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अलीगढ़ : दिव्यांग किशोरी से दुष्कर्म में उम्रकैद, 50 हजार का जुर्माना
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गंगीरी क्षेत्र में वर्ष 2013 में हुई 90 फीसदी मानसिक दिव्यांग किशोरी से दुष्कर्म की शर्मनाक वारदात में तीन बेटियों के पिता आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। मिशन शक्ति अभियान के तहत बुधवार को यह फैसला एडीजे पॉक्सो प्रथम ओमवीर की अदालत से सुनाया गया है। साथ में 50 हजार रुपये जुर्माना भी नियत किया है। यह जुर्माना राशि पीड़ित के पुनर्वास व उपचार के लिए देने के आदेश दिए हैं।
अभियोजन पक्ष से विशेष लोक अभियोजक संजय शर्मा व लव बंसल के अनुसार, 12 वर्षीय किशोरी की मां ने नौ मई 2013 को गंगीरी थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। मुकदमे के अनुसार, उनकी मानसिक कमजोर बेटी को गांव का ही युवक दोपहर में करीब 11:15 बजे अपने खंडहरनुमा मकान में ले गया, जहां उसके साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया।
यह गांव की महिलाओं ने देखा तो वे शोर मचाते हुए मौके पर पहुंचीं। उन्हें आता देखकर आरोपी भाग गया। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। मेडिकल परीक्षण व मुकदमे के आधार पर आरोपी की गिरफ्तारी आदि की कार्रवाई की गई।
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सत्र परीक्षण में साक्ष्यों व गवाही के आधार पर अदालत ने आरोपी किशन उर्फ कृष्णा को दोषी करार देकर उम्रकैद के साथ-साथ 50 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया है। साथ ही, कहा है कि जुर्माना राशि बच्ची के पुनर्वास व उपचार के लिए दी जाए। अदालत ने जिलाधिकारी व विधिक सेवा प्राधिकरण को बच्ची का प्रतिकर दिलाने के लिए भी कहा है।
मेडिकल कॉलेज में हुआ था परीक्षण, 90 फीसदी मानसिक दिव्यांग माना
विशेष लोक अभियोजक संजय शर्मा व लव बंसल के अनुसार, अपने साथ हुए घटनाक्रम को सही से बता पाने में अक्षम किशोरी को पुलिस ने मानसिक परीक्षण के लिए जेएन मेडिकल कॉलेज भेजा। 13 मई 2013 को मानसिक परीक्षण/आईक्यू जांच में उसे 90 फीसदी मानसिक दिव्यांग माना गया।
फिर सत्र परीक्षण के दौरान पुन: 7 जून 2019 को यह प्रक्रिया हुई। इस रिपोर्ट में भी उसे 90 फीसदी मानसिक दिव्यांग माना गया। अदालत में आकर जेएन मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने अपनी रिपोर्ट की तस्दीक की है।
ये तथ्य बने सजा के आधार
विशेष लोक अभियोजक के अनुसार, इस मुकदमे में वादी की मां, पिता, गांव की महिला, महिला पुलिसकर्मी, पुरुष सिपाही, मेडिकल परीक्षण करने वाली डॉक्टर, मानसिक परीक्षण करने वाले डॉक्टर, विवेचक की गवाही हुई है। विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ की वह रिपोर्ट भी बड़ा आधार है, जिसमें दुष्कर्म का आधार बताया गया है। इसी आधार पर सजा सुनाई गई है।
डर गए थे अभिभावक, घरों में कैद किए बच्चे
तहरीर में खुद वादिया की मां ने लिखित में दिया था कि इस घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल बन गया था। छोटे बच्चों व बच्चियों के अभिभावक इतने डर गए थे कि उन्होंने अपने बच्चों को घरों में कैद करके रखना शुरू कर दिया था।
