Aligarh Industries: कोरोना काल के बाद कुशल श्रमिकों की कमी, जूझ रहा अलीगढ़ का उद्योग, गिरा 25 फीसदी उत्पादन
ताला और हार्डवेयर कारोबारी सुरेंद्र कुमार बताते हैं कि अलीगढ़ में सालाना करीब 4000 करोड़ का ताला और हार्डवेयर कारोबार है, कोरोना काल के बाद कुशल कारीगरों की कमी के चलते करीब 25 फीसदी की गिरावट आई है।
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विस्तार
अलीगढ़ जिले की औद्योगिक इकाइयां कुशल श्रमिकों की कमी से जूझ रही हैं। हार्डवेयर, ताला निर्माण, इलेक्ट्रिक गुड्स की फैक्टरियों में करीब एक लाख कुशल कारीगरों की जरूरत है। यहां की फैक्टरियों में मशीनें चलाना सीखकर अधिक वेतन की चाहत में कारीगर फरीदाबाद, गाजियाबाद, नोएडा की कंपनियों में जा रहे हैं। कोरोना काल के बाद से फैक्टरियों में कारीगरों का टोटा लगातार बना हुआ है।
ताला और हार्डवेयर कारोबारी सुरेंद्र कुमार बताते हैं कि अलीगढ़ में सालाना करीब 4000 करोड़ का ताला और हार्डवेयर कारोबार है, कोरोना काल के बाद कुशल कारीगरों की कमी के चलते करीब 25 फीसदी की गिरावट आई है।
कोरोना काल के बाद से ही जिले की औद्योगिक इकाइयों में कुशल कारीगरों की किल्लत बनी हुई है। इसका बड़ा कारण यह भी है कि यहां स्थित प्रशिक्षण संस्थानों में युवकों को कुछ सिखाया नहीं जाता। फैक्टरियों में आकर युवक काम सीखते हैं और कुछ महीनों के बाद ही अन्य राज्यों में चले जाते हैं।- दिनेश वार्ष्णेय , महामंत्री औद्योगिक आस्थान निर्माता विकास समिति
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उद्योगों के उत्थान के लिए कई योजनाएं चल रही हैं, जिनका लाभ उद्यमियों को मिल रहा है। दूसरी ओर कुशल कारीगर तैयार करने के लिए प्रशिक्षण केंद्र चल रहे हैं, जिनमें युवाओं की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।- वीरेंद्र सिंह, उपायुक्त उद्योग
कुशल कारीगरों के अभाव में जिले की औद्योगिक इकाइयां रफ्तार नहीं पकड़ पा रही हैं। आईटीआई आदि संस्थानों में प्रशिक्षित युवक अलीगढ़ की फैक्टरियों में मशीनों पर काम सीखते हैं और फरीदाबाद, नोएडा, गाजियाबाद आदि स्थानों की फैक्टरियों में चले जाते हैं। इसके चलते यहां कुशल कारीगरों का अभाव हो जाता है। जिलेभर के उद्योगों की बात करें तो करीब एक लाख कुशल कारीगरों की जरूरत है।- नेकराम शर्मा, अध्यक्ष, ताला नगरी औद्योगिक विकास एसोसिएशन
पॉवर प्रेस और पॉलिश का काम कुशल कारीगर ही कर सकते हैं, ऐसे कारीगर अधिक वेतन के लिए यहां से अन्य राज्यों में जा रहे हैं। इसके चलते अलीगढ़ के उद्योगों में करीब 25 फीसदी तक उत्पादन गिरा है। अनुमान के तहत जिन फैक्टरियों का मासिक टर्नओवर 10 करोड़ रहा है, वहां अब सात करोड़ है।- राजेश सरकोडा, महामंत्री, सासनी गेट औद्योगिक वेलफेयर संस्थान
सीजन को नहीं भुना सके उद्यमी
पला रोड के हार्डवेयर कारोबारी वीरेंद्र गिरि ने बताया कि होली के त्योहार पर डिमांड के अनुसार माल तैयार नहीं करा सके थे। अक्सर त्योहार तथा अन्य सीजन में ऐसा होता है। सेंटर प्वाइंट के मूर्ति कारोबारी सुशील मित्तल बताते हैं कि दीपावली और शादी के सीजन में डिमांड बढ़ती है, लेकिन मजदूरों के अभाव में पर्याप्त उत्पादन नहीं हो पाता। ऊपरकोट के ताला कारोबारी अबरार हुसैन कहते हैं कि ताले की वैरायटी बढ़ने के बाद कुशल कारीगरों की जरूरत बढ़ी है। पिछली बार ईद पर मजदूरों के अभाव में बाजार की डिमांड पूरी नहीं कर सके थे।
आंकड़े
- 26 हजार औद्योगिक इकाइयां हैं जिले में
- 05 लाख कर्मचारी हैं औद्योगिक इकाइयों में कार्यरत
- 01 लाख कुशल कर्मचारियों की है जरूरत
- 07 हजार रुपये न्यूनतम वेतन अलीगढ़ में
- 15 हजार रुपये न्यूनतम वेतन एनसीआर में
इन मशीनों पर कार्य करने वालों की जरूरत
जिले की फैक्टरियों में सबसे ज्यादा मांग सीएनसी (कंप्यूटर न्यूमेरिकल कंट्रोल्ड लैथ मशीन), वीएमसी (वर्टिकल मिलिंग मशीन), रोबोटिक मशीन, कंप्यूटर डिजाइनिंग मशीन, पावर प्रेस समेत अन्य मशीनों को चलाने वाले कुशल कारीगरों की है।
सासनी गेट औद्योगिक वेलफेयर संस्थान
आगरा रोड स्थित राठी हॉस्पिटल से लेकर हाथरस अड्डा तक औद्योगिक क्षेत्र फैला हुआ है। यहां अधिकांश इकाइयां हार्डवेयर, डोर फिटिंग आदि की हैं। 500 औद्योगिक इकाइयां इस क्षेत्र में हैं।
ताला नगरी औद्योगिक विकास एसोसिएशन
यहां पर अधिकांश इकाइयां हार्डवेयर और इलेक्ट्रिक गुड्स की हैं। निर्यातक इकाइयां भी हैं। 1200 भूखंड इस औद्योगिक क्षेत्र में हैं। 600 भूखंड पर औद्योगिक इकाइयां सक्रिय हैं।
औद्योगिक आस्थान निर्माता विकास समिति, आईटीआई रोड
यह क्षेत्र किशोर नगर से लेकर आईटीआई रोड पर मात मंदिर तक फैला हुआ है। यहां पर ताला हार्डवेयर, इलेक्ट्रिक गुड्स का निर्माण होता है। 250 औद्योगिक इकाइयां इस क्षेत्र में कुल हैं। 250 इकाइयों में ही जेनरेटर लगे हुए हैं।