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अलीगढ़ : विधायकों से मुकदमा वापसी को सरकार की मंजूरी, अदालत पहुंची पाती

Thu, 16 Jul 2020 01:52 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 16 Jul 2020 01:52 AM IST
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Aligarh: Government approves withdrawal of lawsuits from MLAs, could get court
भाजपा विधायक अनिल पराशर व संजीव राजा पर दर्ज मुकदमा वापसी पर जल्द ही फैसला आ सकता है। वर्ष 2007 में बारहद्वारी चौराहे के पास बिना अनुमति के धरना प्रदर्शन करने, धारा 144 का उल्लंघन करने, धार्मिक भावनाएं भड़काने के आरोप में ये मुकदमा लोगों के खिलाफ पुलिस की ओर से दर्ज कराया गया था। जिसकी सुनवाई एडीजे-3 के न्यायालय में चल रही है और राज्यपाल की सहमति के बाद शासन स्तर से मुकदमा वापसी की मंजूरी मिल गई, जिसके संबंध में पत्र न्यायालय पहुंच गया है।
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वर्ष 2007 में तत्कालीन आशुतोष वार्ष्णेय के बेटे के साथ मारपीट होने के विरोध में भाजपाइयों ने बारहद्वारी कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन किया था। जिसमें एएमयू के छात्रों को लेकर बयानबाजी हुई थी। धरना प्रदर्शन के बाद बन्ना देवी थाने में 4 मई 2007 को तत्कालीन इंस्पेक्टर अशोक कुमार सिंह की ओर से ये चर्चित मुकदमा लिखवाया गया था। जिसमें धारा 147, 153 ए और 188 के तहत चार्ज लगाए गए थे। इन धाराओं में एकत्र होकर धार्मिक भावना भड़काने और धारा 144 के उल्लंघन के तहत कार्रवाई होनी थी। धरने के संचालक अनिल पाराशर के साथ भू प्रकाश माहौर, बीडी गुप्ता, शकुंतला भारती, कृष्णा गुप्ता, पूर्व डिप्टी मेयर पुष्पलता शर्मा, जयवीर सरन, सतेंद्र सरन, शांति स्वरूप माहेश्वरी, मधु मिश्रा, पवन गुप्ता, दीपक मित्तल, तत्कालीन जिलाध्यक्ष रघुराज सिंह, संजीव राजा, तत्कालीन मेयर आशुातोष वार्ष्णेय वीरेंद गुप्ता और संजय गोयल आदि शामिल थे।
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इन्हीं लोगों के खिलाफ मुकदमे की चार्जशीट तैयार होना शुरू हुई लेकिन छह लोगों के नाम पता स्पष्ट नहीं हो पाए। जिसमें कृष्णा गुप्ता, जयवीर सरन, सतेंद्र सरन, पवन गुप्ता और वीरेंद्र गुप्ता शामिल थे। इसलिए फाइनल चार्जशीट में पुष्पलता शर्मा, शांति स्वरूप माहेश्वरी, पवन गुप्ता, वीरेंद्र गुप्ता, संजीव राजा, आशुतोष वार्ष्णेय, संजय गोयल, अनिल पाराशर, शकुंतला भारती, मधु मिश्रा, दीपक मित्तल और रघुराज सिंह नामजद रह गए। मुकदमे की सुनवाई के दौरान ही शांति स्वरूप का निधन हो गया। फिलहाल ये मुकदमा एडीजे तृतीय के न्यायालय में विचाराधीन है।
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वर्ष 2017 में भाजपा सरकार बनने और खुद कोल विधानसभा का विधायक बनने के बाद अनिल पाराशर ने शासन में इसकी पैरवी करना शुरू किया, क्योंकि मामला पुलिस की ओर से लिखवाया गया था। उन्होंने अनुरोध किया कि ये राजनीतिक विद्वेष के कारण लिखवाया गया मुकदमा है इसे वापस ले लिया जाए। वर्ष 2018 में शासन में इसकी कार्रवाई शुरू हुई। 18 सितंबर 2019 को शासन के अनुसचिव ने वाद से संबंधित तथ्य, जांच आदि मंगवाई। सब कुछ देखने और विचार करने के बाद पुलिस और स्थानीय जिला प्रशासन की रिपोर्ट ली गई। जिसमें लोक अभियोजक ने भी मुकदमा वापस कराने की संस्तुति कर दी थी। शासन को सभी रिपोर्ट देने के बाद अब मुकदमा वापस लेने की सहमति बन गई है। राज्यपाल की सहमति संबंधी प्रदेश सरकार का पत्र न्यायालय में पेश कर दिया गया है। शासकीय अधिवक्ता जेपी राजपूत ने बताया कि सभी पत्रावलियों को अवलोकित कर लिया गया है। अनिल पाराशर की ओर से रिवीजन अपील रखी जाएगी। जिस पर बहस के बाद अदालत का निर्णय आएगा। चूंकि यह मुकदमा वापस संबंधी शासन का आदेश है। इसलिए सभी आरोपियों को राहत मिलने की उम्मीद है।
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