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अलीगढ़ः कोरोना और बारिश की वजह से फीकी रही नुमाइश
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मोहम्मद सद्दाम। घरेलु साम्रगी विक्रेता
- फोटो : CITY OFFICE
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कोरोना संक्रमण और बारिश की वजह से इस बार की नुमाइश फीकी रही है। जलभराव और कीचड़ की वजह से काफी कम लोग ही पहुंचे इसलिए दुकानदारों का खर्चा निकालना भी मुश्किल हो गया है। दुकानदारों का कहना है कि कोरोना की वजह से लागू किए गए रात्रि कर्फ्यू और अंतिम समय पर हुई बारिश ने बजट गड़बड़ा दिया है। अब खर्चा निकल जाए, वही बहुत है। इधर, समापन के बावजूद मंगलवार को नुमाइश में खरीदारी के लिए लोगों की अच्छी खासी भीड़ दिखी।
दुकानदारों ने बताया कि नुमाइश में सबसे अधिक खरीदारी लोग शाम से लेकर देर रात तक करते हैं। कोरोना के बढ़ते प्रभाव के चलते रात्रि कर्फ्यू लागू हो गया। रात दस बजे के बाद दुकानों को बंद करना पड़ता था। रही सही कसर बारिश ने पूरी कर दी। जलभराव और कीचड़ की वजह से लोग दुकानों पर आने से कतराने लगे। इसका प्रभाव काफी पड़ा है। आलम यह है कि खर्चा ही नहीं निकल पा रहा है। मुनाफा क्या कमाएंगे। दुकानदारों ने कहा कि अगर नुमाइश कुछ दिन बढ़ जाती तो काफी राहत मिल जाती। लेकिन समापन की घोषणा के बाद अब घर निकलना होगा। इसीलिए सामान समेटकर जा रहे हैं। हालांकि, लोग अभी भी आ रहे हैं लेकिन, सरकारी स्टॉल, शिविर और कृषि प्रदर्शनी उखड़ गई है।
मास्क भूले लोग, सामाजिक दूरी का पालन नहीं
मंगलवार को नुमाइश में पहुंची भीड़ में कई लोग ऐसे थे। जो मास्क को भूल चुके थे। सामाजिक दूरी का भी पालन नहीं कर रहे थे। ऐसे में यह लापरवाही लोगों पर भारी पड़ सकती है।
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खर्चा निकल जाए वहीं, बहुत है
- नुमाइश में 45 सालों से हमारी घरेलू सामग्री की दुकान लग रही है। इस बार बारिश और कोरोना की वजह से बिना काफी नुकसान हुआ। खर्चा निकल जाए, वहीं काफी होगा। - मो. सद्दाम, मेरठ।
- 32 सालों से खिलौने की दुकान लगा रहा हूं। पिछले साल अच्छी बिक्री हुई है। कोरोना की बंदिश ने बिक्री पर प्रभाव डाला है। खर्चा भी नहीं निकला। - अशोक कुमार, मथुरा।
- सालों से कश्मीरी कपड़ों की दुकान लगाता हूं। इस बार कोरोना ने स्थिति बिगाड़ दी है। नुमाइश में ढंग की बिक्री नहीं हुई है। खर्चा निकल जाए, वही बहुत है। - नवाज, कश्मीरी दुकान।
- कोरोना के चलते लोग बाहर खाने-पीने से बचते रहे हैं। जबकि बारिश की कीचड़ से लोग आने से कतराते रहे। मुनाफा नहीं हुआ है, बस व्यापार ठीक हुआ है। - रामू, इटावा।
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दुकानदारों ने बताया कि नुमाइश में सबसे अधिक खरीदारी लोग शाम से लेकर देर रात तक करते हैं। कोरोना के बढ़ते प्रभाव के चलते रात्रि कर्फ्यू लागू हो गया। रात दस बजे के बाद दुकानों को बंद करना पड़ता था। रही सही कसर बारिश ने पूरी कर दी। जलभराव और कीचड़ की वजह से लोग दुकानों पर आने से कतराने लगे। इसका प्रभाव काफी पड़ा है। आलम यह है कि खर्चा ही नहीं निकल पा रहा है। मुनाफा क्या कमाएंगे। दुकानदारों ने कहा कि अगर नुमाइश कुछ दिन बढ़ जाती तो काफी राहत मिल जाती। लेकिन समापन की घोषणा के बाद अब घर निकलना होगा। इसीलिए सामान समेटकर जा रहे हैं। हालांकि, लोग अभी भी आ रहे हैं लेकिन, सरकारी स्टॉल, शिविर और कृषि प्रदर्शनी उखड़ गई है।
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मास्क भूले लोग, सामाजिक दूरी का पालन नहीं
मंगलवार को नुमाइश में पहुंची भीड़ में कई लोग ऐसे थे। जो मास्क को भूल चुके थे। सामाजिक दूरी का भी पालन नहीं कर रहे थे। ऐसे में यह लापरवाही लोगों पर भारी पड़ सकती है।
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खर्चा निकल जाए वहीं, बहुत है
- नुमाइश में 45 सालों से हमारी घरेलू सामग्री की दुकान लग रही है। इस बार बारिश और कोरोना की वजह से बिना काफी नुकसान हुआ। खर्चा निकल जाए, वहीं काफी होगा। - मो. सद्दाम, मेरठ।
- 32 सालों से खिलौने की दुकान लगा रहा हूं। पिछले साल अच्छी बिक्री हुई है। कोरोना की बंदिश ने बिक्री पर प्रभाव डाला है। खर्चा भी नहीं निकला। - अशोक कुमार, मथुरा।
- सालों से कश्मीरी कपड़ों की दुकान लगाता हूं। इस बार कोरोना ने स्थिति बिगाड़ दी है। नुमाइश में ढंग की बिक्री नहीं हुई है। खर्चा निकल जाए, वही बहुत है। - नवाज, कश्मीरी दुकान।
- कोरोना के चलते लोग बाहर खाने-पीने से बचते रहे हैं। जबकि बारिश की कीचड़ से लोग आने से कतराते रहे। मुनाफा नहीं हुआ है, बस व्यापार ठीक हुआ है। - रामू, इटावा।

रामू । खान पीन साम्रगी विक्रेता- फोटो : CITY OFFICE