{"_id":"5e1f5bd58ebc3e4b1e5492f2","slug":"aligarh-muslim-university-aligarh-news-ali2241466170","type":"story","status":"publish","title_hn":"एएमयू बवाल में पुलिस पर आरोप: घायल छात्रों को लेने गई एंबुलेंस को भी तोड़ा गया था","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एएमयू बवाल में पुलिस पर आरोप: घायल छात्रों को लेने गई एंबुलेंस को भी तोड़ा गया था
विज्ञापन
छात्रों से पुछताछ करती राष्टीय मानवाधिकार से एसएसपी मंजिल सैनी साथ में अन्य अधिकारी ।
- फोटो : CITY OFFICE
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में 15 दिंसबर 2019 की रात को हुए बवाल की घटना में हाईकोर्ट के आदेश पर जांच के लिए आई राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम के समक्ष बुधवार को घटना में घायल तीन छात्र/छात्र नेताओं ने अपना दर्द बयां किया। इसके साथ ही रेजिडेंशियल डाक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) ने भी उनके डाक्टरों और एंबुलेंस पर हुए हमले की बात कही। आयोग की टीम ने घटना के पक्ष में साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए कहा है।
कलक्ट्रेट के बराबर लोक निर्माण विभाग के गेस्ट हाउस में बवाल वाली रात घायल हुए स्नातक अंतिम वर्ष के छात्र ताजिम ने आयोग की टीम को बताया कि घटना वाली रात वह रास्ते से गुजर रहा था। बवाल होते देख वह बचने के लिए गेस्ट हाउस नंबर तीन में चला गया। लेकिन यहां पर पुलिस और आरएएफ ने उसे पकड़ लिया और बुरी तरह पीटा। वह चीखता रहा कि वह बचने के लिए यहां पर आया है लेकिन उसे उपद्रवी समझा गया। इस कदर पीटा गया कि उसके दोनों हाथों में मल्टीपल फ्रैक्चर हो गए।
एक हाथ की उंगलियां टूटकर चूरा चूरा हो गईं। घायल अवस्था में उसे घसीट कर पुलिस की गाड़ी में बैठाया और थाने ले जाया गया। हालत को देखते हुए उसे मलखान सिंह जिला अस्पताल ले जाया गया। यहां पर प्राथमिक उपचार दिया गया और टांके लगा दिए गए। लेकिन चोट ज्यादा थी और एडवांस उपाचर की मांग की तो उसे नकार दिया गया। उसके साथ तीन-चार अन्य छात्र भी थे। उन्हें भी इसी तरह पीटा गया था।
विज्ञापन
आरडीए के अध्यक्ष मो. हमजा, सचिव काशिफ के नेतृत्व में प्रतिनिधि मंडल आयोग की टीम से मिला। अध्यक्ष मो. हमजा ने टीम को बताया कि 15 दिसंबर की रात को जब कुछ घायल छात्र मेडिकल पहुंचे तो उन्होंने बताया कि कैंपस में और भी घायल छात्र हैं जो वहां पर फंसे पड़े हैं। इसके बाद आरडीए ने घायलों को वहां से निकालने के लिए एक एंबुलेंस और डाक्टर को भेजा। लेकिन सुरक्षा बलों ने एंबुलेंस के ड्राइवर मो. जावेद और डॉ. मो. शहिद को बुरी तरह पीटा। साथ ही एंबुलेंस को भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया।
आयोग की टीम ने इन सभी बातों को सुना है और कहा है कि इन सभी घटनाओं के पक्ष में आपके पास जो भी साक्ष्य हों वह प्रस्तुत करें। आरडीए बृहस्पतिवार को साक्ष्य टीम के समक्ष प्रस्तुत करेगी। इसके अलावा आफताब हाल के कमरा नंबर 46 से तीन छात्रों को गिरफ्तार किया गया था। इनको बुलाया गया लेकिन यह लोग घर चले। इन्होंने मेल से अपने कंटेंट भेजे हैं। अब बृहस्पतिवार को टीम सर्किट हाउस में बैठकर पुलिस प्रशासन, आरएएफ टीम के बयान दर्ज करेगी।
