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अब और सख्ती..जमातियों-बाहरी लोगों की जानकारी छिपाई तो होगा मुकदमा
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खेरेश्वर धाम चौराहे पर पसरा सन्नाटा ।
- फोटो : CITY OFFICE
लॉकडाउन के बीच बुधवार अपने जिले में पुलिस की सख्ती और बाहर से आए जमातियों को लेकर तमाम अशंकाओं के बीच गुजारा। दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में शामिल हुए जमातियों के अलीगढ़ में आने के कारण चर्चाओं का बाजार दिन भर गरम है। पुलिस-प्रशासन इनको तलाश करने और होम क्वारंटीन करने में जुटा रहा। दो दिन में तकरीबन 92 जमातियों को होम क्वारंटीन कराया गया है। इसी क्रम में डीएम ने ग्राम प्रधानों को इस संबंध में आदेश दिया गया है कि वह बाहर से आने वाले और जमातियों के विषय में सभी सूचनाएं दें, अन्यथा उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज हो सकता है। इधर, बुधवार को जिले में लॉकडाउन तोड़ने के पांच मुकदमे दर्ज किए गए हैं।
जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह ने कहा है कि लॉकडाउन का अक्षरश: पालन किया जाएगा। उन्होंने प्रधानों को अर्द्धशासकीय पत्र (डीओ लैटर) जारी किया है कि उनके गांवों में बाहर से आए लोगों को होम क्वारंटीन कराया जाए। ग्राम प्रधानों व शहरी क्षेत्र में वार्ड पार्षदों की जिम्मेदारी है कि वह अपने क्षेत्रों में पता लगाएं कि कितने लोग उनके यहां ऐसे ठहरे हुए हैं, जो की जमात में शामिल होने के लिए आए हैं। बाहर से आए जमातियों के संबंध में जिला प्रशासन को तत्काल स्वयं ही सूचना उपलब्ध करा दें। अगर, कोई इन्हें अपने घर में छुपाता पाया गया या सूचना छिपाने की जानकारी मिली तो उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा। इसके साथ ही ऐसे श्रमिकों की भी सूची मांगी है कि जो किसी भी सरकारी योजना से लाभांवित हो रहे हैं। इन सभी के लिए जिला प्रशासन की ओर से भोजन-राशन की व्यवस्था कराई जाएगी।
इधर, 17 राहत शिविरों में रह रहे 322 लोगों के लिए भी यह इंतजाम करना शुरू दिया गया है। यहां रोके गए दिहाड़ी मजदूरों के मनोरंजन के लिए भजन कीर्तन कराने या धर्म गुरुओं के जरिए धार्मिक उपदेश दिलाने का इंतजाम किया जाने लगा है। वहीं बाईपास से लेकर शहर की अंदरूनी सड़कों पर अब लॉकडाउन पूरी तरह से कारगार साबित हो रहा है। शहर की सड़कों पर केवल जरूरी वाहन ही दिख रहे हैं। बुधवार को सुबह सात बजे से 11 बजे से लोगों ने जरूरी काम निपटाया। सब्जी, दूध, दवा और अन्य सामान खरीदा।
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इसके बाद दोपहर 12 बजे के बाद सन्नाटा हो गया। बाईपास पर केवल इक्का दुक्का कामगार ही निकल रहे हैं। जिनको मौके पर ही शिविर पर रोका जा रहा है। वहीं बुधवार को राशन वितरण के दौरान राशन की दुकानों पर जरूर भीड़ दिखाई दी। इसके अलावा जगह-जगह सामाजिक संगठनों के स्तर से लेकर राजनीतिक लोगों और अन्य लोगों द्वारा गरीबों को खाना, राशन मुहैया कराए जाने का काम भी जारी है। जिला पुलिस के स्तर से थानेवार बुधवार को 947 लोगों को खाद्य सामग्री व 3550 लोगों को भोजन मुहैया कराया गया। इधर, बुधवार को लॉक डाउन तोड़ने के मामले में क्वार्सी में तीन और जवां में दो मुकदमे दर्ज किए गए हैं।
हबीब गार्डन में फूड बैंक दो दिन के लिए बंद
अलीगढ। जिला प्रशासन की ओर से बुधवार को जिले में राशन वितरण शुरू कर दिया है। इसको देखते हुए जिलाधिकारी ने अगले दो दिन हबीब गार्डन में बनाए फूड बैंक को बंद करने का निर्णय लिया है। डीएम के मुताबिक राशन वितरण के बाद लोगों को गेहूं और चावल की किल्लत का सामना नहीं पड़ेगा। बता दें कि इस फूड बैंक से गरीबों के घर-घर राशन और भोजन पहुंचाया जा रहा था। लॉक डाउन के दौरान कामकाज ठप होने और दुकानों के बंद होने से गरीबों को राशन की किल्लत का सामना न करना पड़े। इसके लिए यह कदम उठाया गया था।
