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वीसी-रजिस्ट्रार इस्तीफा दें वरना 5 जनवरी के बाद नहीं चलने देंगे एएमयू
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एएमयू छात्रसंघ के निवर्तमान सचिव हुजैफा आमिर रशादी ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति और रजिस्ट्रार को 5 जनवरी तक त्यागपत्र देकर कैंपस छोड़ जाने की चेतावनी दी है। उन्होंने ऐलान किया है कि अगर वे पदों से इस्तीफा देकर कैंपस छोड़कर नहीं गए तो यूनीवर्सिटी को नहीं चलने दिया जाएगा। इस संबंध में सोशल मीडिया पर एएमयू छात्रों की ओर से एक बर्खास्तगी नोटिस भी वायरल हो रहा है, जिसमें कुलपति व रजिस्ट्रार को उनके पदों से बर्खास्त किया जाने का दावा किया गया है। हालांकि इस नोटिस पर किसी के हस्ताक्षर नहीं हैं। मगर हुजैफा का दावा है कि यह नोटिस छात्रों की ओर से सामूहिक रूप से जारी किया गया है।
नागरिकता संशोधन कानून को लेकर गत 15 दिसंबर को एएमयू में पुलिस और छात्रों के बीच टकराव के बाद अवकाश घोषित करने से कैंपस खाली हो गया और स्थिति को नियंत्रित भी कर लिया गया। लेकिन अब एएमयू छात्रों, शिक्षक व कर्मचारी संगठनों का नाम लिखा यह पत्र प्रसारित किया जा रहा है, जिनमें आगामी पांच जनवरी तक वीसी और रजिस्ट्रार के इस्तीफा देने और आवास खाली करने की मांग की गई है। इस पत्र पर किसी के भी हस्ताक्षर नहीं है और नाम नहीं है। मगर पत्र के जरिए कुछ लोग अपनी दबी ख्वाहिशें जाहिर कर रहे हैं कि 5 जनवरी के बाद कैंपस का माहौल फिर बिगड़ेगा। इस पत्र में कहा गया है कि हम लोग वीसी प्रो. तारिक मंसूर और रजिस्ट्रार एस अब्दुल हमीद को बर्खास्त करते हैं। यह लोग 5 जनवरी तक अपने आवास खाली कर दें। अगर ऐसा नहीं हुआ तो त्याग पत्र नहीं देने तक यूनिवर्सिटी का बायकाट करेंगे। इसके अलावा कैंपस में किसी भी तरह की गतिविधि नहीं होने देने की चेतावनी दी गई है। इस संबंध में हुजैफा आमिर ने स्वीकारा है कि नोटिस सामूहिक रूप से छात्रों की ओर से जारी किया गया है। यह आए दिन हमें नोटिस जारी करते रहते हैं। आज हमने इन्हें नोटिस देकर साफ चेतावनी दी है कि अगर 5 जनवरी तक यह इस्तीफा देकर नहीं गए तो छात्र, शिक्षक व कर्मचारियों द्वारा यूनीवर्सिटी को नहीं चलने दिया जाएगा।
पूरी दुनिया में फैले एएमयू के पूर्व छात्र व अलीग बिरादरी 15 दिसंबर को कैंपस पुलिस के प्रवेश और बर्बर लाठीचार्ज को लेकर कुलपति व रजिस्ट्रार के खिलाफ हैं। उल्लेखनीय हैं कि हुजैफा आमिर एएमयू छात्रसंघ के निवर्तमान सचिव हैं और यूनीवर्सिटी द्वारा उन्हें 5 साल के लिए निष्कासित किया जा चुका है। इधर, अमुटा व नॉन टीचिंग स्टाफ के लोग इस पत्र का सिरे से खंडन कर रहे हैं। कह रहे हैं कि इस तरह के वायरल पत्र से उनका कोई सरोकार नहीं है।
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‘इस पत्र कोई मतलब नहीं है। इस समय छात्र संघ अस्तित्व में नहीं है। इस पत्र पर किसी का नाम नहीं है। हस्ताक्षर नहीं है। ऐसे लोगों का मकसद कैंपस में भ्रम की स्थिति पैदा करना है। अगर ये कोई जिम्मेदार लोग होते तो जाहिर होकर बात करते’
- प्रो. शाफे किदवई, एमआईसी, एएमयू
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नागरिकता संशोधन कानून को लेकर गत 15 दिसंबर को एएमयू में पुलिस और छात्रों के बीच टकराव के बाद अवकाश घोषित करने से कैंपस खाली हो गया और स्थिति को नियंत्रित भी कर लिया गया। लेकिन अब एएमयू छात्रों, शिक्षक व कर्मचारी संगठनों का नाम लिखा यह पत्र प्रसारित किया जा रहा है, जिनमें आगामी पांच जनवरी तक वीसी और रजिस्ट्रार के इस्तीफा देने और आवास खाली करने की मांग की गई है। इस पत्र पर किसी के भी हस्ताक्षर नहीं है और नाम नहीं है। मगर पत्र के जरिए कुछ लोग अपनी दबी ख्वाहिशें जाहिर कर रहे हैं कि 5 जनवरी के बाद कैंपस का माहौल फिर बिगड़ेगा। इस पत्र में कहा गया है कि हम लोग वीसी प्रो. तारिक मंसूर और रजिस्ट्रार एस अब्दुल हमीद को बर्खास्त करते हैं। यह लोग 5 जनवरी तक अपने आवास खाली कर दें। अगर ऐसा नहीं हुआ तो त्याग पत्र नहीं देने तक यूनिवर्सिटी का बायकाट करेंगे। इसके अलावा कैंपस में किसी भी तरह की गतिविधि नहीं होने देने की चेतावनी दी गई है। इस संबंध में हुजैफा आमिर ने स्वीकारा है कि नोटिस सामूहिक रूप से छात्रों की ओर से जारी किया गया है। यह आए दिन हमें नोटिस जारी करते रहते हैं। आज हमने इन्हें नोटिस देकर साफ चेतावनी दी है कि अगर 5 जनवरी तक यह इस्तीफा देकर नहीं गए तो छात्र, शिक्षक व कर्मचारियों द्वारा यूनीवर्सिटी को नहीं चलने दिया जाएगा।
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पूरी दुनिया में फैले एएमयू के पूर्व छात्र व अलीग बिरादरी 15 दिसंबर को कैंपस पुलिस के प्रवेश और बर्बर लाठीचार्ज को लेकर कुलपति व रजिस्ट्रार के खिलाफ हैं। उल्लेखनीय हैं कि हुजैफा आमिर एएमयू छात्रसंघ के निवर्तमान सचिव हैं और यूनीवर्सिटी द्वारा उन्हें 5 साल के लिए निष्कासित किया जा चुका है। इधर, अमुटा व नॉन टीचिंग स्टाफ के लोग इस पत्र का सिरे से खंडन कर रहे हैं। कह रहे हैं कि इस तरह के वायरल पत्र से उनका कोई सरोकार नहीं है।
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‘इस पत्र कोई मतलब नहीं है। इस समय छात्र संघ अस्तित्व में नहीं है। इस पत्र पर किसी का नाम नहीं है। हस्ताक्षर नहीं है। ऐसे लोगों का मकसद कैंपस में भ्रम की स्थिति पैदा करना है। अगर ये कोई जिम्मेदार लोग होते तो जाहिर होकर बात करते’
- प्रो. शाफे किदवई, एमआईसी, एएमयू