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रसोई गैस में लगी महंगाई की आग, उज्जवला लाभार्थियों ने सुलगाए चूल्हे
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अतरौली में चूल्हे पर खाना बनातीं प्रीती देवी
- फोटो : ATHROLI
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आशीष श्रीवास्तव
रसोई गैस के दाम में लगातार हो रही बढ़ोतरी से लाभार्थी उज्जवला योजना का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। पिछले एक माह में तीन बार में रसोई गैस सिलिंडर के दामों में 100 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। इससे परेशान होकर उज्जवला योजना के लाभार्थी फिर से लकड़ी व उपले से चूल्हा फूंकने पर मजबूर हो गए हैं। वर्तमान में गैस सिलिंडर के दाम 837 रुपये तक पहुंच गए हैं।
एक मई 2016 को प्रधानमंत्री उज्जवला योजना की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि वे गरीबी की रेखा से नीचे रह रही महिलाओं को चूल्हे के धुएं से होने वाली बीमारी से बचाने के लिए योजना की शुरूआत कर रहे हैं। चूल्हे पर खाना बनाने से महिलाओं की आँखों पर तो असर पड़ता ही है, साथ ही दमा समेत अन्य बीमारियां भी हो जाती हैं। लेकिन सरकार द्वारा रसोई गैस के दामों में निरंतर इजाफे से सरकार का मकसद पूरा नहीं हो पा रहा है। पिछले एक माह में सिलिंडर के दामों में तीन बार में हुई 100 रुपये की वृद्धि से उज्जवला योजना के गरीबों के घर में सिलिंडर सिर्फ शोपीस बन कर रह गया है। उनके घर की महिलाएं दोबारा से चूल्हा फूंकने पर मजबूर हो गई हैं। विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में यही हाल है।
एक माह में इस तरह बढ़े गैस के दाम
- 2 फरवरी - 50 रुपया
-24 फरवरी - 25 रुपया
-1 मार्च -25 रुपया
खपत में आई करीब 20 फीसदी कमी
अलीगढ़। अलीगढ़ एलपीजी गैस एसोसिएशन के अध्यक्ष कमला कांत तिवारी ने बताया कि गैस के दाम में इजाफे से सिलिंडरों की खपत में 15 से 20 फीसदी की कमी आई है। हालांकि इसके पीछे मौसम भी बड़ा कारण है। सर्दियों में आमतौर पर सिलिंडरों की खपत बढ़ जाती है और गर्मियां आते-आते इसमें कमी हो जाती है।
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2500 कनेक्शन हुए खत्म
उज्जवला योजना में जनपद में 2.35 लाख लाभार्थियों में से 2500 लाभार्थियों ने तो एक माह बाद से ही योजना में सिलिंडर लेना बंद कर दिया था। एक सिलिंडर लेने के बाद कई साल तक सिलिंडर न लेने से उनके कनेक्शन स्वत: ही खत्म हो गए।
यह थी व्यवस्था
अलीगढ़। योजना में गरीबी की रेखा से नीचे रह रहे लाभार्थियों के लिए सिक्योरिटी का 1500 रुपया माफ था। गैस चूल्हे के 1500 रुपये व रेगुलेटर के 150 रुपये के लिए ऋण का प्रावधान था। यह रुपया उनकी सब्सिडी में से कटना था। वे सीधे भी चूल्हा व रेगुलेटर खरीद सकते थे। इस दशा में उन्हें सब्सिडी सीधे मिलनी थी।