आज गेस्ट हाउस नंबर तीन जा सकते हैं
मानवाधिकार आयोग की टीम के समक्ष बयान देने आए छात्र नेताओं ने कहा कि मोरिसन कोर्ट हास्टल और गेस्ट हाउस नंबर तीन के अलावा पुलिस ने गेस्ट हाउस नंबर तीन में भी बर्बरता की और छात्रों को पीटा। इस बात को बुरी तरह घायल हुए ताजिम ने भी अपने बयानों में कहा। यह अब तक इस मामले में एक नया पेच था। इसके बाद टीम बृहस्पतिवार को एएमयू गेस्ट हाउस नंबर तीन में जा सकती है। हालांकि इस संबंध में एएमयू प्रशासन और जिला प्रशासन व पुलिस ने भी गेस्ट हाउस नंबर तीन में किसी भी घटना के होने से इनकार किया है। आयोग की टीम ने भी इस संबंध में साक्ष्यों की मांग की है।
छात्र नेताओं ने बयान दर्ज कराने के लिए मांगा एक सप्ताह का समय
अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में 15 दिंसबर 2019 की रात को हुए बवाल की घटना में हाईकोर्ट में कुल 13 याचिकाएं दायर इसमें याची अमान खान, छात्र संघ के निवर्तमान अध्यक्ष सलमान इम्तियाज, हाईकोर्ट के अधिवक्ता असद हयात की याचिका भी शामिल है। इन सभी याचिकाओं को एक जगह समाहित कर दिया गया है। अब इन सभी याचिकाओं के संबंध में जांच हो रही है।
आयोग की टीम के समक्ष बयान देने पहुंचे आमिर मिंटो ने बताया कि कुछ साक्ष्य टीम को सौंपे गए हैं। इसके अलावा हमें बयान तो दर्ज कराने हैं। लेकिन हमारे साथी छात्रों को भी बयान दर्ज कराने हैं। विश्वविद्यालय चरणबद्ध तरीके से खुल रहा है। सभी छात्र कैंपस में नहीं आए हैं। इसलिए हमें समय चाहिए, जिससे सभी छात्र कैंपस में आ जाएं। हमें एक सप्ताह का समय दिया जाए। अगर शुक्रवार तक कुछ आ गए तो उनके बयान करा दिए जाएंगे। इस पर टीम ने सहमति जता दी। टीम के मुताबिक 25 जनवरी के बाद अगर छात्र बयान देने दिल्ली आना चाहें तो आ सकते हैं। अगर छात्र चाहें कि टीम यहां आकर बयान ले तो टीम के कुछ सदस्य यहां पर आ सकते हैं। इस दौरान कुछ छात्र नेताओं ने कहा कि घटना वाले वक्त वह तो घटना स्थल पर ही नहीं थे। बवाल में बाहरी तत्व शामिल थे। इस पर टीम ने कहा ठीक है वह जहां पर थे उस संबंध में साक्ष्य प्रस्तुत कर दें। इस मौके पर सलमान इम्तियाज के अलावा पूर्व अध्यक्ष फैजुल हसन, छात्र नेता माजिन जैदी, नदीम अंसारी आदि थे।
एएमयू ने गेस्ट हाउस देने से किया इनकार
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम ने दो दिन एएमयू जाकर विश्वविद्यालय में साक्ष्य जुटाए थे। घायलों सहित संबंधित पक्षों से भी बात की थी और बयान लिए। लेकिन तीसरे दिन एएमयू ने अपना गेस्ट हाउस देने से हाथ खींच लिए। इसके बाद टीम ने लोक निर्माण विभाग का गेस्ट हाउस चुना। एएमयू का तर्क था कि बाहरी लोगों को कैंपस में नहीं आने दिया जाएगा। बृहस्पतिवार को प्रशासन के बयान होंगे। साथ ही आरएएफ, पुलिस, स्थानीय मजिस्ट्रेटों के बयान होंगे। शुक्रवार को टीम वापस चली जाएगी।
सौ मीटर की परिधि में धरना क्यों?
