नगर आयुक्त का तबादला: लोक सभा चुनाव में शहरी सीटों पर हार है जिम्मेदार, शहर विधायक मिलीं थी सीएम से
जिले में और भी अफसर भाजपाइयों के निशाने पर हैं, जिसमें मामू भांजा प्रकरण में गैर समुदाय के युवक की मौत के बाद व्यापारी पक्ष पर मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेजने के मामले में पुलिस के अधिकारियों से जुड़ा मुद्दा प्रमुख है।
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अलीगढ़ के नगर आयुक्त अमित आसेरी का तबादला लोक निर्माण विभाग में हो गया है। उनके स्थान पर वहां तैनात विनोद कुमार को अलीगढ़ नगर निगम का नया आयुक्त बनाया है। मगर इस तबादले के बाद कारणों को लेकर तरह तरह की चर्चाएं हैं, जिसमें बड़ा कारण माना गया है, वह है लोकसभा चुनाव के परिणाम के बाद शहर विधायक द्वारा मोर्चा खोलना। उन्होंने सीधे सीएम से लेकर संगठन तक को पत्र भेजकर कह दिया था कि नगर निगम द्वारा जनसमस्याओं से जुड़ी उपेक्षा के चलते जनता का मोह भंग हुआ और लोकसभा चुनाव में शहर व कोल सीट पर भाजपा हारी है।
विधायक मुक्ता संजीव राजा की ओर से यह कड़ा पत्र नगर आयुक्त को भेजा गया था। जिसकी प्रति मुख्यमंत्री, नगर विकास मंत्री, मुख्य सचिव, मंडलायुक्त के अलावा प्रदेशाध्यक्ष भाजपा, प्रदेश महामंत्री संगठन आदि शीर्ष नेतृत्व को भेजी गई थी। पत्र में साफ कहा गया है कि शहर से जुड़ी जनशिकायतों को लेकर वह लगातार दूरभाष पर उनसे वार्ता करती रहती हैं। इसके बावजूद पेयजल किल्लत पर प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। साथ ही, 3 मई व 28 मई को भेजे गए पत्र के संदर्भ में इस विषय पर बनाई गई कार्ययोजना से अवगत नहीं कराया गया। यह शासनादेश का उल्लंघन है। हाल ही के लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी सतीश गौतम को नगर क्षेत्र से अपेक्षित समर्थन नहीं मिला और नगर निगम से जुड़े मुद्दों को लेकर जनता की नाराजगी के चलते लगातार शहर क्षेत्र में पार्टी की शक्ति का क्षरण हो रहा है। इसके लिए नगर आयुक्त जिम्मेदार हैं।
इसके अलावा अन्य पेयजल समस्या, जलभराव, कूड़ा, अतिक्रमण, पोखरों की सफाई पर भी निर्णय लेने की जरूरत है। अगर नगर निगम ने उचित कदम नहीं उठाया तो वह कड़ा कदम उठाने के लिए बाध्य होंगी। विधायक का यह पत्र सुर्खियों में रहा था। हालांकि इसके बाद नगर निगम ने जवाब भी दिया। मगर उस जवाब से विधायक संतुष्ट नहीं थीं। इसके बाद विधायक के समर्थन में कोल क्षेत्र के विधायक अनिल पाराशर, एमएलसी ऋषिपाल सिंह आदि भी आ गए। इसी क्रम में विधानसभा सत्र शुरू होने पर विधायक मुख्यमंत्री से मिले। उन्होंने फिर यही मुद्दा रखा और कहा कि अगर यही हालात बने रहे तो आने वाले विधानसभा चुनाव तक परिणाम और गंभीर होंगे। यही पत्राचार व शिकायत इस तबादले का कारण बना है।
दूसरा खेमा लगा रहा डैमेज कंट्रोल में
विधायकों के इस खेमे के विपरीत भाजपा का ही दूसरा खेमा डैमेज कंट्रोल के प्रयास में लगा रहा। खेमे से जुड़े कुछ लोग पिछले दिनों लखनऊ तक गए। वहां उन्होंने नगर निगम से जुड़े मुद्दे सीएम के समक्ष भी रखे और अंदरखाने नगर आयुक्त को लेकर पैरोकारी भी की। मगर महिला विधायक द्वारा बताए गए सच पर प्रदेश स्तर से अन्य जगह से फीडबैक लिया गया। इसके बाद यह बदलाव किया गया है।
और भी अफसर भाजपाइयों के निशाने पर
जिले में और भी अफसर भाजपाइयों के निशाने पर हैं, जिसमें मामू भांजा प्रकरण में गैर समुदाय के युवक की मौत के बाद व्यापारी पक्ष पर मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेजने के मामले में पुलिस के अधिकारियों से जुड़ा मुद्दा प्रमुख है। शहर व जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग से अधिकारियों का मुद्दा खास है। वहीं, बिजली संकट पर भी कुछ अधिकारियों को रडार पर लिया हुआ है। इसके संबंध में भी कुछ परिणाम आने वाले समय में देखने को मिलेंगे।
मैं इस विषय में इतना ही कहना चाहूंगी कि जो हकीकत शहर की समस्याओं की है। वही मुख्यमंत्री को बताई थी। उन्होंने मुझे भरोसा दिया। बस उसी के क्रम में यह बदलाव हुआ है। - मुक्ता संजीव राजा, विधायक शहर क्षेत्र
नगर निगम द्वारा समस्याओं के स्थायी समाधान को लेकर बड़ी कार्ययोजना नहीं बनाई। चूंकि जलभराव, पेयजल संकट आदि को लेकर शहर जूझता रहता है। यही बातें शासन में रखी गई थीं।- अनिल पाराशर, विधायक कोल क्षेत्र