उज्जवला योजना के सिलिंडरों की खपत में कमी आई है। इसका कारण सिलिंडर पर महंगाई हो सकता है, लेकिन सबसे ज्यादा असर मौसम का है। अन्य कारण भी हैं।
सौरभ यादव, सेल्स अफसर, बीपीसीएल
सिलिंडर के जोड़े हाथ, चूल्हे की लकड़ी में पक रही रोटी और दाल
दिनोंदिन गैस सिलिंडर की बढ़ती कीमतों के कारण गरीब परिवार की महिलाओं ने उज्ज्वला में मिले गैस सिलिंडर के हाथ जोड़ लिए हैं। इसकी जगह थोड़ी सी मेहनत पर जंगलों से मुफ्त मिलने वाली लकड़ी के जरिए चूल्हों पर घर-घर खाना बनने लगा है। गोंडा कस्बे के दरबर स्थित अपने घर पर चूल्हे पर लकड़ी में खाना बना रहीं राजेश देवी ने बताया कि उज्जवला योजना में गैस कनेक्शन मुफ्त मिला था, तब लगा कि अब धुएं से छुटकारा मिल गया। तीन माह में करीब ढाई सौ रुपये बढ़ गए। इतना रुपया सिलिंडर पर खर्च नहीं कर सकतीं। चूल्हे पर लकड़ी में खाना बनाना बिल्कुल मुफ्त है। अतरौली कस्बे के मोहल्ला खेरापतान निवासी लीलावती व प्रीति का कहना है कि उन्होंने सिलिंडर को घर के एक कोने में रख दिया है। गैस सिलिंडर के दाम 800 रुपये तक पहुंच गए हैं। ऐसे में सिलिंडर भरवाना बूते से बाहर है। चूल्हे में लकड़ी जलाकर भोजन बना रही हैं।
तीस फीसदी लोग भी नहीं ले रहे सिलिंडर
खैर। खैर में इंडेन और भारत गैस की एजेंसी है। इंडेन की एजेंसी में करीब 11 हजार और भारत गैस एजेंसी में करीब 4500 उज्ज्वला योजना के कनेक्शन हैं। दोनों एजेंसियों के अनुसार उज्ज्वला योजना के तीस फीसदी लाभार्थी भी गैस सिलिंडर नहीं ले रहे हैं। अप्रैल में गैस सब्सिडी बंद होने और दिसंबर के बाद कीमतों में अचानक बढ़ोत्तरी के चलते गरीब परिवारों के लिए गैस सिलिंडर की आग में खाना बनाना मुश्किल हो गया। खैर स्थित ओम इंडेन गैस एजेंसी के संचालक ठा. कपिल सिंह ने बताया कि करीब 11 हजार लोगों ने उज्ज्वला योजना में कनेक्शन लिया था। इनमें से करीब तीन हजार उपभोक्ता भी सिलिंडर की रिफिलिंग नहीं करा रहे हैं। हमारा काम तो लोगों को सिलिंडर उपलब्ध कराना है। जो नंबर बुक होते हैं। हम उनको सिलिंडर भिजवाते हैं।
इनकी अपनी बात...
सिलिंडर और चूल्हा तो मिला लेकिन उसका फायदा नहीं मिल पा रहा। शुरू में कुछ दिन सिलिंडर के जरिए खाना बनाया। एक-दो बार सिलिंडर भरवाया। अब दाम इतने बढ़ गए हैं कि चूल्हे पर लकड़ी में खाना बनाना पड़ रहा है। - नेमवती कुशवाह, निवासी मानपुर।
करीब दो साल पहले गैस सिलिंडर लिया था। लगातार सिलिंडर के बढ़ते दाम के चलते दो माह से सिलिंडर नहीं भरवा पा रहे हैं। जंगल में लकड़ी मुफ्त मिल जाती है। गोबर के उपले भी हैं। इसलिए चूल्हे पर खाना बनाना पड़ रहा है। -सरिता देवी, निवासी बामौती।
जबसे सिलिंडर पर सब्सिडी मिलना बंद हुई है तब से गैस सिलिंडर नहीं भरवा पा रहे हैं। 500 रुपये से ज्यादा दाम में सिलिंडर खरीदना हमारे बूते के बाहर है। इससे सस्ता तो लकड़ी का चूल्हा है। हम चूल्हे पर ही खाना बना रहे हैं। -सोहन देवी, निवासी मानपुर खैर।
