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अलीगढ़ : भ्रष्टाचार में फंसे संविदाकर्मी ने दो अभियंताओं सहित चार पर कराया मुकदमा

Sun, 24 Jul 2022 12:45 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 24 Jul 2022 12:45 AM IST
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Aligarh: Contract worker trapped in corruption sued four including two engineers
बिजली विभाग में नियमित बाबू की ऑफिशियल आईडी का प्रयोग कर लाखों के बिल के हेरफेर में निकाले गए संविदाकर्मी ने अधीक्षण अभियंता सहित चार लोगों पर मुकदमा दर्ज कराया है। मुकदमे में नियम विरुद्ध निकाले जाने और विरोध पर अभद्रता करने का आरोप लगाया है। इसके अलावा कुछ गलत कृत्यों का भी उल्लेख मुकदमे में किया है। सिविल लाइंस पुलिस ने यह मुकदमा कोर्ट के आदेश पर दर्ज किया है।
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मुकदमा किशनपुर बैंक कॉलोनी के हरवीर सिंह उर्फ रिंकू की ओर से दर्ज कराया गया है, जिसमें विद्युत वितरण खंड द्वितीय के अधीक्षण अभियंता राघवेंद्र सिंह यादव, यहां पूर्व में तैनात (वर्तमान में झांसी में तैनात) एसडीओ ललितेश यादव, विभागीय लिपिक अनिल चौहान व रामवीर सिंह यादव को नामजद किया गया है।
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मुकदमे में आरोप है कि वह पिछले 14-15 वर्ष से विभाग में संविदा पर बतौर कंप्यूटर ऑपरेटर तैनात था। 26 अगस्त 2021 को उसे अधीक्षण अभियंता ने मौखिक आदेश देकर ठेका कंपनी से हटवा दिया, बकि पावर कॉरपोरेशन का आदेश है कि किसी संविदाकर्मी को बिना प्रबंध निदेशक के अनुमोदन के नहीं हटाया जाएगा।
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इसकी उसने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर शिकायत की और जब इन अधिकारियों से निकाले जाने का कारण जानना चाहा तो उसे धमकी देते हुए जाति सूचक शब्दों का प्रयोग किया। झूठे मुकदमे में जेल भिजवाने की धमकी दी।
मुकदमे में एसडीओ ललितेश यादव पर यहां तैनाती के दौरान बिना प्रस्ताव या अनुमति के दो किमी की विद्युत लाइन निजी नलकूपों तक लगाने का आरोप है, जिसमें रुपये लेकर लाइन लगाने का आरोप है। शिकायत पर प्रबंध निदेशक स्तर से कार्रवाई हुई तो शिकायतकर्ता सुमित ठाकुर पर शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बनाया गया।
मुकदमे में यह भी कहा गया है कि एक दिन गलती से उसने ललितेश यादव को व्हाट्स एप पर गुड मॉर्निंग मैसेज भेजा था, जो बाद में डिलीट कर दिया। उसकी शिकायत साइबर सेल में दर्ज कराई गई। अनिल चौहान ने अपने साथी से कार्यालय से रिकार्ड गायब कराया और मेरे व साथी सुमित पर मुकदमा दर्ज कराया। ये सभी कृत्य आरोपियों ने साजिश रचकर किए हैं। मजबूरन उसे न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
गंभीर आरोपों पर हटाया था, अब दबाव बनाने का प्रयास
अधीक्षण अभियंता राघवेंद्र सिंह यादव कहते हैं कि हरवीर उर्फ रिंकू 2018 से संविदा ऑपरेटर था। उसके खिलाफ भ्रष्टाचार की तमाम शिकायतें थीं। वह सुमित की मदद से रुपये वसूली करता था। इन्हीं शिकायतों पर उसे हटाया गया था। रहा सवाल एसडीओ ललितेश यादव पर आरोप का तो वह जांच में दोषी पाया गया, उससे रिकवरी हुई और कार्रवाई हुई।
उस प्रकरण का इससे कोई लेना देना नहीं है। इसके अलावा, रिंकू पर बाबू अनिल चौहान की ऑफिशियल आईडी का इस्तेमाल कर उपभोक्ताओं के बिल में लाखों का हेरफेर का आरोप लगा। शिकायत पर खुद अनिल चौहान ने रिंकू व उसके साथी सुमित पर मुकदमा दर्ज कराया था। चूंकि, रिंकू अनिल की मदद करता था।
इसलिए उस पर विश्वास कर यह आईडी दी थी। ललितेश यादव ने भी एक साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके अलावा, फर्जी आईडी बनाकर इन दोनों ने अधिकारियों की झूठी शिकायतें कीं। अब दबाव बनाने के लिए यह मुकदमा दर्ज कराया गया है। मुझे महज इसलिए शामिल किया है कि मुझ से नौकरी पर वापसी का अनुरोध किया था। इस पर मैंने इन्कार कर दिया।

- इस प्रकरण में बाबू की तहरीर पर पहले से हरवीर व सुमित पर मुकदमा दर्ज है। बाकी अब अदालत के आदेश पर हरवीर की तहरीर पर यह मुकदमा दर्ज किया गया है। दोनों मामलों की जांच की जा रही है। जांच के आधार पर जो तथ्य सामने आएंगे कार्रवाई की जाएगी।
- श्वेताभ पांडेय, सीओ तृतीय
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