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अलीगढ़ : काली नदी के जल की गुणवत्ता में हो रहा सुधार

Mon, 27 Dec 2021 01:54 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 27 Dec 2021 01:54 AM IST
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Aligarh: Improvement in the water quality of Kali river
काली नदी। - फोटो : CITY OFFICE
राजा तिवारी, अलीगढ़।
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पर्यावरण संरक्षण के प्रति उठाए जा रहे कदम और शोध के सफल परिणाम काली नदी के जल में दिखने लगे हैं। वर्ष 2020 के मुकाबले वर्ष 2021 में काली नदी के जल की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। हालांकि, अभी भी इसका जल हाथ धोने लायक नहीं है। इसके बावजूद नदी में मछली, मगरमच्छ जैसे जलीय जीव जीवित हैं। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले समय नदी के पानी की गुणवत्ता में और सुधार होगा।
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यशाला व प्रयोगशाला द्वारा काली नदी के जल की मॉनीटरिंग की जाती है। कासगंज के नदरई गेट पर प्रतिदिन व अतरौली के अप-डाउन स्ट्रीम से मंगलवार-शुक्रवार को नदी के पानी का नमूना लिया जाता है।
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इसके बाद प्रयोगशाला में नमूने से बीओडी (बॉयोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड), सीओडी (कार्बन डाई ऑक्साइड डिमांड), रंग और पीएच के अलग-अलग आंकड़े जुटाए जाते हैं। अतरौली के अप-डाउन स्ट्रीम की बीओडी की मात्रा वर्ष 2020 के मुकाबले वर्ष 2021 में बढ़ी है। सीओडी की मात्रा बढ़ी है। रंग की मात्रा पिछले साल के मुकाबले बराबर रही। जबकि पीएच की मात्रा में थोड़ा सुधार हुआ है।
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कासगंज के नदरई गेट पर बीओडी की मात्रा कम हुई है, जो अच्छे संकेत हैं। सीओडी और कलर की मात्रा बराबर रही तो पीएच की मात्रा में यहां भी इजाफा हुआ है। अतरौली व नदरई गेट पर बीओडी 20 से 42 और 16 से 28 मिलीग्राम प्रतिलीटर है। इसीलिए नदी का पानी न तो पीने व न नहाने लायक है। इस पानी से हाथ भी नहीं धुले जा सकते हैं, क्योंकि मानक के अनुसार बीओडी की मात्रा तीन मिलीग्राम प्रतिलीटर से कम होनी चाहिए।
काली नदी को स्वच्छ करने के लिए उठाए जा रहे कदम और शोध के फलस्वरूप नदी के जल की गुणवत्ता थोड़ी ठीक हुई है। बताया गया कि इस पानी को जानवर पीते हैं। अभी तक किसी तरह की समस्या नहीं आई है। पानी में मछलियां व मगरमच्छ जैसे जलीय जीव जीवित हैं। ऐसे में अभी नदी का जल प्रदूषित होने की बजाय स्थिर हो गया है।
जल की शुद्धि के लिए अतरौली के शिक्षक सुरेश कुमार कर रहे शोध
जिले से होकर गुजर रही काली नदी की गंदगी, कीचड़ और बदबू से लोग परेशान हैं। इस नदी को पुनर्जीवित करने और पीने योग्य स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने के लिए अतरौली के वीरांगना अवंतीबाई राजकीय महाविद्यालय के बॉटनी विभाग के अध्यक्ष व असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुरेश कुमार को शोध के लिए सरकार ने दो लाख 29 हजार रुपये की धनराशि दी है।
सुरेश कुमार ने बताया कि आगामी तीन सालों तक अलीगढ़ जिले में जोन बनाकर काम चलेगा, इसमें किसानों, उद्यमियों और जनता की भागीदारी की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि पहले हम जलस्तर को संतुलित करेंगे। नदी के आसपास क्रॉपिंग एग्रीकल्चर लैंड का उपयोग करने वाले किसानों को किस समय पर कौन सी खेती करनी चाहिए, इसको लेकर जागरूक कर रहे हैं। इससे खेतों में काफी हद तक नमी और जल स्तर को सहूलियत मिलती है।
- अभी तक काली नदी के पानी का सेवन करने से किसी भी जानवर को कोई परेशानी नहीं हुई है। न ही इसकी शिकायत हमारे पास आई है। पानी ठीक है, लेकिन यह भी सत्य है कि अभी पीने, नहाने और हाथ धोने के लायक नहीं है। - डॉ. जेपी सिंह, सहायक वैज्ञानिक अधिकारी।

- काली नदी के जल की गुणवत्ता की नियमित मॉनीटरिंग की जा रही है। वर्तमान में गुणवत्ता स्थिर होने के साथ-साथ थोड़ी सुधरी है। यदि थोड़ा-थोड़ा सुधार होता रहा तो यह राहत भरी खबर है। - एके चौधरी, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण विभाग।
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