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अलीगढ़ : पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष तेजवीर सिंह गुड्डू रिहा
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अलीगढ़ : तेजवीर सिंह गुड्डू का माला पहनाकर स्वागत करते सीटू चौधरी। संवाद
- फोटो : CITY OFFICE
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष तेजवीर सिंह गुड्डू की बुधवार को रिहाई हो गई। उन्हें गैंगेस्टर के मुकदमे में पंचायत चुनाव से ऐन पहले गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। उस समय उन्होंने इस गिरफ्तारी को पंचायत चुनाव की साजिश से जुड़ी कार्रवाई करार दिया था। हालांकि अभी उनका अगला सियासी कदम उजागर नहीं हुआ है। मगर उनकी रिहाई के बाद तमाम सियासी चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है।
तेजवीर सिंह को इसी वर्ष तीन फरवरी को गिरफ्तार किया गया था। उन पर सिविल लाइंस में गैंगेस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेजा गया था। बाद में उन्हें यहां से बुलंदशहर जेल शिफ्ट किया गया था। तब से वे बुलंदशहर जेल में निरुद्ध थे। इस दौरान जमीनी धोखाधड़ी से जुड़े मुकदमे में तो सत्र न्यायालय से जमानत मंजूर हो गई थी, मगर गैंगेस्टर के मुकदमे में लंबे प्रयास के बाद अब आकर हाईकोर्ट से जमानत मंजूर हुई।
इसके बाद मंगलवार को उनका रिहाई आदेश सत्र न्यायालय से जेल भेजा गया, जिस पर बुधवार सुबह उनकी रिहाई हुई। इस दौरान काफिले के साथ उन्हें अलीगढ़ लाया गया, जहां सबसे पहले वे अपने पैतृक गांव सुखरावली पहुंचे। इस दौरान तमाम समर्थकों, परिवार के लोगों व ग्रामीणों ने उनका स्वागत किया। इधर, तेजवीर सिंह गुड्डू के अधिवक्ता प्रताप सिंह राघव ने जमानत मंजूर होने के बाद बुधवार सुबह रिहाई होने की तस्दीक की है।
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सियासी कदम का सभी को इंतजार
जिला पंचायत में गहरी पैठ रखने वाले जिले के सियासी रसूखदार ने पंचायत चुनाव से ऐन पहले अपनी गिरफ्तारी को विपक्षियों की साजिश करार दिया था। साफ कहा था कि उन्हें व उनके परिवार को जिला पंचायत के चुनाव से रोकने के लिए साजिश रचकर ये कार्रवाई की गई है। अब उनके अगले सियासी कदम का सभी को इंतजार है। हालांकि उनके छोटे बेटे कार्तिक चौधरी ने हाल ही में राष्ट्रीय लोकदल की सदस्यता ग्रहण कर संगठन में सक्रियता शुरू कर दी है।
कारोबारी पर हमले के बाद एकाएक हुई कार्रवाई
तेजवीर सिंह गुड्डू की गिरफ्तारी से ऐन पहले उनके दोनों बेटों पर शहर के एक बड़े कारोबारी पर हमले का मुकदमा दर्ज हुआ था। जिसमें दोनों जेल गए थे। उसके बाद ही पुलिस ने जमीनी कारोबार के मुकदमों को आधार बनाकर गैंगेस्टर एक्ट में यह कार्रवाई की थी। साथ में तेजवीर सिंह गुड्डू के आपराधिक रिकार्ड व हिस्ट्रीशीट के आधार पर हाईकोर्ट में पुलिस ने जमानत का विरोध किया था।
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पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष तेजवीर सिंह गुड्डू की बुधवार को रिहाई हो गई। उन्हें गैंगेस्टर के मुकदमे में पंचायत चुनाव से ऐन पहले गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। उस समय उन्होंने इस गिरफ्तारी को पंचायत चुनाव की साजिश से जुड़ी कार्रवाई करार दिया था। हालांकि अभी उनका अगला सियासी कदम उजागर नहीं हुआ है। मगर उनकी रिहाई के बाद तमाम सियासी चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है।
तेजवीर सिंह को इसी वर्ष तीन फरवरी को गिरफ्तार किया गया था। उन पर सिविल लाइंस में गैंगेस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेजा गया था। बाद में उन्हें यहां से बुलंदशहर जेल शिफ्ट किया गया था। तब से वे बुलंदशहर जेल में निरुद्ध थे। इस दौरान जमीनी धोखाधड़ी से जुड़े मुकदमे में तो सत्र न्यायालय से जमानत मंजूर हो गई थी, मगर गैंगेस्टर के मुकदमे में लंबे प्रयास के बाद अब आकर हाईकोर्ट से जमानत मंजूर हुई।
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इसके बाद मंगलवार को उनका रिहाई आदेश सत्र न्यायालय से जेल भेजा गया, जिस पर बुधवार सुबह उनकी रिहाई हुई। इस दौरान काफिले के साथ उन्हें अलीगढ़ लाया गया, जहां सबसे पहले वे अपने पैतृक गांव सुखरावली पहुंचे। इस दौरान तमाम समर्थकों, परिवार के लोगों व ग्रामीणों ने उनका स्वागत किया। इधर, तेजवीर सिंह गुड्डू के अधिवक्ता प्रताप सिंह राघव ने जमानत मंजूर होने के बाद बुधवार सुबह रिहाई होने की तस्दीक की है।
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सियासी कदम का सभी को इंतजार
जिला पंचायत में गहरी पैठ रखने वाले जिले के सियासी रसूखदार ने पंचायत चुनाव से ऐन पहले अपनी गिरफ्तारी को विपक्षियों की साजिश करार दिया था। साफ कहा था कि उन्हें व उनके परिवार को जिला पंचायत के चुनाव से रोकने के लिए साजिश रचकर ये कार्रवाई की गई है। अब उनके अगले सियासी कदम का सभी को इंतजार है। हालांकि उनके छोटे बेटे कार्तिक चौधरी ने हाल ही में राष्ट्रीय लोकदल की सदस्यता ग्रहण कर संगठन में सक्रियता शुरू कर दी है।
कारोबारी पर हमले के बाद एकाएक हुई कार्रवाई
तेजवीर सिंह गुड्डू की गिरफ्तारी से ऐन पहले उनके दोनों बेटों पर शहर के एक बड़े कारोबारी पर हमले का मुकदमा दर्ज हुआ था। जिसमें दोनों जेल गए थे। उसके बाद ही पुलिस ने जमीनी कारोबार के मुकदमों को आधार बनाकर गैंगेस्टर एक्ट में यह कार्रवाई की थी। साथ में तेजवीर सिंह गुड्डू के आपराधिक रिकार्ड व हिस्ट्रीशीट के आधार पर हाईकोर्ट में पुलिस ने जमानत का विरोध किया था।
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