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मोर्चरी बदहाल: एक शव डीप फ्रीजर में, दो फर्श पर, आठ दिन तक शव रखने की जांच करेगी तीन सदस्यीय कमेटी

Sun, 25 May 2025 03:57 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Sun, 25 May 2025 03:57 PM IST
सार

मलखान सिंह जिला अस्पताल की मोर्चरी में आठ दिन तक शव रखने की जांच तीन सदस्यीय कमेटी करेगी। इस कमेटी में डाॅ. एके रस्तोगी, डाॅ. मयंक बंसल और डॉ. पीयूष चौबे को शामिल किया गया है।

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Aligarh mortuary in bad condition
जिला अस्पताल मलखान सिंह में शवगृह के बाहर पड़े टूटे स्ट्रेचर - फोटो : संवाद

विस्तार

अलीगढ़ के मलखान सिंह जिला अस्पताल की मोर्चरी (शव रखने का स्थान) दयनीय हालत में है। 24 मई को यहां एक शव डीप फ्रीजर में था, जबकि दो जमीन पर थे। यहां दो की जगह एक एसी ही लगा है। इसके सामने गंदगी का अंबार है। जिससे अस्पताल आने वाले मरीजों और तीमारदारों को गंदगी और बदबू से दो चार होना पड़ता है। भीषण गर्मी में यह समस्या और बढ़ गई है।

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24 मई दोपहर 2:40 बजे मोर्चरी के पास सन्नाटा था। इसकी इमारत जीर्णशीर्ण हो चुकी है। बाहर खड़े स्ट्रेचर टूटे थे। इसके दोनों दरवाजे पर ताले लगे थे। एसी के लिए दो जगह बनाई गई हैं, लेकिन सिर्फ एक ही एसी लगा है। मोर्चरी में सात शव रखने की क्षमता है, जिसके लिए सिर्फ एक डीप फ्रीजर है। इसमें एक ही शव रखा जा सकता है। शनिवार को यहां तीन शव थे, एक शव फ्रीजर और दो जमीन पर रखे थे। बिजली चली जाने के बाद एसी बंद हो जाता है। इससे शव के खराब होने का अंदेशा बना रहता है।

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मोर्चरी में सात शव रखने की क्षमता है। एक डीप फ्रीजर में एक ही शव रख जाता है। बाकी शवों के लिए एसी है, जिससे मोर्चरी का कमरा ठंड रहता है।-डॉ. जगवीर सिंह, सीएमएस जिला अस्पताल।

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मोर्चरी में शव रखने की जांच तीन सदस्यीय कमेटी करेगी

मलखान सिंह जिला अस्पताल की मोर्चरी में आठ दिन तक शव रखने की जांच तीन सदस्यीय कमेटी करेगी। इस कमेटी में डाॅ. एके रस्तोगी, डाॅ. मयंक बंसल और डॉ. पीयूष चौबे को शामिल किया गया है। शव रखने की जानकारी छिपाई गई गई थी, जिसे स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने गंभीरता से लिया है। इस मामले में पुलिस की लापरवाही भी सामने आ रही है।

बीती 28 अप्रैल को लगभग 52 वर्षीय अज्ञात बीमार व्यक्ति को कुछ लोगों ने मलखान सिंह जिला अस्पताल के वार्ड नंबर चार के बेड नंबर-2 पर भर्ती कराया था। उपचार के दौरान उसी दिन उसकी मौत हो गई थी। लावारिस होने के चलते उसका शव अस्पताल में मोर्चरी में रखवा दिया गया, जो 5 मई तक ऐसे ही रखा रहा था। जब अस्पताल की मोर्चरी के प्रभारी को याद आया तो शव का पोस्टमार्टम 6 मई को कराया गया। इसकी रिपोर्ट में लिखा है कि शव लगभग आठ दिन पहले का है।

इस मामले में पुलिस ने जो पंचनामा भरा, उसमें मृत्यु की तिथि 2 मई की रात 8:15 बजे अंकित की गई। इस खबर को अमर उजाला में छह मई के अंक में प्रकाशित किया गया था। खबर प्रकाशित होने के बाद जिला अस्पताल प्रशासन पूरे मामले के गुपचुप निस्तारण में जुट गया। आठ मई को सीएमएस डॉ. जगवीर सिंह ने इमरजेंसी प्रभारी को कारण बताओ नोटिस भी दे दिया था। सीएमओ डॉ. नीरज त्यागी ने बताया कि आठ दिन तक अज्ञात शव जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखने की जानकारी उन्हें नहीं दी गई थी। इस संबंध में सीएमएस से जानकारी मांगी गई है।

मोर्चरी में आठ दिन तक शव रखने के मामले की जांच डाॅ. एके रस्तोगी, डाॅ. मयंक बंसल और डॉ. पीयूष चौबे करेंगे। उनकी जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई की जाएगी।-डॉ.जगवीर सिंह, सीएमएस जिला अस्पताल।

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