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एएमयू : थियोलॉजी में कुरान की आयतों के साथ गूंज रहे वेद के श्लोक
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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी वर्ष 1920 में वजूद में आई, लेकिन संस्थापक सर सैयद अहमद खां यूनिवर्सिटी स्थापना से पहले कह चुके थे कि इस इदारे में इस्लाम के साथ हिंदू धर्म के बारे में भी शिक्षा दी जाए। सर सैयद की ख्वाहिश थियोलॉजी विभाग की स्थापना के साथ पूरी हो गई। विभाग में कुरान की आयतों के साथ वेद के श्लोक की गूंज सुनाई देने लगी। धर्मशास्त्र विभाग में बीए, एमए के कोर्स में हिंदू, सिख, ईसाई, यहूदी, जैन, बुद्ध धर्म पढ़ाया जा रहा है।
सुन्नी थियोलॉजी में हिंदू, सिख, ईसाई, यहूदी, जैन, बुद्ध धर्म को पढ़ाने वाले शिक्षकों ने भी इसी में तुलनात्मक अध्ययन पर पीएचडी कर रखी है। इनमें प्रो. तौकीर आलम फलाही, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नदीम अशरफ, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रेहान अख्तर, डॉ. मोहम्मद आसिम शामिल हैं। थियोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. सलीम ने बताया कि सर सैयद ने कहा था कि इस इदारे में वैदिक धर्म, इस्लाम के बारे में पढ़ाई एक साथ होनी चाहिए, जो आज भी जारी है। उन्होेंने कहा कि हिंदुज्म पर एक दर्जन से अधिक शोध हो चुके हैं। सुन्नी थियोलॉजी के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर मुफ्ती जाहिद अली खान ने बताया कि 24 मई 1875 में मदरसा तुल उलूम में धर्मशास्त्र सेक्शन शुरू हो गया। पहले नाजिम-ए-दीनियात मुफ्ती अब्दुल्ला अंसारी थे। 1920 में यूनिवर्सिटी बनने के बाद धर्मशास्त्र विभाग शुरू हुआ, जहां हिंदू, सिख, ईसाई, यहूदी, जैन, बुद्ध धर्म की पढ़ाई शुरू हो गई।
इनकी हो रही पढ़ाई
सुन्नी थियोलॉजी के एमए में हिंदुज्म का इतिहास, महाभारत, मोक्ष, महायोगी, पुराण, रामायण, वेद, योगा, धार्मिक पुस्तकें श्रुति, स्मृति, ब्रह्मा, विष्णु, शिवा, पूजा - अर्चना के तरीके, हिंदू धार्मिक स्थल, आर्य समाज, हिंदू व इस्लाम के बीच समानताएं, एमए दूसरे सेमेस्टर में बुद्धिज्म, जैनज्मि, यहूदिज्म, चौथे सेमेस्टर में ईसाई का इतिहास आदि धर्मों के बारे में पढ़ाया जा रहा है।
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सुन्नी थियोलॉजी में हिंदू, सिख, ईसाई, यहूदी, जैन, बुद्ध धर्म को पढ़ाने वाले शिक्षकों ने भी इसी में तुलनात्मक अध्ययन पर पीएचडी कर रखी है। इनमें प्रो. तौकीर आलम फलाही, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नदीम अशरफ, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रेहान अख्तर, डॉ. मोहम्मद आसिम शामिल हैं। थियोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. सलीम ने बताया कि सर सैयद ने कहा था कि इस इदारे में वैदिक धर्म, इस्लाम के बारे में पढ़ाई एक साथ होनी चाहिए, जो आज भी जारी है। उन्होेंने कहा कि हिंदुज्म पर एक दर्जन से अधिक शोध हो चुके हैं। सुन्नी थियोलॉजी के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर मुफ्ती जाहिद अली खान ने बताया कि 24 मई 1875 में मदरसा तुल उलूम में धर्मशास्त्र सेक्शन शुरू हो गया। पहले नाजिम-ए-दीनियात मुफ्ती अब्दुल्ला अंसारी थे। 1920 में यूनिवर्सिटी बनने के बाद धर्मशास्त्र विभाग शुरू हुआ, जहां हिंदू, सिख, ईसाई, यहूदी, जैन, बुद्ध धर्म की पढ़ाई शुरू हो गई।
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इनकी हो रही पढ़ाई
सुन्नी थियोलॉजी के एमए में हिंदुज्म का इतिहास, महाभारत, मोक्ष, महायोगी, पुराण, रामायण, वेद, योगा, धार्मिक पुस्तकें श्रुति, स्मृति, ब्रह्मा, विष्णु, शिवा, पूजा - अर्चना के तरीके, हिंदू धार्मिक स्थल, आर्य समाज, हिंदू व इस्लाम के बीच समानताएं, एमए दूसरे सेमेस्टर में बुद्धिज्म, जैनज्मि, यहूदिज्म, चौथे सेमेस्टर में ईसाई का इतिहास आदि धर्मों के बारे में पढ़ाया जा रहा है।
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