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अलीगढ़ : सो रहा है एफडीए, घेवर-मिठाई की खुद करें जांच
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खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग त्योहारी सीजन में भी सो रहा है। एक सप्ताह से कम समय रक्षाबंधन में रह गया है। इसके बाद भी मिष्ठान भंडारों में चेकिंग अभियान नहीं चलाया गया है। मंगलवार को एडीएम सिटी राकेश मालपाणी ने विभाग को पत्र जारी कर मिष्ठान विक्रेताओं के यहां से घेवर व अन्य मिठाइयों के सैंपल भरने के निर्देश दिए हैं। जिला अभिहित अधिकारी सर्वेश कुमार मिश्रा ने बताया कि मिष्ठान विक्रेताओं के यहां चेकिंग के लिए टीमों का गठन किया जा रहा है। एक से दो दिन में चेकिंग अभियान शुरू कर दिया जाएगा।
घेवर खरीदने से पहले ऐसे करें जांच
खाद्य सुरक्षा विभाग के मुताबिक मिलावटखोरी से बचने के लिए आम लोगों का जागरूक होना बेहद जरूरी है। नकली मावा की पहचान के लिए उसे फिल्टर पेपर पर रखकर आयोडीन की दो तीन बूंद डालें, अगर वह काला पड़ता है तो मिलावटी है। अगर अंगुलियों से मसलने पर दाने नजर आते हैं तो भी मावा मिलावटी है। सिंथेटिक दूध की पहचान के लिए उसे हथेली के बीच रगड़ें। अगर, साबुन जैसा झाग बने तो दूध सिंथेटिक है। चांदी का वरक जलाने पर उतने वजन की गेंद सी बन जाती है, अगर वरक नकली है तो फिर सिलेटी रंग का जला कागज बन जाएगा।
बाजार में 70 प्रतिशत मावा नकली और मिलावटी
पिछले एक साल के विभाग के आंकड़े देखे जाएं तो 34 सैंपल में से 22 सैंपल मावा के फेल हुए। इनमें से तीन तो लैब की रिपोर्ट के मुताबिक खाने के लिए जहर के समान थे, जबकि घेवर की ऊपरी सतह पर मावा ही लगाया जाता है। बिना मावा के घेवर तैयार नहीं होता। साथ ही अन्य 80 प्रतिशत मिठाइयों का निर्माण मावा मिलाकर ही होता है।
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एफडीए ने मांस, सोया व चिल्ली सॉस के भरे नमूने
एफडीए विभाग की टीम ने मंगलवार को बकरीद को लेकर चेकिंग अभियान चालाया। जिला अभिहित अधिकारी सर्वेश कुमार ने बताया कि मांस व्यापारियों द्वारा नियम विरुद्ध कारोबार किए जाने की सूचना पर मांस विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों पर छापा मारा गया। अहमद फराज पुत्र उमरदराज निवासी सराय रहमान की अमीर निशा स्थित मांस की दुकान से नमूना लिया गया। कर्बला रोड टप्पल स्थित सुभाष चंद्र शर्मा पुत्र राम कुमार शर्मा के प्रतिष्ठान से चिली सॉस और सोया सॉस के नमूना संग्रहित किए गए। टीम में खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजीव कुमार, प्रमोद यादव व मनोज कुमार शामिल रहे।
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घेवर खरीदने से पहले ऐसे करें जांच
खाद्य सुरक्षा विभाग के मुताबिक मिलावटखोरी से बचने के लिए आम लोगों का जागरूक होना बेहद जरूरी है। नकली मावा की पहचान के लिए उसे फिल्टर पेपर पर रखकर आयोडीन की दो तीन बूंद डालें, अगर वह काला पड़ता है तो मिलावटी है। अगर अंगुलियों से मसलने पर दाने नजर आते हैं तो भी मावा मिलावटी है। सिंथेटिक दूध की पहचान के लिए उसे हथेली के बीच रगड़ें। अगर, साबुन जैसा झाग बने तो दूध सिंथेटिक है। चांदी का वरक जलाने पर उतने वजन की गेंद सी बन जाती है, अगर वरक नकली है तो फिर सिलेटी रंग का जला कागज बन जाएगा।
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बाजार में 70 प्रतिशत मावा नकली और मिलावटी
पिछले एक साल के विभाग के आंकड़े देखे जाएं तो 34 सैंपल में से 22 सैंपल मावा के फेल हुए। इनमें से तीन तो लैब की रिपोर्ट के मुताबिक खाने के लिए जहर के समान थे, जबकि घेवर की ऊपरी सतह पर मावा ही लगाया जाता है। बिना मावा के घेवर तैयार नहीं होता। साथ ही अन्य 80 प्रतिशत मिठाइयों का निर्माण मावा मिलाकर ही होता है।
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एफडीए ने मांस, सोया व चिल्ली सॉस के भरे नमूने
एफडीए विभाग की टीम ने मंगलवार को बकरीद को लेकर चेकिंग अभियान चालाया। जिला अभिहित अधिकारी सर्वेश कुमार ने बताया कि मांस व्यापारियों द्वारा नियम विरुद्ध कारोबार किए जाने की सूचना पर मांस विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों पर छापा मारा गया। अहमद फराज पुत्र उमरदराज निवासी सराय रहमान की अमीर निशा स्थित मांस की दुकान से नमूना लिया गया। कर्बला रोड टप्पल स्थित सुभाष चंद्र शर्मा पुत्र राम कुमार शर्मा के प्रतिष्ठान से चिली सॉस और सोया सॉस के नमूना संग्रहित किए गए। टीम में खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजीव कुमार, प्रमोद यादव व मनोज कुमार शामिल रहे।