- मिशन शक्ति अभियान का चौथा चरण शुरू हो चुका है। शासन की मंशा के अनुसार किसी भी अपराधी के प्रति अभियोजन की कार्रवाई में शिथिलता नहीं बरती जाएगी। राज्य की ओर से मजबूत पैरवी की जाएगी। अगले 100 दिन में मजबूती से और भी सजाएं कराने का प्रयास जारी है। - धीरेंद्र सिंह तोमर, डीजीसी फौजदारी
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अभियोजन पक्ष से विशेष लोक अभियोजक संजय शर्मा व लव बंसल के अनुसार, 12 वर्षीय किशोरी की मां ने नौ मई 2013 को गंगीरी थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। मुकदमे के अनुसार, उनकी मानसिक कमजोर बेटी को गांव का ही युवक दोपहर में करीब 11:15 बजे अपने खंडहरनुमा मकान में ले गया, जहां उसके साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया।
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यह गांव की महिलाओं ने देखा तो वे शोर मचाते हुए मौके पर पहुंचीं। उन्हें आता देखकर आरोपी भाग गया। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। मेडिकल परीक्षण व मुकदमे के आधार पर आरोपी की गिरफ्तारी आदि की कार्रवाई की गई।
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सत्र परीक्षण में साक्ष्यों व गवाही के आधार पर अदालत ने आरोपी किशन उर्फ कृष्णा को दोषी करार देकर उम्रकैद के साथ-साथ 50 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया है। साथ ही, कहा है कि जुर्माना राशि बच्ची के पुनर्वास व उपचार के लिए दी जाए। अदालत ने जिलाधिकारी व विधिक सेवा प्राधिकरण को बच्ची का प्रतिकर दिलाने के लिए भी कहा है।
मेडिकल कॉलेज में हुआ था परीक्षण, 90 फीसदी मानसिक दिव्यांग माना
विशेष लोक अभियोजक संजय शर्मा व लव बंसल के अनुसार, अपने साथ हुए घटनाक्रम को सही से बता पाने में अक्षम किशोरी को पुलिस ने मानसिक परीक्षण के लिए जेएन मेडिकल कॉलेज भेजा। 13 मई 2013 को मानसिक परीक्षण/आईक्यू जांच में उसे 90 फीसदी मानसिक दिव्यांग माना गया।
फिर सत्र परीक्षण के दौरान पुन: 7 जून 2019 को यह प्रक्रिया हुई। इस रिपोर्ट में भी उसे 90 फीसदी मानसिक दिव्यांग माना गया। अदालत में आकर जेएन मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने अपनी रिपोर्ट की तस्दीक की है।
ये तथ्य बने सजा के आधार
विशेष लोक अभियोजक के अनुसार, इस मुकदमे में वादी की मां, पिता, गांव की महिला, महिला पुलिसकर्मी, पुरुष सिपाही, मेडिकल परीक्षण करने वाली डॉक्टर, मानसिक परीक्षण करने वाले डॉक्टर, विवेचक की गवाही हुई है। विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ की वह रिपोर्ट भी बड़ा आधार है, जिसमें दुष्कर्म का आधार बताया गया है। इसी आधार पर सजा सुनाई गई है।
डर गए थे अभिभावक, घरों में कैद किए बच्चे
तहरीर में खुद वादिया की मां ने लिखित में दिया था कि इस घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल बन गया था। छोटे बच्चों व बच्चियों के अभिभावक इतने डर गए थे कि उन्होंने अपने बच्चों को घरों में कैद करके रखना शुरू कर दिया था।
- मिशन शक्ति अभियान का चौथा चरण शुरू हो चुका है। शासन की मंशा के अनुसार किसी भी अपराधी के प्रति अभियोजन की कार्रवाई में शिथिलता नहीं बरती जाएगी। राज्य की ओर से मजबूत पैरवी की जाएगी। अगले 100 दिन में मजबूती से और भी सजाएं कराने का प्रयास जारी है। - धीरेंद्र सिंह तोमर, डीजीसी फौजदारी