{"_id":"6032cfeb8ebc3ee922346b62","slug":"aligarh-exhibition-city-office-news-ali25689261","type":"story","status":"publish","title_hn":"पद्मश्री लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने कोहिनूर मंच पर बिखेरा अवधी, भोजपुरी लोकगीतों का जादू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पद्मश्री लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने कोहिनूर मंच पर बिखेरा अवधी, भोजपुरी लोकगीतों का जादू
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कोहिनूर मंच पर गीतों की प्रस्तुति देती मालिनी अवस्थी।
- फोटो : CITY OFFICE
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निमिया के डार मैया झुलेली झुलनवा..., मोहे पनिया पिलादे बालन... आज ब्रज में होली रे रसिया... जैसे लोक गीतों को गाकर पद्मश्री लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने नुमाइश के कोहिनूर मंच पर रविवार की रात को लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने भोजपुरी, अवधी गीतों को गाया। उन्होंने सुरों के समागम में श्रोताओं की तालियों की गड़गड़ाहट से पंडाल गूंजता रहा।
रंग बिरंगी रोशनी से नहाए कोहिनूर मंच को सुशोभित करते हुए मालिनी अवस्थी ने यहां मैं तो सोई रही सपनों में, मोपे रंग डार गओ नंनदलाल..., निमिया के डार मैया झुलेली झुलनवा..., मोहे पनिया पिलादे बालन..., लाली मौरे लाल की जित देखूं उत लाल, लाली देखन मैं चली मैं भी हो गई लाल... कव्वाली में उन्होंने आज रंग है ए मां रंग हरी... गाया।
साथ ही उन्होंने अलीगढ़ के कव्वाल उस्ताद हबीब पेंटर को कव्वाली के माध्यम से मंच से नमन किया। उन्होंने अलीगढ़ को फागुनी रंग में रंगते हुए ‘रंगी सारी गुलाबी चुनरिया रे, मोहे मारी नजरिया संवरिया रे...’ गाया। वहीं, भोजपुरी में उन्होंने ‘रेलिया बैरन पिया को लिए जाए रे...’ गाया।
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अलीगढ़ से जुड़ीं यादों को किया ताजा
लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने अपने गीतों से तो श्रोताओं को झूमने पर मजबूर किया। साथ ही उन्होंने मंच से अलीगढ़ से जुड़ीं पुरानी यादों को ताजा किया। इस दौरान उन्होंने 20 साल पहले की नुमाइश से लेकर कोरोना काल और गोमती एक्सप्रेस तक के तजुर्बे तक को शेयर किया।
मालिनी अवस्थी ने कहा कि ब्रज मंडल में एक बार फिर से आकर बहुत खुश हूं। अलीगढ़ वासियों का बहुत-बहुत शुक्रिया। अलीगढ़ का नाम न होता तो शायद कार्यक्रम में आने के लिए भी हां न करतीं। 10 दिन पहले ही बेटे का विवाह हुआ है। अब सच्चे मायने में सास बनी हूं। जीवन भर सास-बहू के गाने गाए हैं। उन्होंने कहा भारत ने सदैव आक्रमण झेले हैं। कोरोना भी बायोकेमिकल अटैक है। हमारे पूर्वजों ने इस प्रकार के हमलों के लिए पहले ही इलाज के तौर पर काढ़े, नीम, तुलसी आदि को तलाश लिया था। कहा कि अलीगढ़ में 20 साल पहले इसी महोत्सव में कार्यक्रम हुआ था। उस समय इतना भव्य मंच नहीं हुआ करता था। उस समय मंच पर गाजल गायन किया था, श्रोता गजलों पर खूब झूमे थे। गोमती एक्सप्रेस के सफर को याद करते हुए कहा कि अलीगढ़ से दिल्ली जाने के लिए इस ट्रेन में दूधवाले चढ़ते थे। उनके साथ ही छात्र भी चढ़ते थे। उस समय ट्रेन में राजनीति की चर्चा होती थी। अलीगढ़ के पकवानों से भरे टिफिन जब ट्रेन के डिब्बों में खुलते थे तो अलग ही सुगंध आती थी।