बयान देने आए छात्र नेताओं से आयोग की टीम ने पूछा कि हाईकोर्ट के आदेश हैं कि बाब ए सैयद से सौ मीटर की परिधि में कोई धरना प्रदर्शन नहीं हो सकता है। इसके बाद आप वहां पर प्रदर्शन करने क्यों गए थे। इसके साथ ही कुछ अन्य सवाल भी पूछे। आयोग की टीम ने साक्ष्य रिकार्ड की शक्ल में मांगे हैं। जिससे उन्हें व्यवस्थित रूप से समझा जा सके। प्रस्तुत किया जा सके।
कैसे जख्म थे, किस चीज से लगे, रिकार्ड चाहिए
मानवाधिकार आयोग की टीम ने जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कालेज से बवाल में घायल हुए छात्रों का रिकार्ड मांगा। तो वहां बताया गया कि 15 छात्रों का रिकार्ड है 60 का रिकार्ड नहीं है। इस पर टीम ने कहा कि सभी 60 का रिकार्ड चाहिए। इसके साथ ही मलखान सिंह जिला अस्पताल और दीन दयाल संयुक्त अस्पताल से भी घायलों की सूची मांगी गई है। जिला अस्पताल ने 23 घायलों का रिकार्ड भेज दिया है। डीडी अस्पताल भेजने की तैयारी कर रहा है। टीम इस बात की जांच कर रही है कि जो घायल इन अस्पतालों में लाए गए थे उनको किस प्रकार की इंजरी थीं। घायलों के ट्रीटमेंट का रिकार्ड क्या है? इससे यह पता लगाया जाएगा कि छात्र कितने गंभीर रूप से घायल हुए थे। उनको किस तरह की दवाएं दी गई जिससे जानकारी हो सके कि किस वस्तु या पदार्थ से घायल हुए थे। जिस वस्तु से छात्र घायल हुए वह बुलेट थी, या कोई पत्थर था, लोहे का धारदार हथियार था। आंसू गैस का गोला था। क्या यह वही था जिसका इस्तेमाल सुरक्षा बल करते हैं या कुछ और था? यह सभी बिंदु पुलिस की जांच का विषय हैं।
250 से अधिक सीसीटीवी फुटेज मिली
मानवाधिकार आयोग की टीम को 250 से अधिक सीसीटीवी फुटेज मिली हैं। इनमें से कुछ कैमरे की फुटेज हैं तो कुछ मोबाइल से बनी फुटेज हैं। कुछ फुटेजों से यह स्पष्ट नहीं हो रहा है कि यह कहां की हैं और किस समय की हैं। इस तरह कुछ वीडियो फुटेजों ने आयोग की टीम की मुश्किलों को कम करने की जगह बढ़ा दिया है। हालांकि टीम एक एक फुटेज की बारीकी से पड़ताल कर ही है।
क्या जामिया की घटना बनी ब्रेकिंग प्वाइंट
15 दिसंबर की रात को बवाल की घटना क्यों हुई? इस संबंध में अभी तक कोई स्पष्ट नतीजा तो नहीं पाया गया है लेकिन सूत्रों के मुताबिक संकेत मिल रहे हैं कि जामिया मिलिया इस्लामिया की घटना ही एएमयू में बवाल का ब्रेकिंग प्वाइंट बनी। हालांकि अभी आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। इसके अलावा टीम छात्रों की आपसी गुटबंदी, क्षेत्रवाद, आपसी रंजिश, विश्वविद्यालय में एडमिशन, कमीशन, कंस्ट्रक्शन का खेल, अलग अलग विचारधारा आदि सभी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है।
एएमयू से तहरीर और पुलिस बुलाने वाले पत्र की कापी मांगी
