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वीजा के नाम पर ट्रंप ने डरा रखा था, बाइडन का रुख सकारात्मक
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सितांशु माहेश्वरी।
- फोटो : CITY OFFICE
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इकराम वारिस
अमेरिका में कोरोना वायरस से तबाही मची हुई है। होटल, रेस्टोरेंट, कारखाना, स्कूल सब बंद हैं। लोगों का व्यवहार भी बदल गया है। जो लोग हाथ मिलाकर, गले लगकर अभिवादन करते थे, अब नमस्ते, हाय-हैलो कर रहे हैं। अमेरिका के सिएटल शहर में रहने वाले साफ्टवेयर इंजीनियर सितांशु माहेश्वरी ने बताया कि डोनाल्ड ट्रंप ने वीजा के नाम पर डरा रखा था, लेकिन जो बाइडन का रुख भारतीयों के प्रति सकारात्मक है।
महानगर के रघुवीरपुरी, गूलर रोड निवासी शांति प्रसाद माहेश्वरी के बेटे सितांशु दस साल से अमेरिका में रह रहे हैं। वे हर साल दीपावली मनाने घर आते थे, लेकिन कोरोना व फ्लाइट बंद होने की वजह से नहीं आ पाए थे। अब तीन दिन पहले आए हैं। उन्होंने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव में ज्यादातर भारतीयों का झुकाव जो बाइडन की तरफ था, पिछली बार ट्रंप के साथ था। बाइडन का रुख भारतीयों व भारत के प्रति सकारात्मक रहेगा, क्योंकि बाइडन के मंत्रिमंडल में भारतीय मूल के लोगों की तादाद ज्यादा होगी। साथ ही भारतीय मूल की कमला हैरिस उपराष्ट्रपति पद का चुनाव जीती हैं।
भारतीयों के तीन साल डर में बीते
सितांशु ने बताया कि राष्ट्रपति बनते ही डोनाल्ड ट्रंप ने एच-1 वीजा को खत्म करने की बात कही थी। हालांकि, मौखिक आदेश लिखित में तब्दील नहीं हो पाया। मगर, भारतीयों को यह डर सता रहा था कि कहीं अमेरिका छोड़ने का आदेश जारी न हो जाए। तीन साल तक वह डर में जीते रहे। अब नवनिर्वाचित बाइडन से उम्मीदें हैं कि वह भारतीयों के लिए बेहतर राष्ट्रपति साबित होंगे।
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एक साल से नहीं कटवाए बाल
सितांशु ने बताया कि अमेरिका में कोरोना का कहर इतना था कि चारों तरफ बस इसका ही शोर था। मार्च, अप्रैल में तो बुरे हालात हो गए थे। रोजमर्रा की चीजों की कमी हो गई थी। मई में जिंदगी पटरी पर लौटने लगी। फिर भी लोगों में कोरोना को लेकर डर बस गया है। इसलिए खुद व बच्चों के बाल भी नहीं कटवाए। चार जनवरी तक रेस्टोरेंट आदि बंद हैं। अमेरिकी अपने घरों पर ही क्रिसमस मनाएंगे।
भारतीय संस्कृति की धमक
सितांशु ने बताया कि कोरोना ने अमेरिका में भारतीय संस्कृति वापस ला दी है। कई घरों के बाहर सिंक लगाया गया है, जिससे कि घर में प्रवेश करने से पहले लोग हाथ-मुंह धो लें। ज्यादातर लोगों ने अपने दरवाजे के पास ही पानी रख दिया, जब वह घर में आते हैं तो पहले हाथ-मुंह धो लेते हैं। लोगों ने कहना शुरू कर दिया है कि यही भारतीय संस्कृति है।
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अमेरिका में कोरोना वायरस से तबाही मची हुई है। होटल, रेस्टोरेंट, कारखाना, स्कूल सब बंद हैं। लोगों का व्यवहार भी बदल गया है। जो लोग हाथ मिलाकर, गले लगकर अभिवादन करते थे, अब नमस्ते, हाय-हैलो कर रहे हैं। अमेरिका के सिएटल शहर में रहने वाले साफ्टवेयर इंजीनियर सितांशु माहेश्वरी ने बताया कि डोनाल्ड ट्रंप ने वीजा के नाम पर डरा रखा था, लेकिन जो बाइडन का रुख भारतीयों के प्रति सकारात्मक है।
महानगर के रघुवीरपुरी, गूलर रोड निवासी शांति प्रसाद माहेश्वरी के बेटे सितांशु दस साल से अमेरिका में रह रहे हैं। वे हर साल दीपावली मनाने घर आते थे, लेकिन कोरोना व फ्लाइट बंद होने की वजह से नहीं आ पाए थे। अब तीन दिन पहले आए हैं। उन्होंने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव में ज्यादातर भारतीयों का झुकाव जो बाइडन की तरफ था, पिछली बार ट्रंप के साथ था। बाइडन का रुख भारतीयों व भारत के प्रति सकारात्मक रहेगा, क्योंकि बाइडन के मंत्रिमंडल में भारतीय मूल के लोगों की तादाद ज्यादा होगी। साथ ही भारतीय मूल की कमला हैरिस उपराष्ट्रपति पद का चुनाव जीती हैं।
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भारतीयों के तीन साल डर में बीते
सितांशु ने बताया कि राष्ट्रपति बनते ही डोनाल्ड ट्रंप ने एच-1 वीजा को खत्म करने की बात कही थी। हालांकि, मौखिक आदेश लिखित में तब्दील नहीं हो पाया। मगर, भारतीयों को यह डर सता रहा था कि कहीं अमेरिका छोड़ने का आदेश जारी न हो जाए। तीन साल तक वह डर में जीते रहे। अब नवनिर्वाचित बाइडन से उम्मीदें हैं कि वह भारतीयों के लिए बेहतर राष्ट्रपति साबित होंगे।
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एक साल से नहीं कटवाए बाल
सितांशु ने बताया कि अमेरिका में कोरोना का कहर इतना था कि चारों तरफ बस इसका ही शोर था। मार्च, अप्रैल में तो बुरे हालात हो गए थे। रोजमर्रा की चीजों की कमी हो गई थी। मई में जिंदगी पटरी पर लौटने लगी। फिर भी लोगों में कोरोना को लेकर डर बस गया है। इसलिए खुद व बच्चों के बाल भी नहीं कटवाए। चार जनवरी तक रेस्टोरेंट आदि बंद हैं। अमेरिकी अपने घरों पर ही क्रिसमस मनाएंगे।
भारतीय संस्कृति की धमक
सितांशु ने बताया कि कोरोना ने अमेरिका में भारतीय संस्कृति वापस ला दी है। कई घरों के बाहर सिंक लगाया गया है, जिससे कि घर में प्रवेश करने से पहले लोग हाथ-मुंह धो लें। ज्यादातर लोगों ने अपने दरवाजे के पास ही पानी रख दिया, जब वह घर में आते हैं तो पहले हाथ-मुंह धो लेते हैं। लोगों ने कहना शुरू कर दिया है कि यही भारतीय संस्कृति है।