Aligarh News: विजिलेंस के रडार पर आए दलाल, डीएम ने हटाए लेखपाल, राजस्व निरीक्षक भी हटाया
लेखपाल के रिश्वत लेते पकड़े जाने के बाद अलीगढ़ डीएम ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए जेल जाने के बाद निलंबित हुए लेखपाल सहित उसकी पत्नी व इलाके के दो अन्य लेखपालों का तबादला कर दिया है। साथ में एडीएम वित्त व एडीएम प्रशासन को इलाके में कैंप लगा कर बैनामा निस्तारण के निर्देश दिए हैं।
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अलीगढ़ एयरपोर्ट के रनवे विस्तार के लिए हो रहे भूमि अधिग्रहण में रिश्वतखोरी के आरोप में गिरफ्तार लेखपाल वाकई इस भ्रष्टाचार में अकेला था..? विजिलेंस के समक्ष भी यह बड़ा सवाल है। विजिलेंस जांच में सामने आ रहा है कि इलाके के कुछ दलाल दिन भर सक्रिय रहते थे। वे उन्हीं किसानों को अपना निशाना बनाते थे, जो गिरफ्तार लेखपाल के इलाके से बैनामे कराने आ रहे थे। उन दलालों की भूमिका की जांच विजिलेंस टीम द्वारा की जा रही है। डीएम ने बेहद सख्त रुख अपनाते जेल जाने के बाद निलंबित हुए लेखपाल सहित उसकी पत्नी व इलाके के दो अन्य लेखपालों का तबादला कर दिया है। साथ में एडीएम वित्त व एडीएम प्रशासन को इलाके में कैंप लगा कर बैनामा निस्तारण के निर्देश दिए हैं।
डीएम विशाख जी ने अलीगढ़ एयरपोर्ट इलाके में भूमि अधिग्रहण में हो रहे बैनामों को लेकर भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार लेखपाल नारायण प्रताप सिंह को निलंबित कर दिया है। विभागीय जांच बैठा दी है। नारायण प्रताप सिंह को निलंबन काल में अतरौली संबद्ध किया गया है। उसकी लेखपाल पत्नी दीपिका वार्ष्णेय को भी अतरौली भेजा गया है। इसी इलाके में तैनात लेखपाल उमेश चंद्र शर्मा व संजय तोमर को खैर स्थानांतरित किया गया है। काम देख रहे कानूनगो/राजस्व निरीक्षक पंकज गुप्ता का भी दूसरी तहसील में तबादला कर दिया गया है। राजस्व निरीक्षक को भी दोषी माना गया है। भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया व बैनामा प्रक्रिया को पूर्ण कराने के लिए एडीएम वित्त व एडीएम प्रशासन को गांवों में कैंप लगा कर निस्तारण के निर्देश दिए हैं, ताकि पूरी प्रक्रिया ईमानदारी से हो सके।
विजिलेंस की जांच का दायरा ये भी
भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार किए गए लेखपाल को लेकर जांच कर रही विजिलेंस के समक्ष कुछ अन्य तथ्य भी आए हैं। इनमें सबसे ज्यादा वे दो दलाल चर्चाओं में हैं, जो दिन भर तहसील में बैठे रहते थे। वे दोनों उन्हीं इलाकों के किसानों को रडार पर लेते थे, जिनके बैनामे हवाईपट्टी विस्तार के लिए होने होते थे। उनकी भूमिका क्या रहती थी। उनकी लेखपाल से क्या साठगांठ थी। उनके व लेखपाल के बीच कौन कौन अधिकारी शामिल रहते थे। इन तमाम सवालों के जवाब विजिलेंस अपनी जांच में तलाश रही है। यह भी जानने का प्रयास है कि यह रकम अकेले लेखपाल व दलालों के बीच बंटी या इसमें कुछ अन्य वरिष्ठ भी शामिल रहे।
एक बीघा जमीन ने खोला भ्रष्टाचार
इस मामले में जो शिकायत सामने आई है, उसके विषय में उजागर हुआ है कि किसान को जिस भूमि का पट्टा पूर्व में हुआ। उसको संक्रमणीय करा लिया गया। अब उसी जमीन का बैनामा हो रहा था। उसमें आवंटन से पहले एक नलकूप लगा हुआ था। लेखपाल उस नलकूप वाली जमीन को एक बीघा घटाकर रिपोर्ट देने की जिद पर अड़ा था। उसके बदले रिश्वत मांग रहा था। वहीं किसान का तर्क था कि जब उसे नलकूप सहित भूमि का पट्टा हुआ तो जमीन अब एक बीघा कम क्यों होगी। इसी विवाद में शिकायत विजिलेंस तक गई। जिसके बाद इसका खुलासा हुआ।