आयोग की टीम ने एएमयू प्रशासन ने उस तहरीर की कापी मांगी है, जिसको उन्होंने पुलिस के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए भेजा था। इसके अलावा वह सभी दस्तावेज भी मांगे हैं जिसमें विश्वविद्यालय प्रशासन कह रहा है कि उसने कैंपस में पुलिस को सिर्फ बाब ए सैयद से लेकर वीसी लाज तक रोड क्लीयर कराने के लिए कहा था। हास्टल में घुसकर छात्रों को मारपीट करने के लिए नहीं। टीम ने यह सभी दस्तावेज मांगे हैं।
साक्ष्यों के साथ छेड़खानी की आशंका जताई
बवाल की जांच करने की मांग को हाईकोर्ट ले जाने वाले अधिवक्ता असद हयात भी आयोग की टीम के समक्ष पहुंचे। उनके मुताबिक टीम को बताया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने जो पत्र अलीगढ़ पुलिस को दिया है वह 15 दिसंबर का है। जबकि उसको एसएसपी ने एग्जीक्यूट 16 दिसंबर को किया और थाना प्रभारी को भेजा। इस तरह 16 दिसंबर को प्रभावी हुए पत्र का एक्शन एक दिन पहले ही हो गया। यह विरोधाभासी स्थिति आयोग के समक्ष बयां की गई है। इसके अलावा याची अमान खां की ओर से भी आयोग की टीम को अवगत कराया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों से बार बार कह रहा है कि सीसीटीवी फुटेज की हार्डकापी पुलिस प्रशासन को सौंप दी है। पुलिस प्रशासन ने यह सीटी बना कर हाईकोर्ट में सौंपी हैा। याची को जो कोर्ट से सीडी मिली है वह करप्ट है। इस तरह प्रशासन द्वारा साक्ष्यों के साथ छेड़खानी से इनकार नहीं किया जा सकता है। आयोग इस बात का भी संज्ञान ले।
-जांच के तीसरे दिन एएमयू के तीन पक्षकार और छात्र नेताओं ने मुलाकात कर साक्ष्य दिए हैं। अभी उन्होंने बयान दर्ज कराने के लिए समय मांगा है। मगर उनसे कहा गया है कि वह सभी साक्ष्य लिखित में दें। उन्हें एक सप्ताह का समय दिया गया है। जब तक टीम अपने अन्य काम निपटाएगी।
-मंजिल सैनी एसएसपी एनएचआरसी
विज्ञापन
कलक्ट्रेट के बराबर लोक निर्माण विभाग के गेस्ट हाउस में बवाल वाली रात घायल हुए स्नातक अंतिम वर्ष के छात्र ताजिम ने आयोग की टीम को बताया कि घटना वाली रात वह रास्ते से गुजर रहा था। बवाल होते देख वह बचने के लिए गेस्ट हाउस नंबर तीन में चला गया। लेकिन यहां पर पुलिस और आरएएफ ने उसे पकड़ लिया और बुरी तरह पीटा। वह चीखता रहा कि वह बचने के लिए यहां पर आया है लेकिन उसे उपद्रवी समझा गया। इस कदर पीटा गया कि उसके दोनों हाथों में मल्टीपल फ्रैक्चर हो गए।
विज्ञापन
एक हाथ की उंगलियां टूटकर चूरा चूरा हो गईं। घायल अवस्था में उसे घसीट कर पुलिस की गाड़ी में बैठाया और थाने ले जाया गया। हालत को देखते हुए उसे मलखान सिंह जिला अस्पताल ले जाया गया। यहां पर प्राथमिक उपचार दिया गया और टांके लगा दिए गए। लेकिन चोट ज्यादा थी और एडवांस उपाचर की मांग की तो उसे नकार दिया गया। उसके साथ तीन-चार अन्य छात्र भी थे। उन्हें भी इसी तरह पीटा गया था।
विज्ञापन
