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अलीगढ़ : सिपाही पत्नी के उत्पीड़न में दरोगा गया जेल
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आगरा में तैनात दरोगा अरविंद कुमार की सिपाही पत्नी के उत्पीड़न के मामले में अपील एडीजे-6 संजीव सिंह के न्यायालय से खारिज कर दी गई। उसे निचली अदालत की ओर से सुनाई गई सजा के आधार पर जेल भेज दिया गया। बता दें कि उसकी पत्नी स्मृति सिंह अलीगढ़ पुलिस में तैनात रही है। वर्तमान में स्मृति एटा महिला थाना में तैनात हैं।
मूल रूप से इटावा के बकेवर नगला सत्ता खां का अरविंद सिंह आगरा पुलिस में दरोगा के पद पर तैनात है। उसकी पत्नी स्मृति यहां तैनात रही हैं। दोनों की शादी 1999 में हुई। बाद में स्मृति ने अरविंद व ससुरालियों पर उत्पीड़न के आरोप लगाए, जिसमें सिविल लाइंस थाने में मुकदमा दर्ज हुआ था। 20 जुलाई 2017 को निचली अदालत ने अरविंद को दोषी करार देकर सजा सुनाते हुए बाकी ससुरालियों को बरी कर दिया था।
स्मृति की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता हरिओम वार्ष्णेय के अनुसार अरविंद की ओर से इस सजा के आदेश के खिलाफ अपील याचिका एडीजे न्यायालय में दायर की गई, जिसे न्यायालय ने खारिज करते हुए आरोपी को अभिरक्षा में लेकर जेल भेज दिया। घटना के समय अरविंद हेड कांस्टेबल था। वर्तमान में प्रमोशन पाकर वह दरोगा के पद पर तैनात था।
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एएमयू कर्मी की अपील खारिज, सजा बरकरार
अलीगढ़ मुसलिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के इंजीनियरिंग विभाग के कर्मचारी मो. सादिक की रुपयों की धोखाधड़ी संबंधी आरोप में निचली अदालत की सजा के खिलाफ अपील एडीजे-9 सुनील सिंह के न्यायालय से खारिज कर दी गई है। उसकी निचली अदालत की ओर से सुनाई गई सजा बरकरार रखी गई है।
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता एडीजीसी जेपी राजपूत के अनुसार, एएमयू के ही मो.जहांगीर ने मो.सादिक निवासी आलम बाग के खिलाफ सिविल लाइंस में मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें प्लाट के लिए रुपयों की धोखाधड़ी करने व मांगने पर धमकी देने, अभद्रता करने आदि के आरोप थे। इस मामले में सीजेएम न्यायालय ने 8 मार्च 2019 को उसे सजा सुनाई थी। इस सजा संबंधी आदेश के खिलाफ सादिक ने अपील एडीजे न्यायालय में की थी, जिसे खारिज करते हुए उसकी सजा बरकरार रखी गई है।
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मूल रूप से इटावा के बकेवर नगला सत्ता खां का अरविंद सिंह आगरा पुलिस में दरोगा के पद पर तैनात है। उसकी पत्नी स्मृति यहां तैनात रही हैं। दोनों की शादी 1999 में हुई। बाद में स्मृति ने अरविंद व ससुरालियों पर उत्पीड़न के आरोप लगाए, जिसमें सिविल लाइंस थाने में मुकदमा दर्ज हुआ था। 20 जुलाई 2017 को निचली अदालत ने अरविंद को दोषी करार देकर सजा सुनाते हुए बाकी ससुरालियों को बरी कर दिया था।
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स्मृति की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता हरिओम वार्ष्णेय के अनुसार अरविंद की ओर से इस सजा के आदेश के खिलाफ अपील याचिका एडीजे न्यायालय में दायर की गई, जिसे न्यायालय ने खारिज करते हुए आरोपी को अभिरक्षा में लेकर जेल भेज दिया। घटना के समय अरविंद हेड कांस्टेबल था। वर्तमान में प्रमोशन पाकर वह दरोगा के पद पर तैनात था।
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एएमयू कर्मी की अपील खारिज, सजा बरकरार
अलीगढ़ मुसलिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के इंजीनियरिंग विभाग के कर्मचारी मो. सादिक की रुपयों की धोखाधड़ी संबंधी आरोप में निचली अदालत की सजा के खिलाफ अपील एडीजे-9 सुनील सिंह के न्यायालय से खारिज कर दी गई है। उसकी निचली अदालत की ओर से सुनाई गई सजा बरकरार रखी गई है।
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता एडीजीसी जेपी राजपूत के अनुसार, एएमयू के ही मो.जहांगीर ने मो.सादिक निवासी आलम बाग के खिलाफ सिविल लाइंस में मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें प्लाट के लिए रुपयों की धोखाधड़ी करने व मांगने पर धमकी देने, अभद्रता करने आदि के आरोप थे। इस मामले में सीजेएम न्यायालय ने 8 मार्च 2019 को उसे सजा सुनाई थी। इस सजा संबंधी आदेश के खिलाफ सादिक ने अपील एडीजे न्यायालय में की थी, जिसे खारिज करते हुए उसकी सजा बरकरार रखी गई है।