मंडलायुक्त, आईजी ने किया शुभारंभ
मालिनी अवस्थी नाइट कार्यक्रम का शुभारंभ मंडलायुक्त गौरव दयाल, आईजी पीयूष मोर्डिया, डीएम चंद्रभूषण सिंह, सीडीओ अनुनय झा, एडीएम सिटी राकेश कुमार मालपाणी, एडीएम प्रशासन देवी प्रसाद पाल, एडीएम वित्त एवं राजस्व विधान जायसवाल, सिटी मजिस्ट्रेट विनीत कुमार सिंह, नुमाइश बाबू पीयूष साराभाई मौजूद रहे। इन्होंने मां सरस्वती के समझ दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
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रंग बिरंगी रोशनी से नहाए कोहिनूर मंच को सुशोभित करते हुए मालिनी अवस्थी ने यहां मैं तो सोई रही सपनों में, मोपे रंग डार गओ नंनदलाल..., निमिया के डार मैया झुलेली झुलनवा..., मोहे पनिया पिलादे बालन..., लाली मौरे लाल की जित देखूं उत लाल, लाली देखन मैं चली मैं भी हो गई लाल... कव्वाली में उन्होंने आज रंग है ए मां रंग हरी... गाया।
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साथ ही उन्होंने अलीगढ़ के कव्वाल उस्ताद हबीब पेंटर को कव्वाली के माध्यम से मंच से नमन किया। उन्होंने अलीगढ़ को फागुनी रंग में रंगते हुए ‘रंगी सारी गुलाबी चुनरिया रे, मोहे मारी नजरिया संवरिया रे...’ गाया। वहीं, भोजपुरी में उन्होंने ‘रेलिया बैरन पिया को लिए जाए रे...’ गाया।
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अलीगढ़ से जुड़ीं यादों को किया ताजा
लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने अपने गीतों से तो श्रोताओं को झूमने पर मजबूर किया। साथ ही उन्होंने मंच से अलीगढ़ से जुड़ीं पुरानी यादों को ताजा किया। इस दौरान उन्होंने 20 साल पहले की नुमाइश से लेकर कोरोना काल और गोमती एक्सप्रेस तक के तजुर्बे तक को शेयर किया।
मालिनी अवस्थी ने कहा कि ब्रज मंडल में एक बार फिर से आकर बहुत खुश हूं। अलीगढ़ वासियों का बहुत-बहुत शुक्रिया। अलीगढ़ का नाम न होता तो शायद कार्यक्रम में आने के लिए भी हां न करतीं। 10 दिन पहले ही बेटे का विवाह हुआ है। अब सच्चे मायने में सास बनी हूं। जीवन भर सास-बहू के गाने गाए हैं। उन्होंने कहा भारत ने सदैव आक्रमण झेले हैं। कोरोना भी बायोकेमिकल अटैक है। हमारे पूर्वजों ने इस प्रकार के हमलों के लिए पहले ही इलाज के तौर पर काढ़े, नीम, तुलसी आदि को तलाश लिया था। कहा कि अलीगढ़ में 20 साल पहले इसी महोत्सव में कार्यक्रम हुआ था। उस समय इतना भव्य मंच नहीं हुआ करता था। उस समय मंच पर गाजल गायन किया था, श्रोता गजलों पर खूब झूमे थे। गोमती एक्सप्रेस के सफर को याद करते हुए कहा कि अलीगढ़ से दिल्ली जाने के लिए इस ट्रेन में दूधवाले चढ़ते थे। उनके साथ ही छात्र भी चढ़ते थे। उस समय ट्रेन में राजनीति की चर्चा होती थी। अलीगढ़ के पकवानों से भरे टिफिन जब ट्रेन के डिब्बों में खुलते थे तो अलग ही सुगंध आती थी।
मंडलायुक्त, आईजी ने किया शुभारंभ
मालिनी अवस्थी नाइट कार्यक्रम का शुभारंभ मंडलायुक्त गौरव दयाल, आईजी पीयूष मोर्डिया, डीएम चंद्रभूषण सिंह, सीडीओ अनुनय झा, एडीएम सिटी राकेश कुमार मालपाणी, एडीएम प्रशासन देवी प्रसाद पाल, एडीएम वित्त एवं राजस्व विधान जायसवाल, सिटी मजिस्ट्रेट विनीत कुमार सिंह, नुमाइश बाबू पीयूष साराभाई मौजूद रहे। इन्होंने मां सरस्वती के समझ दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।