आरडीए के अध्यक्ष मो. हमजा, सचिव काशिफ के नेतृत्व में प्रतिनिधि मंडल आयोग की टीम से मिला। अध्यक्ष मो. हमजा ने टीम को बताया कि 15 दिसंबर की रात को जब कुछ घायल छात्र मेडिकल पहुंचे तो उन्होंने बताया कि कैंपस में और भी घायल छात्र हैं जो वहां पर फंसे पड़े हैं। इसके बाद आरडीए ने घायलों को वहां से निकालने के लिए एक एंबुलेंस और डाक्टर को भेजा। लेकिन सुरक्षा बलों ने एंबुलेंस के ड्राइवर मो. जावेद और डॉ. मो. शहिद को बुरी तरह पीटा। साथ ही एंबुलेंस को भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया।
आयोग की टीम ने इन सभी बातों को सुना है और कहा है कि इन सभी घटनाओं के पक्ष में आपके पास जो भी साक्ष्य हों वह प्रस्तुत करें। आरडीए बृहस्पतिवार को साक्ष्य टीम के समक्ष प्रस्तुत करेगी। इसके अलावा आफताब हाल के कमरा नंबर 46 से तीन छात्रों को गिरफ्तार किया गया था। इनको बुलाया गया लेकिन यह लोग घर चले। इन्होंने मेल से अपने कंटेंट भेजे हैं। अब बृहस्पतिवार को टीम सर्किट हाउस में बैठकर पुलिस प्रशासन, आरएएफ टीम के बयान दर्ज करेगी।
आज गेस्ट हाउस नंबर तीन जा सकते हैं
मानवाधिकार आयोग की टीम के समक्ष बयान देने आए छात्र नेताओं ने कहा कि मोरिसन कोर्ट हास्टल और गेस्ट हाउस नंबर तीन के अलावा पुलिस ने गेस्ट हाउस नंबर तीन में भी बर्बरता की और छात्रों को पीटा। इस बात को बुरी तरह घायल हुए ताजिम ने भी अपने बयानों में कहा। यह अब तक इस मामले में एक नया पेच था। इसके बाद टीम बृहस्पतिवार को एएमयू गेस्ट हाउस नंबर तीन में जा सकती है। हालांकि इस संबंध में एएमयू प्रशासन और जिला प्रशासन व पुलिस ने भी गेस्ट हाउस नंबर तीन में किसी भी घटना के होने से इनकार किया है। आयोग की टीम ने भी इस संबंध में साक्ष्यों की मांग की है।
छात्र नेताओं ने बयान दर्ज कराने के लिए मांगा एक सप्ताह का समय
अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में 15 दिंसबर 2019 की रात को हुए बवाल की घटना में हाईकोर्ट में कुल 13 याचिकाएं दायर इसमें याची अमान खान, छात्र संघ के निवर्तमान अध्यक्ष सलमान इम्तियाज, हाईकोर्ट के अधिवक्ता असद हयात की याचिका भी शामिल है। इन सभी याचिकाओं को एक जगह समाहित कर दिया गया है। अब इन सभी याचिकाओं के संबंध में जांच हो रही है।
आयोग की टीम के समक्ष बयान देने पहुंचे आमिर मिंटो ने बताया कि कुछ साक्ष्य टीम को सौंपे गए हैं। इसके अलावा हमें बयान तो दर्ज कराने हैं। लेकिन हमारे साथी छात्रों को भी बयान दर्ज कराने हैं। विश्वविद्यालय चरणबद्ध तरीके से खुल रहा है। सभी छात्र कैंपस में नहीं आए हैं। इसलिए हमें समय चाहिए, जिससे सभी छात्र कैंपस में आ जाएं। हमें एक सप्ताह का समय दिया जाए। अगर शुक्रवार तक कुछ आ गए तो उनके बयान करा दिए जाएंगे। इस पर टीम ने सहमति जता दी। टीम के मुताबिक 25 जनवरी के बाद अगर छात्र बयान देने दिल्ली आना चाहें तो आ सकते हैं। अगर छात्र चाहें कि टीम यहां आकर बयान ले तो टीम के कुछ सदस्य यहां पर आ सकते हैं। इस दौरान कुछ छात्र नेताओं ने कहा कि घटना वाले वक्त वह तो घटना स्थल पर ही नहीं थे। बवाल में बाहरी तत्व शामिल थे। इस पर टीम ने कहा ठीक है वह जहां पर थे उस संबंध में साक्ष्य प्रस्तुत कर दें। इस मौके पर सलमान इम्तियाज के अलावा पूर्व अध्यक्ष फैजुल हसन, छात्र नेता माजिन जैदी, नदीम अंसारी आदि थे।