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रसोई गैस के दाम में लगातार हो रही बढ़ोतरी से लाभार्थी उज्जवला योजना का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। पिछले एक माह में तीन बार में रसोई गैस सिलिंडर के दामों में 100 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। इससे परेशान होकर उज्जवला योजना के लाभार्थी फिर से लकड़ी व उपले से चूल्हा फूंकने पर मजबूर हो गए हैं। वर्तमान में गैस सिलिंडर के दाम 837 रुपये तक पहुंच गए हैं।
एक मई 2016 को प्रधानमंत्री उज्जवला योजना की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि वे गरीबी की रेखा से नीचे रह रही महिलाओं को चूल्हे के धुएं से होने वाली बीमारी से बचाने के लिए योजना की शुरूआत कर रहे हैं। चूल्हे पर खाना बनाने से महिलाओं की आँखों पर तो असर पड़ता ही है, साथ ही दमा समेत अन्य बीमारियां भी हो जाती हैं। लेकिन सरकार द्वारा रसोई गैस के दामों में निरंतर इजाफे से सरकार का मकसद पूरा नहीं हो पा रहा है। पिछले एक माह में सिलिंडर के दामों में तीन बार में हुई 100 रुपये की वृद्धि से उज्जवला योजना के गरीबों के घर में सिलिंडर सिर्फ शोपीस बन कर रह गया है। उनके घर की महिलाएं दोबारा से चूल्हा फूंकने पर मजबूर हो गई हैं। विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में यही हाल है।
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एक माह में इस तरह बढ़े गैस के दाम
- 2 फरवरी - 50 रुपया
-24 फरवरी - 25 रुपया
-1 मार्च -25 रुपया
खपत में आई करीब 20 फीसदी कमी
अलीगढ़। अलीगढ़ एलपीजी गैस एसोसिएशन के अध्यक्ष कमला कांत तिवारी ने बताया कि गैस के दाम में इजाफे से सिलिंडरों की खपत में 15 से 20 फीसदी की कमी आई है। हालांकि इसके पीछे मौसम भी बड़ा कारण है। सर्दियों में आमतौर पर सिलिंडरों की खपत बढ़ जाती है और गर्मियां आते-आते इसमें कमी हो जाती है।
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2500 कनेक्शन हुए खत्म
उज्जवला योजना में जनपद में 2.35 लाख लाभार्थियों में से 2500 लाभार्थियों ने तो एक माह बाद से ही योजना में सिलिंडर लेना बंद कर दिया था। एक सिलिंडर लेने के बाद कई साल तक सिलिंडर न लेने से उनके कनेक्शन स्वत: ही खत्म हो गए।
यह थी व्यवस्था
अलीगढ़। योजना में गरीबी की रेखा से नीचे रह रहे लाभार्थियों के लिए सिक्योरिटी का 1500 रुपया माफ था। गैस चूल्हे के 1500 रुपये व रेगुलेटर के 150 रुपये के लिए ऋण का प्रावधान था। यह रुपया उनकी सब्सिडी में से कटना था। वे सीधे भी चूल्हा व रेगुलेटर खरीद सकते थे। इस दशा में उन्हें सब्सिडी सीधे मिलनी थी।
उज्जवला योजना के सिलिंडरों की खपत में कमी आई है। इसका कारण सिलिंडर पर महंगाई हो सकता है, लेकिन सबसे ज्यादा असर मौसम का है। अन्य कारण भी हैं।
