फर्जीवाड़े बढ़े