एएमयू ने गेस्ट हाउस देने से किया इनकार
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम ने दो दिन एएमयू जाकर विश्वविद्यालय में साक्ष्य जुटाए थे। घायलों सहित संबंधित पक्षों से भी बात की थी और बयान लिए। लेकिन तीसरे दिन एएमयू ने अपना गेस्ट हाउस देने से हाथ खींच लिए। इसके बाद टीम ने लोक निर्माण विभाग का गेस्ट हाउस चुना। एएमयू का तर्क था कि बाहरी लोगों को कैंपस में नहीं आने दिया जाएगा। बृहस्पतिवार को प्रशासन के बयान होंगे। साथ ही आरएएफ, पुलिस, स्थानीय मजिस्ट्रेटों के बयान होंगे। शुक्रवार को टीम वापस चली जाएगी।
सौ मीटर की परिधि में धरना क्यों?
बयान देने आए छात्र नेताओं से आयोग की टीम ने पूछा कि हाईकोर्ट के आदेश हैं कि बाब ए सैयद से सौ मीटर की परिधि में कोई धरना प्रदर्शन नहीं हो सकता है। इसके बाद आप वहां पर प्रदर्शन करने क्यों गए थे। इसके साथ ही कुछ अन्य सवाल भी पूछे। आयोग की टीम ने साक्ष्य रिकार्ड की शक्ल में मांगे हैं। जिससे उन्हें व्यवस्थित रूप से समझा जा सके। प्रस्तुत किया जा सके।
कैसे जख्म थे, किस चीज से लगे, रिकार्ड चाहिए
मानवाधिकार आयोग की टीम ने जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कालेज से बवाल में घायल हुए छात्रों का रिकार्ड मांगा। तो वहां बताया गया कि 15 छात्रों का रिकार्ड है 60 का रिकार्ड नहीं है। इस पर टीम ने कहा कि सभी 60 का रिकार्ड चाहिए। इसके साथ ही मलखान सिंह जिला अस्पताल और दीन दयाल संयुक्त अस्पताल से भी घायलों की सूची मांगी गई है। जिला अस्पताल ने 23 घायलों का रिकार्ड भेज दिया है। डीडी अस्पताल भेजने की तैयारी कर रहा है। टीम इस बात की जांच कर रही है कि जो घायल इन अस्पतालों में लाए गए थे उनको किस प्रकार की इंजरी थीं। घायलों के ट्रीटमेंट का रिकार्ड क्या है? इससे यह पता लगाया जाएगा कि छात्र कितने गंभीर रूप से घायल हुए थे। उनको किस तरह की दवाएं दी गई जिससे जानकारी हो सके कि किस वस्तु या पदार्थ से घायल हुए थे। जिस वस्तु से छात्र घायल हुए वह बुलेट थी, या कोई पत्थर था, लोहे का धारदार हथियार था। आंसू गैस का गोला था। क्या यह वही था जिसका इस्तेमाल सुरक्षा बल करते हैं या कुछ और था? यह सभी बिंदु पुलिस की जांच का विषय हैं।
250 से अधिक सीसीटीवी फुटेज मिली
