अजीब है पर सच: अपनी जमीन पर कब्जा पाने में पुलिस को लग गए साढ़े 15 साल, कुछ लोग कर रहे थे कब्जा
उपजिलाधिकारी ने पंचायत प्रशासक के पति घूरे सिंह को निर्देश दिया कि सड़क किनारे नाला खोदाई और निर्माण कराने के साथ पुलिस पड़ाव की जमीन पर चारों ओर तार फेंसिंग कराएं। अधिकारियों ने अपने सामने ही उक्त जमीन पर जगह-जगह सरिया गड़वाकर निशानदेही भी कराई।
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सुनने में भले ही अजीब लगे लेकिन सच यही है। फरवरी 2011 में गोंडा स्थित नगला दरबर की तत्कालीन प्रधान सोनिया चौधरी ने तीन बीघा जमीन पुलिस पड़ाव के नाम आवंटित की थी। राजस्व अभिलेख में भी यह दर्ज हो गई, लेकिन इस पर कब्जा पाने में गोंडा थाना पुलिस को 16 वर्ष साढ़े छह माह का समय लग गया।
पिछले सप्ताह ग्राम पंचायत प्रशासक के पति घूरे सिंह ने इस जमीन पर सफाई कराने के साथ सड़क किनारे नाला खोदवाया था। उसके अगले दिन इस जमीन पर अपने नाम पट्टा आवंटित होने का दावा करते हुए कुछ लोगों ने जेसीबी से खोदाई कराने के साथ मिट्टी डलवा दी। किसी ने सरकारी जमीन पर कब्जा किए जाने की शिकायत की तब पुलिस और प्रशासन के अधिकारी चौकन्ना हुए। गोंडा थाना पुलिस ने तत्काल मौके पर पहुंचकर मिट्टी की भराई रुकवाई।
सोमवार की दोपहर उपजिलाधिकारी आयुष जायसवाल, तहसीलदार ललित नारायण प्रशांत, सीओ कमलेश कुमार अपने साथ राजस्व टीम और पुलिस बल साथ लेकर पहुंचे। ग्राम पंचायत प्रशासक के पति घूरे सिंह को भी बुला लिया। आवंटित तीन बीघा जमीन की पैमाइश कराने के बाद अधिकारियों ने कहा कि उक्त जमीन पर कोई पट्टा नहीं है। जमीन पुलिस पड़ाव के नाम सरकारी अभिलेख में दर्ज है और थाना पुलिस की निगरानी में रहेगी। उक्त जमीन पर अस्थाई अतिक्रमण है जिसे तत्काल हटाने और ऐसा न करने पर सामान को जब्त कर नीलाम किए जाने की चेतावनी दी गई।
अब लगेगा पुलिस स्वामित्व का बोर्ड
उपजिलाधिकारी ने पंचायत प्रशासक के पति घूरे सिंह को निर्देश दिया कि सड़क किनारे नाला खोदाई और निर्माण कराने के साथ पुलिस पड़ाव की जमीन पर चारों ओर तार फेंसिंग कराएं। अधिकारियों ने अपने सामने ही उक्त जमीन पर जगह-जगह सरिया गड़वाकर निशानदेही भी कराई। थाना प्रभारी मोनू कुमार आर्य ने बताया कि उक्त जमीन को थाना पुलिस ने अपनी निगरानी में ले लिया है। वहां पर पुलिस स्वामित्व का बोर्ड लगवाया जाएगा। अब किसी ने इस जमीन पर अतिक्रमण करने की कोशिश की तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
कुछ विधिक कठनाइयों के कारण पुलिस उक्त जमीन पर कब्जा नहीं ले पा रही थी। कुछ ग्रामीण वर्ष 1988 में यहां पर अपने पट्टे बता रहे थे। नवागत एसडीएम ने कागज दिखवाए तो उसमें हाईकोर्ट के निर्देश में स्पष्ट है कि पट्टा आवंटन के तीन वर्ष के अंदर कब्जा नहीं लिया जाता है तो वह स्वत: निरस्त हो जाता है। यह साफ होने के बाद पुलिस ने अपनी जमीन पर कब्जा ले लिया। इस जमीन पर थाना भवन बनाने का प्रस्ताव तैयार कराया जाएगा।-कमलेश कुमार, सीओ इगलास।