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अलीगढ़ : सिरदर्द बना गृह कर, आम आदमी खा रहा ठोकर

Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 05 Aug 2022 12:34 AM IST
Aligarh: Home tax made a headache, common man is eating stumbling
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नगर निगम द्वारा बढ़ाया गया गृह कर हर आम शहरी के लिए सिरदर्द बना हुआ है और बढ़े हुए बिल को लेकर लोग नगर निगम में ठोकर खा रहे हैं। आलम ये है कि अब तक 25 हजार आपत्तियां नगर निगम में दाखिल हो चुकी हैं।

खास बात ये है कि अधिकांश मामलों में नगर निगम संतोषजनक निस्तारण और जवाब नहीं दे पा रहा। किस सर्वे व दर के अनुसार बढ़ाया गया, इसका कोई संतोषजनक जवाब नहीं है। बस आपत्ति निस्तारण कर संशोधित बिल देकर व्यक्ति को संतुष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है।

महानगर के विष्णुपुरी के रामपाल बघेल की ओर से शिकायत मुख्यमंत्री सहित अन्य पटलों पर आईजीआरएस के तहत भेजी गई। इस शिकायत में कुल सात भवनों को लेकर जिक्र किया गया है, जिनमें यूसुफगंज के दो, गूलर रोड के एक, पत्थर बाजार के तीन व विष्णुपुरी के एक भवनों का उल्लेख है। जिनके कर निर्धारण को लेकर जानकारी मांगी गई।
जिसमें कई आरोप नगर निगम पर भेदभाव के लगाए गए। इसके जवाब में नगर निगम कर विभाग ने कहा है कि पहले तो शिकायतकर्ता से संपर्क नहीं हो सका। दूसरा जिन भवनों का विवरण दिया गया है, उनमें कोई पहचान नहीं खोली गई है। मौके पर इनमें से कुछ भवन अनावासीय व कुछ आवासीय हैं। सभी की जांच प्रक्रिया जारी है।
एक भवन के दो-दो कर भी
इसी तरह नौरंगाबाद छावनी के जयप्रकाश गुप्ता की समस्या है। वे बताते हैं कि उनके पुस्तैनी मकान की मालकिन उनकी मां थीं। उनके देहांत के बाद भाइयों में मौखिक सहमति से बंटवारे हो गए। सभी अलग अलग हिस्सों में रह रहे हैं। जयप्रकाश पूरे मकान का गृह कर अलग दे रहे हैं और उनके एक भाई अपने हिस्से का अलग गृह कर दे रहे हैं। तीन माह पुरानी शिकायत का आज तक निस्तारण नहीं हुआ है।
आपत्तियों में भी आ रही इसी तरह की शिकायतें
नगर निगम में नए कर निर्धारण के बाद अब तक 25 हजार आपत्तियां आई हैं, जिनमें से 12 हजार करीब निस्तारित कर दी गई हैं। अधिकांश आपत्तियों पर जो विषय है, वह सबसे पहले तो ये कि नगर निगम स्तर से जीआई सर्वे में भूखंड का जो ब्योरा उल्लेखित किया है, वह गलत है।
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मतलब मौके पर निर्धारित भूखंड से अधिक भूखंड खोला गया है। मतलब साफ है कि सर्वे किस तरह से हुआ है। दूसरा पुराने शहर के बजाय सिविल लाइंस व स्वर्ण जयंती इलाके से ज्यादा आपत्तियां आ रही हैं। जिनके निस्तारण में अब भवन स्वामी के संतुष्ट होने तक नगर निगम टीम के पसीने छूटे रहते हैं। इतनी आपत्तियों का मतलब साफ है कि नगर निगम स्तर से सर्वे किस तरह से किया गया होगा।
- कर निर्धारण एरिया, भवन के प्रकार को लेकर किया गया है। करीब 30 हजार भवन ऐसे हैं, जो मिस मैच हैं। उन्हें जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। आपत्तियां जो भी आ रही हैं, उनका निस्तारण किया जा रहा है। लोग आपत्ति निस्तारण पर सहमत भी हो रहे हैं। कर जमा कर रहे हैं। - विनय कुमार राय, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी

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