मानवाधिकार आयोग की टीम को 250 से अधिक सीसीटीवी फुटेज मिली हैं। इनमें से कुछ कैमरे की फुटेज हैं तो कुछ मोबाइल से बनी फुटेज हैं। कुछ फुटेजों से यह स्पष्ट नहीं हो रहा है कि यह कहां की हैं और किस समय की हैं। इस तरह कुछ वीडियो फुटेजों ने आयोग की टीम की मुश्किलों को कम करने की जगह बढ़ा दिया है। हालांकि टीम एक एक फुटेज की बारीकी से पड़ताल कर ही है।
क्या जामिया की घटना बनी ब्रेकिंग प्वाइंट
15 दिसंबर की रात को बवाल की घटना क्यों हुई? इस संबंध में अभी तक कोई स्पष्ट नतीजा तो नहीं पाया गया है लेकिन सूत्रों के मुताबिक संकेत मिल रहे हैं कि जामिया मिलिया इस्लामिया की घटना ही एएमयू में बवाल का ब्रेकिंग प्वाइंट बनी। हालांकि अभी आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। इसके अलावा टीम छात्रों की आपसी गुटबंदी, क्षेत्रवाद, आपसी रंजिश, विश्वविद्यालय में एडमिशन, कमीशन, कंस्ट्रक्शन का खेल, अलग अलग विचारधारा आदि सभी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है।
एएमयू से तहरीर और पुलिस बुलाने वाले पत्र की कापी मांगी
आयोग की टीम ने एएमयू प्रशासन ने उस तहरीर की कापी मांगी है, जिसको उन्होंने पुलिस के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए भेजा था। इसके अलावा वह सभी दस्तावेज भी मांगे हैं जिसमें विश्वविद्यालय प्रशासन कह रहा है कि उसने कैंपस में पुलिस को सिर्फ बाब ए सैयद से लेकर वीसी लाज तक रोड क्लीयर कराने के लिए कहा था। हास्टल में घुसकर छात्रों को मारपीट करने के लिए नहीं। टीम ने यह सभी दस्तावेज मांगे हैं।
साक्ष्यों के साथ छेड़खानी की आशंका जताई
बवाल की जांच करने की मांग को हाईकोर्ट ले जाने वाले अधिवक्ता असद हयात भी आयोग की टीम के समक्ष पहुंचे। उनके मुताबिक टीम को बताया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने जो पत्र अलीगढ़ पुलिस को दिया है वह 15 दिसंबर का है। जबकि उसको एसएसपी ने एग्जीक्यूट 16 दिसंबर को किया और थाना प्रभारी को भेजा। इस तरह 16 दिसंबर को प्रभावी हुए पत्र का एक्शन एक दिन पहले ही हो गया। यह विरोधाभासी स्थिति आयोग के समक्ष बयां की गई है। इसके अलावा याची अमान खां की ओर से भी आयोग की टीम को अवगत कराया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों से बार बार कह रहा है कि सीसीटीवी फुटेज की हार्डकापी पुलिस प्रशासन को सौंप दी है। पुलिस प्रशासन ने यह सीटी बना कर हाईकोर्ट में सौंपी हैा। याची को जो कोर्ट से सीडी मिली है वह करप्ट है। इस तरह प्रशासन द्वारा साक्ष्यों के साथ छेड़खानी से इनकार नहीं किया जा सकता है। आयोग इस बात का भी संज्ञान ले।
-जांच के तीसरे दिन एएमयू के तीन पक्षकार और छात्र नेताओं ने मुलाकात कर साक्ष्य दिए हैं। अभी उन्होंने बयान दर्ज कराने के लिए समय मांगा है। मगर उनसे कहा गया है कि वह सभी साक्ष्य लिखित में दें। उन्हें एक सप्ताह का समय दिया गया है। जब तक टीम अपने अन्य काम निपटाएगी।
-मंजिल सैनी एसएसपी एनएचआरसी