{"_id":"6058fca58ebc3e592e0ea926","slug":"aligarh-muslim-university-city-office-news-ali259315485","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोरोना का एक सालः न मैदान पर खेल, न किचन में खाना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरोना का एक सालः न मैदान पर खेल, न किचन में खाना
विज्ञापन
प्रोक्टर प्रो. वसीम अली।
- फोटो : CITY OFFICE
दीपक शर्मा
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के खेल मैदानों पर पिछले एक साल से ताले लगे हैं। इसी तरह कभी न बंद होने वाला छात्रावासों का चूल्हा भी ठंडा पड़ा है। विश्वविद्यालय के विभिन्न हॉलों में चलने वाली किचन पिछले एक वर्ष से बंद है। यहां तक कि विश्वविद्यालय परिसर में संचालित होने वाली कैंटीन भी बंद है। ऐसी विषम परिस्थिति विश्वविद्यालय के 100 वर्ष के इतिहास में पहली बार आई है।
एएमयू मूलत: आवासीय विश्वविद्यालय है। सामान्य दिनों में यहां के छात्रावासों में 23 हजार से अधिक छात्र रहते हैं। 20 बड़े हॉल मिलाकर कुल 52 छात्रावास हैं। इन छात्रावासों में अलग-अलग किचन संचालित होते हैं। यहां पर छात्रों को नाश्ता, लंच और डिनर उपलब्ध कराया जाता है। किचन में काम करने वाले कर्मचारियों की तीन-तीन घंटे की तीन शिफ्ट में ड्यूटी रहती है। सामान्य दिनों में छात्रावास में नाश्ते में छोले भटूरे, ब्रेड मक्खन, छोले, पूड़ी, सब्जी आदि दिया जाता है। लंच में दाल, चावल, सब्जी रोटी, मीट आदि उपलब्ध रहता है। डिनर में भी सब्जी, रोटी, चावल बिरयानी के साथ मीट की उपलब्धता रहती है। लेकिन कोरोना के कारण किचन एक साल से बंद हैं।
घास काट रहे किचन में काम करने वाले कर्मचारी
अलीगढ़। वीएम हॉल में रहने वाले पुस्तकालय विज्ञान के शोध छात्र मोहम्मद शिकोह कहते हैं कि पिछले एक साल से किचन का स्टाफ किचन का काम नहीं कर पा रहा है। उनसे कुछ हॉल में अलग से काम लिया जा रहा है। वीएम हाल के स्टाफ से खाली पड़ी जमीन की घाट कटवाई जा रही है, क्यारियां बनवाकर पौधे लगवाए गए हैं। अन्य हॉल के स्टाफ को भी कुछ अलग तरह के कामों में लगा दिया गया है। यह किचन कब शुरू होंगे, इस संबंध में अभी कोई संकेत नहीं है।
विज्ञापन
किचन बंद होने की सबसे बड़ी समस्या का सामना शोध छात्रों को करना पड़ रहा है। वह कैंपस में हैं और खाने पीने के लिए बाहर जाना पड़ता है, जो मौजूदा हालात में असुरक्षित ही है। इसलिए इंतजार है कि जल्द से जल्द हालत सामान्य हों।
- इमरान गांधी, शोध छात्र, अंग्रेजी
खिलाड़ियों को मैदान में आने की अनुमति नहीं
अलीगढ़। विश्वविद्यालय में जिस तरह किचन बंद है, इसी तरह खेल के मैदान भी बंद हैं। कुछ खिलाड़ी बैरिकेडिंग को फांद कर मैदान में प्रवेश कर जाते हैं। लेकिन आधिकारिक रूप से खिलाड़ियों को मैदान के अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं है। इन मैदानों को खोले जाने के लिए बीच-बीच में छात्रों ने मांग की है लेकिन जिस तरह महामारी को लेकर फिर से हालात गंभीर हो रहे हैं उसके बाद यह मांग उठनी बंद हो गई है।