सौरभ यादव, सेल्स अफसर, बीपीसीएल
सिलिंडर के जोड़े हाथ, चूल्हे की लकड़ी में पक रही रोटी और दाल
दिनोंदिन गैस सिलिंडर की बढ़ती कीमतों के कारण गरीब परिवार की महिलाओं ने उज्ज्वला में मिले गैस सिलिंडर के हाथ जोड़ लिए हैं। इसकी जगह थोड़ी सी मेहनत पर जंगलों से मुफ्त मिलने वाली लकड़ी के जरिए चूल्हों पर घर-घर खाना बनने लगा है। गोंडा कस्बे के दरबर स्थित अपने घर पर चूल्हे पर लकड़ी में खाना बना रहीं राजेश देवी ने बताया कि उज्जवला योजना में गैस कनेक्शन मुफ्त मिला था, तब लगा कि अब धुएं से छुटकारा मिल गया। तीन माह में करीब ढाई सौ रुपये बढ़ गए। इतना रुपया सिलिंडर पर खर्च नहीं कर सकतीं। चूल्हे पर लकड़ी में खाना बनाना बिल्कुल मुफ्त है। अतरौली कस्बे के मोहल्ला खेरापतान निवासी लीलावती व प्रीति का कहना है कि उन्होंने सिलिंडर को घर के एक कोने में रख दिया है। गैस सिलिंडर के दाम 800 रुपये तक पहुंच गए हैं। ऐसे में सिलिंडर भरवाना बूते से बाहर है। चूल्हे में लकड़ी जलाकर भोजन बना रही हैं।
तीस फीसदी लोग भी नहीं ले रहे सिलिंडर
खैर। खैर में इंडेन और भारत गैस की एजेंसी है। इंडेन की एजेंसी में करीब 11 हजार और भारत गैस एजेंसी में करीब 4500 उज्ज्वला योजना के कनेक्शन हैं। दोनों एजेंसियों के अनुसार उज्ज्वला योजना के तीस फीसदी लाभार्थी भी गैस सिलिंडर नहीं ले रहे हैं। अप्रैल में गैस सब्सिडी बंद होने और दिसंबर के बाद कीमतों में अचानक बढ़ोत्तरी के चलते गरीब परिवारों के लिए गैस सिलिंडर की आग में खाना बनाना मुश्किल हो गया। खैर स्थित ओम इंडेन गैस एजेंसी के संचालक ठा. कपिल सिंह ने बताया कि करीब 11 हजार लोगों ने उज्ज्वला योजना में कनेक्शन लिया था। इनमें से करीब तीन हजार उपभोक्ता भी सिलिंडर की रिफिलिंग नहीं करा रहे हैं। हमारा काम तो लोगों को सिलिंडर उपलब्ध कराना है। जो नंबर बुक होते हैं। हम उनको सिलिंडर भिजवाते हैं।
इनकी अपनी बात...
सिलिंडर और चूल्हा तो मिला लेकिन उसका फायदा नहीं मिल पा रहा। शुरू में कुछ दिन सिलिंडर के जरिए खाना बनाया। एक-दो बार सिलिंडर भरवाया। अब दाम इतने बढ़ गए हैं कि चूल्हे पर लकड़ी में खाना बनाना पड़ रहा है। - नेमवती कुशवाह, निवासी मानपुर।
करीब दो साल पहले गैस सिलिंडर लिया था। लगातार सिलिंडर के बढ़ते दाम के चलते दो माह से सिलिंडर नहीं भरवा पा रहे हैं। जंगल में लकड़ी मुफ्त मिल जाती है। गोबर के उपले भी हैं। इसलिए चूल्हे पर खाना बनाना पड़ रहा है। -सरिता देवी, निवासी बामौती।
जबसे सिलिंडर पर सब्सिडी मिलना बंद हुई है तब से गैस सिलिंडर नहीं भरवा पा रहे हैं। 500 रुपये से ज्यादा दाम में सिलिंडर खरीदना हमारे बूते के बाहर है। इससे सस्ता तो लकड़ी का चूल्हा है। हम चूल्हे पर ही खाना बना रहे हैं। -सोहन देवी, निवासी मानपुर खैर।

खैर के गांव मानपुर स्थित अपने घर पर चूल्हे पर खाना पकाती महिला।- फोटो : KHAR