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एएमयू पर भड़का रेलवे, कहा-छात्रों को भेजने में हुई अनुशासनहीनता
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एएमयू पर भड़का रेलवे, कहा-छात्रों
को भेजने में हुई अनुशासनहीनता
डीआरएम ने प्रदेश सरकार को लिखा पत्र, कहा- लेटलतीफी के कारण आठ घंटे की देरी से पहुंची ट्रेन
एएमयू से जताई आपत्ति, कहा- अंतिम समय में डेस्टिनेशन बदला, लगा दिए थे जनरल बोगी के डिब्बे
अमर उजाला ब्यूरो
अलीगढ़। पिछले दिनों एक विशेष ट्रेन से बिहार भेजे गए अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्रों के ट्रेन में चढ़ने में हुई देरी और अनुशासनहीनता पर रेलवे के आला अधिकारियों ने उत्तर प्रदेश सरकार के समक्ष आपत्ति जताई है। डीआरएम ने पत्र लिखकर इस पूरी घटना का संज्ञान लेने के लिए कहा है। पत्र के मुताबिक अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के बिहार जाने वाले छात्रों की लेटलतीफी के चलते ट्रेन 8 घंटे देरी से गंतव्य की ओर रवाना हो सकी, जो रेलवे के नियमों और ट्रेन संचालन के मानकों के घोर विपरीत है।
पत्र में कहा गया है कि आठ मई को अलीगढ़ से बिहार के पूर्णिया के लिए 1282 छात्रों को विशेष ट्रेन से रवाना किया गया था। छात्रों के लिए ट्रेन में चढ़ने के लिए 3 घंटे निर्धारित किए गए थे। लेकिन अनुशासनहीनता के चलते आठ घंटे से भी अधिक का समय लग गया। रेलवे स्टेशन पर छात्रों को नियंत्रित करने के लिए विश्वविद्यालय की ओर से स्टाफ भी तैनात नहीं किया गया। यही नहीं, पूर्व नियोजित योजना के तहत निर्धारित छात्र के निर्धारित कोच में सीट पर बैठने की व्यवस्था थी। लेकिन इस प्रोटोकॉल का भी पालन नहीं किया गया।
एएमयू ने किया पलटवार, खामी छुपा रहा रेलवे
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय जनसंपर्क विभाग के एमआईसी प्रोफेसर शाफे किदवई का कहना है कि रेलवे ने इस पूरे प्रकरण में अपनी खामियों को छुपाया है, जो विशेष ट्रेन अलीगढ़ से रवाना हुई उसके संबंध में पहले तय था कि यह ट्रेन पटना तक जाएगी । छात्रों ने उसी के मुताबिक अपने नाम लिस्ट में शामिल कराए थे। लेकिन अंतिम क्षणों में पता लगा कि ट्रेन पूर्णिया जाएगी। इससे स्टेशन पर अफरा-तफरी की स्थिति बनी। दूसरे रेलवे को जो 7.24 लाख का भुगतान किया गया है, वह स्लीपर कोच के लिए था। लेकिन रेलवे ने विशेष ट्रेन में आधे से ज्यादा जनरल कोच लगा दिए थे। इससे भी अव्यवस्था की स्थिति बनी। इसके अलावा यह कहना कि स्टेशन पर कोई अधिकारी नहीं था, गलत है। वहां पर रजिस्ट्रार, कंट्रोलर, वित्त अधिकारी, डिस्टेंस एजुकेशन के डायरेक्टर, जनसंपर्क अधिकारी आदि मौजूद थे।
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एएमयू पर भड़का रेलवे, कहा-छात्रों
को भेजने में हुई अनुशासनहीनता
डीआरएम ने प्रदेश सरकार को लिखा पत्र, कहा- लेटलतीफी के कारण आठ घंटे की देरी से पहुंची ट्रेन
एएमयू से जताई आपत्ति, कहा- अंतिम समय में डेस्टिनेशन बदला, लगा दिए थे जनरल बोगी के डिब्बे
अमर उजाला ब्यूरो
अलीगढ़। पिछले दिनों एक विशेष ट्रेन से बिहार भेजे गए अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्रों के ट्रेन में चढ़ने में हुई देरी और अनुशासनहीनता पर रेलवे के आला अधिकारियों ने उत्तर प्रदेश सरकार के समक्ष आपत्ति जताई है। डीआरएम ने पत्र लिखकर इस पूरी घटना का संज्ञान लेने के लिए कहा है। पत्र के मुताबिक अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के बिहार जाने वाले छात्रों की लेटलतीफी के चलते ट्रेन 8 घंटे देरी से गंतव्य की ओर रवाना हो सकी, जो रेलवे के नियमों और ट्रेन संचालन के मानकों के घोर विपरीत है।
पत्र में कहा गया है कि आठ मई को अलीगढ़ से बिहार के पूर्णिया के लिए 1282 छात्रों को विशेष ट्रेन से रवाना किया गया था। छात्रों के लिए ट्रेन में चढ़ने के लिए 3 घंटे निर्धारित किए गए थे। लेकिन अनुशासनहीनता के चलते आठ घंटे से भी अधिक का समय लग गया। रेलवे स्टेशन पर छात्रों को नियंत्रित करने के लिए विश्वविद्यालय की ओर से स्टाफ भी तैनात नहीं किया गया। यही नहीं, पूर्व नियोजित योजना के तहत निर्धारित छात्र के निर्धारित कोच में सीट पर बैठने की व्यवस्था थी। लेकिन इस प्रोटोकॉल का भी पालन नहीं किया गया।
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एएमयू ने किया पलटवार, खामी छुपा रहा रेलवे
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय जनसंपर्क विभाग के एमआईसी प्रोफेसर शाफे किदवई का कहना है कि रेलवे ने इस पूरे प्रकरण में अपनी खामियों को छुपाया है, जो विशेष ट्रेन अलीगढ़ से रवाना हुई उसके संबंध में पहले तय था कि यह ट्रेन पटना तक जाएगी । छात्रों ने उसी के मुताबिक अपने नाम लिस्ट में शामिल कराए थे। लेकिन अंतिम क्षणों में पता लगा कि ट्रेन पूर्णिया जाएगी। इससे स्टेशन पर अफरा-तफरी की स्थिति बनी। दूसरे रेलवे को जो 7.24 लाख का भुगतान किया गया है, वह स्लीपर कोच के लिए था। लेकिन रेलवे ने विशेष ट्रेन में आधे से ज्यादा जनरल कोच लगा दिए थे। इससे भी अव्यवस्था की स्थिति बनी। इसके अलावा यह कहना कि स्टेशन पर कोई अधिकारी नहीं था, गलत है। वहां पर रजिस्ट्रार, कंट्रोलर, वित्त अधिकारी, डिस्टेंस एजुकेशन के डायरेक्टर, जनसंपर्क अधिकारी आदि मौजूद थे।
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