छात्रावास के संबंध में सरकार की गाइडलाइन है कि एक कमरे में एक छात्र रहेगा, जो कि एएमयू में संभव नहीं है। इसके अलावा अब महामारी का खतरा फिर से बढ़ रहा है। ऐसे में छात्रों के संबंध में जोखिम नहीं लिया जा सकता है।
- प्रोफेसर वसीम अली, प्रॉक्टर, एएमयू
विज्ञापन
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के खेल मैदानों पर पिछले एक साल से ताले लगे हैं। इसी तरह कभी न बंद होने वाला छात्रावासों का चूल्हा भी ठंडा पड़ा है। विश्वविद्यालय के विभिन्न हॉलों में चलने वाली किचन पिछले एक वर्ष से बंद है। यहां तक कि विश्वविद्यालय परिसर में संचालित होने वाली कैंटीन भी बंद है। ऐसी विषम परिस्थिति विश्वविद्यालय के 100 वर्ष के इतिहास में पहली बार आई है।
एएमयू मूलत: आवासीय विश्वविद्यालय है। सामान्य दिनों में यहां के छात्रावासों में 23 हजार से अधिक छात्र रहते हैं। 20 बड़े हॉल मिलाकर कुल 52 छात्रावास हैं। इन छात्रावासों में अलग-अलग किचन संचालित होते हैं। यहां पर छात्रों को नाश्ता, लंच और डिनर उपलब्ध कराया जाता है। किचन में काम करने वाले कर्मचारियों की तीन-तीन घंटे की तीन शिफ्ट में ड्यूटी रहती है। सामान्य दिनों में छात्रावास में नाश्ते में छोले भटूरे, ब्रेड मक्खन, छोले, पूड़ी, सब्जी आदि दिया जाता है। लंच में दाल, चावल, सब्जी रोटी, मीट आदि उपलब्ध रहता है। डिनर में भी सब्जी, रोटी, चावल बिरयानी के साथ मीट की उपलब्धता रहती है। लेकिन कोरोना के कारण किचन एक साल से बंद हैं।
विज्ञापन
घास काट रहे किचन में काम करने वाले कर्मचारी
अलीगढ़। वीएम हॉल में रहने वाले पुस्तकालय विज्ञान के शोध छात्र मोहम्मद शिकोह कहते हैं कि पिछले एक साल से किचन का स्टाफ किचन का काम नहीं कर पा रहा है। उनसे कुछ हॉल में अलग से काम लिया जा रहा है। वीएम हाल के स्टाफ से खाली पड़ी जमीन की घाट कटवाई जा रही है, क्यारियां बनवाकर पौधे लगवाए गए हैं। अन्य हॉल के स्टाफ को भी कुछ अलग तरह के कामों में लगा दिया गया है। यह किचन कब शुरू होंगे, इस संबंध में अभी कोई संकेत नहीं है।
विज्ञापन
किचन बंद होने की सबसे बड़ी समस्या का सामना शोध छात्रों को करना पड़ रहा है। वह कैंपस में हैं और खाने पीने के लिए बाहर जाना पड़ता है, जो मौजूदा हालात में असुरक्षित ही है। इसलिए इंतजार है कि जल्द से जल्द हालत सामान्य हों।
- इमरान गांधी, शोध छात्र, अंग्रेजी
खिलाड़ियों को मैदान में आने की अनुमति नहीं
अलीगढ़। विश्वविद्यालय में जिस तरह किचन बंद है, इसी तरह खेल के मैदान भी बंद हैं। कुछ खिलाड़ी बैरिकेडिंग को फांद कर मैदान में प्रवेश कर जाते हैं। लेकिन आधिकारिक रूप से खिलाड़ियों को मैदान के अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं है। इन मैदानों को खोले जाने के लिए बीच-बीच में छात्रों ने मांग की है लेकिन जिस तरह महामारी को लेकर फिर से हालात गंभीर हो रहे हैं उसके बाद यह मांग उठनी बंद हो गई है।
छात्रावास के संबंध में सरकार की गाइडलाइन है कि एक कमरे में एक छात्र रहेगा, जो कि एएमयू में संभव नहीं है। इसके अलावा अब महामारी का खतरा फिर से बढ़ रहा है। ऐसे में छात्रों के संबंध में जोखिम नहीं लिया जा सकता है।
- प्रोफेसर वसीम अली, प्रॉक्टर, एएमयू

मोहम्मद शिकोह शोध छात्र- फोटो : CITY OFFICE