शासन ने खाना वितरण को दिए पांच करोड़ रुपये
अलीगढ। प्रदेश सरकार की ओर से जिला प्रशासन को पांच करोड़ रुपये खाना वितरण के लिए दिए गए हैं। इस रकम से प्रवासी शिविरों में रह रहे लोगों और मजदूरों के लिए खाने की व्यवस्था की जाएगी। लोगों को आने वाले दिनों में लॉक डाउन के दौरान किसी भी प्रकार से खाने की किल्लत का सामना न करना पड़े। इसको देखते हुए यह रकम शासन ने सौंपी है।
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जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह ने कहा है कि लॉकडाउन का अक्षरश: पालन किया जाएगा। उन्होंने प्रधानों को अर्द्धशासकीय पत्र (डीओ लैटर) जारी किया है कि उनके गांवों में बाहर से आए लोगों को होम क्वारंटीन कराया जाए। ग्राम प्रधानों व शहरी क्षेत्र में वार्ड पार्षदों की जिम्मेदारी है कि वह अपने क्षेत्रों में पता लगाएं कि कितने लोग उनके यहां ऐसे ठहरे हुए हैं, जो की जमात में शामिल होने के लिए आए हैं। बाहर से आए जमातियों के संबंध में जिला प्रशासन को तत्काल स्वयं ही सूचना उपलब्ध करा दें। अगर, कोई इन्हें अपने घर में छुपाता पाया गया या सूचना छिपाने की जानकारी मिली तो उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा। इसके साथ ही ऐसे श्रमिकों की भी सूची मांगी है कि जो किसी भी सरकारी योजना से लाभांवित हो रहे हैं। इन सभी के लिए जिला प्रशासन की ओर से भोजन-राशन की व्यवस्था कराई जाएगी।
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इधर, 17 राहत शिविरों में रह रहे 322 लोगों के लिए भी यह इंतजाम करना शुरू दिया गया है। यहां रोके गए दिहाड़ी मजदूरों के मनोरंजन के लिए भजन कीर्तन कराने या धर्म गुरुओं के जरिए धार्मिक उपदेश दिलाने का इंतजाम किया जाने लगा है। वहीं बाईपास से लेकर शहर की अंदरूनी सड़कों पर अब लॉकडाउन पूरी तरह से कारगार साबित हो रहा है। शहर की सड़कों पर केवल जरूरी वाहन ही दिख रहे हैं। बुधवार को सुबह सात बजे से 11 बजे से लोगों ने जरूरी काम निपटाया। सब्जी, दूध, दवा और अन्य सामान खरीदा।
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इसके बाद दोपहर 12 बजे के बाद सन्नाटा हो गया। बाईपास पर केवल इक्का दुक्का कामगार ही निकल रहे हैं। जिनको मौके पर ही शिविर पर रोका जा रहा है। वहीं बुधवार को राशन वितरण के दौरान राशन की दुकानों पर जरूर भीड़ दिखाई दी। इसके अलावा जगह-जगह सामाजिक संगठनों के स्तर से लेकर राजनीतिक लोगों और अन्य लोगों द्वारा गरीबों को खाना, राशन मुहैया कराए जाने का काम भी जारी है। जिला पुलिस के स्तर से थानेवार बुधवार को 947 लोगों को खाद्य सामग्री व 3550 लोगों को भोजन मुहैया कराया गया। इधर, बुधवार को लॉक डाउन तोड़ने के मामले में क्वार्सी में तीन और जवां में दो मुकदमे दर्ज किए गए हैं।
हबीब गार्डन में फूड बैंक दो दिन के लिए बंद
अलीगढ। जिला प्रशासन की ओर से बुधवार को जिले में राशन वितरण शुरू कर दिया है। इसको देखते हुए जिलाधिकारी ने अगले दो दिन हबीब गार्डन में बनाए फूड बैंक को बंद करने का निर्णय लिया है। डीएम के मुताबिक राशन वितरण के बाद लोगों को गेहूं और चावल की किल्लत का सामना नहीं पड़ेगा। बता दें कि इस फूड बैंक से गरीबों के घर-घर राशन और भोजन पहुंचाया जा रहा था। लॉक डाउन के दौरान कामकाज ठप होने और दुकानों के बंद होने से गरीबों को राशन की किल्लत का सामना न करना पड़े। इसके लिए यह कदम उठाया गया था।
शासन ने खाना वितरण को दिए पांच करोड़ रुपये
अलीगढ। प्रदेश सरकार की ओर से जिला प्रशासन को पांच करोड़ रुपये खाना वितरण के लिए दिए गए हैं। इस रकम से प्रवासी शिविरों में रह रहे लोगों और मजदूरों के लिए खाने की व्यवस्था की जाएगी। लोगों को आने वाले दिनों में लॉक डाउन के दौरान किसी भी प्रकार से खाने की किल्लत का सामना न करना पड़े। इसको देखते हुए यह रकम शासन ने सौंपी है।