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अलीगढ़ : प्रोफेसर बुद्धसेन नीहार का देहांत, पंचतत्व में विलीन
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प्रोफेसर बुध सेन नीहार।
- फोटो : CITY OFFICE
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के हिंदी विभाग से सेवानिवृत्त प्रोफेसर बुद्धसेन नीहार (85) का मंगलवार को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वह कवि भी थे। उनका अंतिम संस्कार किशनपुर स्थित हरनाम मोक्षधाम में किया गया। अंतिम संस्कार में शहर के संभ्रांत लोग मौजूद रहे। बुलंदशहर के गांव ककरई में पंडित बिहारी लाल शर्मा के घर जन्मे प्रो. नीहार ने ब्रह्मांड को लेकर सैकड़ों कविताएं लिखीं।
उन्होंने हिंदी व अंग्रेजी में भी किताबें लिखीं, जिनमें ब्रह्मांड का संगीत ग्लोब, कविता समय समुद्र, हम नदी की मौत पर, अब कश्मीर बचाना होगा प्रमुख हैं। दो साल पहले प्रो. नीहार की पत्नी डॉ. चंद्रकांता शर्मा का निधन हो चुका है। प्रो. बुद्धसेन ने नीहार मीरा नेशनल सीनियर सेकेंडरी स्कूल की स्थापना की। प्रो. बुद्धसेन नीहार की बेटी कल्पलता चंद्रहास ने बताया कि पिताजी बचपन से ही काफी होशियार थे।
उन्होंने एएमयू में एमए हिंदी में गोल्ड मेडल प्राप्त किया था। एएमयू से कवि निराला पर पीएचडी की थी और यहीं शिक्षक हो गए थे। वह 1995-96 में सेवानिवृत्त हुए थे। एएमयू से पहले उन्होेंने चेन्नई (मद्रास) में हिंदी विषय पढ़ाया था। उनके कृतित्व व कृतित्व पर शोध हुआ है। निराला पर किए शोध को प्रकाशित किया गया, जो एमए पाठ्यक्रम में पढ़ाया जा रहा है। प्रो. नीहार अपने पीछे पुत्र अमिताभ नीहार, आकाश नीहार, पुत्री कल्पलता चंद्रहास, अनामिका शर्मा, गार्गी शर्मा सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए।
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साहित्यकारों ने जताया शोक
- प्रो. बुद्धसेन नीहार बहुत योग्य अध्यापक थे। दार्शनिक कवि थे। अच्छे इंसान थे। सबके प्रति सद्भाव रखते थे। मेरे गुरु थे। कवि निराला पर उनका विशेष अध्ययन और विशेष काम था। वह छात्र वत्सल थे। विद्यार्थियों से बहुत प्यार करते थे। अजातशत्रु थे। किसी के लिए उनके दिल में कोई द्वेष नहीं था। उनके जाने से हिंदी विभाग को गहरा दुख है। मेरी उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।
- प्रो. रमेशचंद, हिंदी, विभागाध्यक्ष एएमयू
प्रो. बुद्धसेन नीहार का विद्यार्थी रहा और उनका सहयोगी भी रहा। नीहार जी, बहुत आकर्षक व्यक्तित्व के स्वामी थे। विद्यार्थी जीवन में हम लोग उन्हें अभिनेता देवानंद कहते थे। वह अपने आपको सुव्यवस्थित रखते थे। विद्यार्थियों व साहित्यकारों के लिए उदार व्यक्ति थे। उनका लंबे समय तक जनवादी लेखक संघ से जुड़ाव रहा। उन्हें हार्दिक श्रद्धांजलि।
- डॉ. अजय बिसारिया, असिस्टेंट प्रोफेसर, हिंदी विभाग एएमयू
