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अलीगढ़ः तोहफे में मिला फव्वारा बहा रहा बदहाली के आंसू
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एएमयू के छात्रसंघ भवन के सामने लगा फ्ववारा।
- फोटो : CITY OFFICE
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इकराम वारिस
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के संस्थापक सर सैयद अहमद खान को 159 साल पहले मिला फव्वारा (तोहफा) अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। उन्हें यह तोहफा तत्कालीन कलेक्टर लैन ने दिया था। इस फव्वारे का इतिहास नीले रंग के पेंट के बोझ में दब गया है, जो उर्दू लिपि में था।
मदरसा तुल उलूम बनने से पहले सर सैयद अहमद खान ने साइंटिफिक सोसाइटी बनाई थी, जिसकी इमारत बेहद खूबसूरत थी। 1863-1895 में जिला मजिस्ट्रेट लैन ने अपनी बेटी की स्मृति में फव्वारा बनाया था, जिसे उन्होंने सर सैयद को तोहफे में दिया था। इस फव्वारे को साइंटिफिक सोसाइटी की इमारत के सामने लगा दिया गया, जहां हकीम अजमल खान तिब्बिया कॉलेज का दवाखाना है। यह फव्वारा का इतिहास, एएमयू, मोहम्मडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज, मदरसा तुल उलूम से पहले का है। उस जमाने में इस फव्वारे को देखने के लिए लोग दूरदराज से आते थे।
एएएयू के जनसंपर्क कार्यालय के मेंबर एसोसिएट डॉ. राहत अबरार ने बताया कि इस फव्वारे का जिक्र मौलवी इफ्तिखार आलम की एएमयू कॉलेज की तहरीक में है। उन्होंने कहा कि कुलपति रास महमूद, इस फव्वारे को गेम्स कमेटी के पास लगवा दिया। इसके बाद कुलपति बने डॉ. जाकिर हुसैन ने इस फव्वारे को एएमयू छात्रसंघ भवन के सामने स्थापित करा दिया। दरअसल, वो छात्रसंघ के उपाध्यक्ष भी रहे थे। डॉ. राहत ने कहा कि एएमयू को सबसे ज्यादा तव्वजो ऐतिहासिक इमारतों पर देनी चाहिए, ताकि विरासत महफूज रह सके। वो इमारतें जो सर सैयद अहमद खान ने बनवाई या उनके दौर में बनी, अगर उन पर तवज्जो नहीं दी तो वह बर्बाद हो जाएंगी। नई नस्ल को कुछ पता नहीं चल सकेगा। उन्होंने अफसोस जताया कि जिसके लिए हेरिटेज सेल बना है, उसे इस बारे में कुछ पता नहीं है।
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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के संस्थापक सर सैयद अहमद खान को 159 साल पहले मिला फव्वारा (तोहफा) अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। उन्हें यह तोहफा तत्कालीन कलेक्टर लैन ने दिया था। इस फव्वारे का इतिहास नीले रंग के पेंट के बोझ में दब गया है, जो उर्दू लिपि में था।
मदरसा तुल उलूम बनने से पहले सर सैयद अहमद खान ने साइंटिफिक सोसाइटी बनाई थी, जिसकी इमारत बेहद खूबसूरत थी। 1863-1895 में जिला मजिस्ट्रेट लैन ने अपनी बेटी की स्मृति में फव्वारा बनाया था, जिसे उन्होंने सर सैयद को तोहफे में दिया था। इस फव्वारे को साइंटिफिक सोसाइटी की इमारत के सामने लगा दिया गया, जहां हकीम अजमल खान तिब्बिया कॉलेज का दवाखाना है। यह फव्वारा का इतिहास, एएमयू, मोहम्मडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज, मदरसा तुल उलूम से पहले का है। उस जमाने में इस फव्वारे को देखने के लिए लोग दूरदराज से आते थे।
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एएएयू के जनसंपर्क कार्यालय के मेंबर एसोसिएट डॉ. राहत अबरार ने बताया कि इस फव्वारे का जिक्र मौलवी इफ्तिखार आलम की एएमयू कॉलेज की तहरीक में है। उन्होंने कहा कि कुलपति रास महमूद, इस फव्वारे को गेम्स कमेटी के पास लगवा दिया। इसके बाद कुलपति बने डॉ. जाकिर हुसैन ने इस फव्वारे को एएमयू छात्रसंघ भवन के सामने स्थापित करा दिया। दरअसल, वो छात्रसंघ के उपाध्यक्ष भी रहे थे। डॉ. राहत ने कहा कि एएमयू को सबसे ज्यादा तव्वजो ऐतिहासिक इमारतों पर देनी चाहिए, ताकि विरासत महफूज रह सके। वो इमारतें जो सर सैयद अहमद खान ने बनवाई या उनके दौर में बनी, अगर उन पर तवज्जो नहीं दी तो वह बर्बाद हो जाएंगी। नई नस्ल को कुछ पता नहीं चल सकेगा। उन्होंने अफसोस जताया कि जिसके लिए हेरिटेज सेल बना है, उसे इस बारे में कुछ पता नहीं है।
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