{"_id":"61c37cf2e495a945ac16eb73","slug":"aligarh-former-army-captain-caught-in-the-face-of-dismissal-of-filing-city-office-news-ali28125843","type":"story","status":"publish","title_hn":"अलीगढ़ : दाखिल खारिज के फेर में फंसे सेना के पूर्व कैप्टन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अलीगढ़ : दाखिल खारिज के फेर में फंसे सेना के पूर्व कैप्टन
विज्ञापन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
सन् 1971 के युद्घ का हिस्सा रहे सेना के पूर्व कैप्टन कोर्ट कचहरी के दांव पेचों में उलझ गए हैं। करीब 30 सालों से वह ग्राम पंचायत द्वारा बतौर इनाम दी गई 400 वर्ग मीटर भूमि की दाखिल खारिज कराने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन कुछ नहीं हुआ। उनका कहना है कि सेना में दुश्मनों से जंग लड़ना तो आसान था, लेकिन तहसीलों के चक्कर काटना मुश्किल।
खैर तहसील के उसरह रसूलपुर निवासी नरेंद्र सिंह ने बताया कि वह सेना में कैप्टन के पद पर तैनात रहे हैं। सन् 1971 के युद्ध में विजयी होने के बाद लौटने पर ग्राम पंचायत की तरफ से इनाम के तौर पर जमीन आवंटित की गई थी। इसमें 180 वर्ग मीटर की जमीन का आवंटन उनके व 220 वर्ग मीटर जमीन का आवंटन इनकी पत्नी चरणवती के नाम हुआ था।
वर्ष 1991 में सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने आवंटित भूमि को अपने नाम दाखिल खारिज कराने का प्रयास किया। लेकिन यह काम अब तक नहीं हो सका है। इसके लिए वह तहसील में कई बार आवेदन कर चुके हैं। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अब वह जिला स्तर पर न्याय की गुहार लगाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
सन् 1971 के युद्घ का हिस्सा रहे सेना के पूर्व कैप्टन कोर्ट कचहरी के दांव पेचों में उलझ गए हैं। करीब 30 सालों से वह ग्राम पंचायत द्वारा बतौर इनाम दी गई 400 वर्ग मीटर भूमि की दाखिल खारिज कराने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन कुछ नहीं हुआ। उनका कहना है कि सेना में दुश्मनों से जंग लड़ना तो आसान था, लेकिन तहसीलों के चक्कर काटना मुश्किल।
खैर तहसील के उसरह रसूलपुर निवासी नरेंद्र सिंह ने बताया कि वह सेना में कैप्टन के पद पर तैनात रहे हैं। सन् 1971 के युद्ध में विजयी होने के बाद लौटने पर ग्राम पंचायत की तरफ से इनाम के तौर पर जमीन आवंटित की गई थी। इसमें 180 वर्ग मीटर की जमीन का आवंटन उनके व 220 वर्ग मीटर जमीन का आवंटन इनकी पत्नी चरणवती के नाम हुआ था।
विज्ञापन
वर्ष 1991 में सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने आवंटित भूमि को अपने नाम दाखिल खारिज कराने का प्रयास किया। लेकिन यह काम अब तक नहीं हो सका है। इसके लिए वह तहसील में कई बार आवेदन कर चुके हैं। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अब वह जिला स्तर पर न्याय की गुहार लगाएंगे।
विज्ञापन