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Aligarh: सूखे नशे की जद में किशोर और युवा, गली-मोहल्लों में पुड़िया में बिकती है मौत

Sat, 06 Aug 2022 09:56 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: अलीगढ़ ब्यूरो Updated Sat, 06 Aug 2022 09:56 AM IST
सार

जिला अस्पताल से काउंसलर जिला कारागार में भी बंदियों की काउंसिलिंग के लिए जाते हैं। वे बताते हैं कि जेल में आने वाले टीनएजर्स से युवा में 70 फीसदी नशे के कारण अपराध की गिरफ्त में आए हैं।

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Youths are getting caught by drugs in Aligarh
तलाक ने देने पर पति को खिलाया नशीला पदार्थ

विस्तार

कॉलर को थोड़ा ऊपर चढ़ाके, सिगरेट के धुएं का छल्ला उड़ाके...। हिंदी फिल्म का यह गीत आज के दौर में टीनएजर्स व युवाओं पर सटीक बैठता है। खेलने कूदने और दुनियादारी को समझने की उम्र में यह पीढ़ी नशे के चंगुल में फंसती जा रही है। उड़ता पंजाब की तर्ज पर अपने अलीगढ़ में भी टिनएजर्स सूखे नशे में जद में आ रहे हैं। हालांकि जिला पुलिस की सूखे नशे के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है, मगर जिला अस्पताल का काउंसिलिंग सेंटर बताता है कि यहां प्रति माह शराब व सूखे नशे की गिरफ्त में आए करीब 20 किशोरों को परिजन काउंसिलिंग के लिए लेकर पहुंचते हैं।

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जिला अस्पताल के काउंसलरों के अनुसार, यह एक ऐसी लत है कि इसके लगने के बाद चार प्रमुख बातें सामने आती हैं। पहली फ्रेमिंग मतलब नशे की आदत का न छूटना। दूसरा टॉलरेंस मतलब इसकी क्षमता बढ़ते जाना। तीसरी रोक न पाना, मतलब यह जानते हुए कि नुकसान हो रहा है पर उससे दूरी नहीं हो पाती। चौथी आपराधिक व्यवहार हो जाना, मतलब इसकी लत पूरी करने के लिए किशोर या युवा झूठ बोलने लेकर चोरी करने तक जैसी किसी भी हद तक जा सकता है। यह नशा दो वजह से होता है, पहला परिस्थिति और दूसरा अचानक से। टीनएजर्स व युवा हमेशा दोस्तों या अपने किसी बड़े को देखकर उसके साथ रहकर अचानक नशे की गिरफ्त में आते हैं।
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नशे की लत के कारण करने लगे क्राइम
जिला अस्पताल से काउंसलर जिला कारागार में भी बंदियों की काउंसिलिंग के लिए जाते हैं। वे बताते हैं कि जेल में आने वाले टीनएजर्स से युवा में 70 फीसदी नशे के कारण अपराध की गिरफ्त में आए हैं। जेल आने के बाद वे खुद परेशान हैं और बाहर उनके परिवार परेशान हैं। शुरुआत में परिवार ने ध्यान नहीं दिया। अब वे नशे की लत पूरा करने के लिए क्राइम करने लगे। यहां तक पहुंच गए।

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सक्रिय है नारकोटिक्स सेल
एसएसपी कलानिधि नैथानी बताते हैं कि अपने जिले में उन्होंने नारकोटिक्स सेल का पुनर्गठन कराया है। एंटी क्राइम हेल्पलाइन नंबर 9454402817 उसकी सूचनाओं के लिए नंबर निर्धारित किया गया है। यह टीम माल के प्रोड्यूसर, सप्लायर, कैशियर व डिस्ट्रीब्यूटर व यूजर पर शिकंजा कसने का काम करती है। सेल ने पिछले वर्ष मादक पदार्थ बिक्री के खिलाफ अभियान चलाकर 279 मुकदमों में 320 गिरफ्तारियां कीं, जिसमें 99 किलो पाउडर, 13 किलो गांजा, चरस, भांग व स्मैक तक पकड़ी गई। इस वर्ष जनवरी से मार्च तक 34 मुकदमों में 36 गिरफ्तारियां हुई हैं, जिनमें कई महिलाएं भी शामिल हैं। इस अभियान में 165 किलो गांजा, 2.98 किलो पाउडर बरामद किया है। गली मोहल्ले में पुड़ियों में गांजा बेचने वाले निशाने पर रहते हैं और लगातार कार्रवाई जारी है।

इस पर विराम के लिए सिस्टम से कहीं ज्यादा समाज व माता-पिता की जिम्मेदारी है। वे अगर शुरुआत में अंधविश्वासी होंगे तो आगे बड़ी परेशानी से दो-चार होंगे। इसलिए जरूरत है शुरुआत में ही ठोस कदम उठाने की, ताकि आगे बड़ी परेशानी से बचा जा सके। -डॉ.वीके राजपूत, नोडल काउंसिलिंग सेंटर

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