प्रो. बुद्धसेन नीहार से लगभग आधी सदी तक निकटता है। इसमें लेखराज से ग्रीन पार्क तक पहुंचने का, मीरा मांटेसरी से लेकर मीरा नीहार स्कूल तक का और प्रारंभिक रचनाओं से लेकर समस्त रचनाओं में पूरा दौर समाहित है। अध्यापक से सेवानिवृत्त प्रोफेसर तक। इसमें कितनी ही यादें इसके बीच में हैं। हिंदी साहित्य में हमसे अगली पीढ़ी का आखिरी स्तंभ ढह गया। शानदार, सौम्य व्यक्तित्व के धनी थे। वह जबर्दस्त मेहमान नवाज थे। अनेक अनगिनत अच्छी यादों के साथ विनम्र श्रद्धांजलि।
-डॉ. प्रेम कुमार, साहित्यकार
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उन्होंने हिंदी व अंग्रेजी में भी किताबें लिखीं, जिनमें ब्रह्मांड का संगीत ग्लोब, कविता समय समुद्र, हम नदी की मौत पर, अब कश्मीर बचाना होगा प्रमुख हैं। दो साल पहले प्रो. नीहार की पत्नी डॉ. चंद्रकांता शर्मा का निधन हो चुका है। प्रो. बुद्धसेन ने नीहार मीरा नेशनल सीनियर सेकेंडरी स्कूल की स्थापना की। प्रो. बुद्धसेन नीहार की बेटी कल्पलता चंद्रहास ने बताया कि पिताजी बचपन से ही काफी होशियार थे।
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उन्होंने एएमयू में एमए हिंदी में गोल्ड मेडल प्राप्त किया था। एएमयू से कवि निराला पर पीएचडी की थी और यहीं शिक्षक हो गए थे। वह 1995-96 में सेवानिवृत्त हुए थे। एएमयू से पहले उन्होेंने चेन्नई (मद्रास) में हिंदी विषय पढ़ाया था। उनके कृतित्व व कृतित्व पर शोध हुआ है। निराला पर किए शोध को प्रकाशित किया गया, जो एमए पाठ्यक्रम में पढ़ाया जा रहा है। प्रो. नीहार अपने पीछे पुत्र अमिताभ नीहार, आकाश नीहार, पुत्री कल्पलता चंद्रहास, अनामिका शर्मा, गार्गी शर्मा सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए।
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साहित्यकारों ने जताया शोक
- प्रो. बुद्धसेन नीहार बहुत योग्य अध्यापक थे। दार्शनिक कवि थे। अच्छे इंसान थे। सबके प्रति सद्भाव रखते थे। मेरे गुरु थे। कवि निराला पर उनका विशेष अध्ययन और विशेष काम था। वह छात्र वत्सल थे। विद्यार्थियों से बहुत प्यार करते थे। अजातशत्रु थे। किसी के लिए उनके दिल में कोई द्वेष नहीं था। उनके जाने से हिंदी विभाग को गहरा दुख है। मेरी उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।
- प्रो. रमेशचंद, हिंदी, विभागाध्यक्ष एएमयू
प्रो. बुद्धसेन नीहार का विद्यार्थी रहा और उनका सहयोगी भी रहा। नीहार जी, बहुत आकर्षक व्यक्तित्व के स्वामी थे। विद्यार्थी जीवन में हम लोग उन्हें अभिनेता देवानंद कहते थे। वह अपने आपको सुव्यवस्थित रखते थे। विद्यार्थियों व साहित्यकारों के लिए उदार व्यक्ति थे। उनका लंबे समय तक जनवादी लेखक संघ से जुड़ाव रहा। उन्हें हार्दिक श्रद्धांजलि।
- डॉ. अजय बिसारिया, असिस्टेंट प्रोफेसर, हिंदी विभाग एएमयू
प्रो. बुद्धसेन नीहार से लगभग आधी सदी तक निकटता है। इसमें लेखराज से ग्रीन पार्क तक पहुंचने का, मीरा मांटेसरी से लेकर मीरा नीहार स्कूल तक का और प्रारंभिक रचनाओं से लेकर समस्त रचनाओं में पूरा दौर समाहित है। अध्यापक से सेवानिवृत्त प्रोफेसर तक। इसमें कितनी ही यादें इसके बीच में हैं। हिंदी साहित्य में हमसे अगली पीढ़ी का आखिरी स्तंभ ढह गया। शानदार, सौम्य व्यक्तित्व के धनी थे। वह जबर्दस्त मेहमान नवाज थे। अनेक अनगिनत अच्छी यादों के साथ विनम्र श्रद्धांजलि।
-डॉ. प्रेम कुमार, साहित्यकार