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शांति निकेतन कॉलोनी के 41 आवंटियों को नोटिस
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शाहजमाल ईदगाह के पास बनी शांति निकेतन कालोनी में एक कमरे वाले ईडब्लूएस 275 आवास वर्ष 1990 में बने थे। दो कमरे वाले एलआईजी आवास 1992 में बने थे। वर्ष 1992 में राम जन्मभूमि आंदोलन के समय दंगा भड़कने के कारण कुछ लोग भाग कर इन आवासों में छिप गए थे। बाद में इन्हीं में बस गए। तत्कालीन डीएम तुलसी गौड़ ने ईडब्लूएस आवासों में रहने वाले लोगों को एक एक हजार रुपया शुल्क जमा कर आवास उन्हीं के नाम आवंटित कर दिए थे। उस समय इन आवासों की कीमत 28 हजार व 30 हजार रुपये आंकी गई थी। ग्राउंड फ्लोर के आवास की कीमत 30 हजार व ऊपर के आवासों की कीमत 28 हजार थी। नोटरी के आधार पर हुई इस कार्रवाई में आवंटियों को 150 रुपये प्रति माह प्राधिकरण को किस्त देनी थी।
बार बार बिके आवास तो कौन दे किस्त
क्षेत्रीय पार्षद मुशर्रफ हुसैन महजर ने बताया कि यह ईडब्लूएस आवास बार बार बिके हैं। दंगे के समय कब्जा पाने वाले कई लोग स्थिति सामान्य होने के बाद दूसरे स्थानों पर चले गए और इन आवासों को किसी और को बेच गए। खरीददार ने कुछ समय बाद यह आवास किसी और को बेच दिया। इस खरीद-फरोख्त में प्राधिकरण की किस्त किसी ने जमा नहीं की। यह राशि बढ़कर अब लाखों में पहुंच गई है।
किस्त जमा न करने एवं ओटीएस स्कीम में आवेदन न करने वाले शांति निकेतन कालोनी के 41 आवंटियों को नोटिस जारी कर दिए गए हैं। शेष आवंटियों को नोटिस जारी करने की कार्रवाई चल रही है। - आलोक गुप्ता, ओएसडी एडीए
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बार बार बिके आवास तो कौन दे किस्त
क्षेत्रीय पार्षद मुशर्रफ हुसैन महजर ने बताया कि यह ईडब्लूएस आवास बार बार बिके हैं। दंगे के समय कब्जा पाने वाले कई लोग स्थिति सामान्य होने के बाद दूसरे स्थानों पर चले गए और इन आवासों को किसी और को बेच गए। खरीददार ने कुछ समय बाद यह आवास किसी और को बेच दिया। इस खरीद-फरोख्त में प्राधिकरण की किस्त किसी ने जमा नहीं की। यह राशि बढ़कर अब लाखों में पहुंच गई है।
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किस्त जमा न करने एवं ओटीएस स्कीम में आवेदन न करने वाले शांति निकेतन कालोनी के 41 आवंटियों को नोटिस जारी कर दिए गए हैं। शेष आवंटियों को नोटिस जारी करने की कार्रवाई चल रही है। - आलोक गुप्ता, ओएसडी एडीए
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