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भाई की कलाई पर सजेगी जय शनिदेव की रंग- बिरंगी राखियां

Sun, 07 Aug 2022 12:00 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 07 Aug 2022 12:00 AM IST
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Aligarh: Colorful rakhis of Jai Shanidev will be decorated on brother's wrist
अतरौली क्षेत्र के नगला खैराबाद में राखियां तैयार करती स्वयं सहायता समूह की महिलाएं। अमर उजाला - फोटो : CITY OFFICE
भाई- बहन के अटूट स्नेह बंधन के प्रतीक रक्षाबंधन पर इस बार भाइयों की कलाई पर चीन निर्मित राखी नहीं बंधेंगी। उनके स्थान पर ग्रामीणों क्षेत्र के स्वयं सहायता समूह की ओर से निर्मित जय शनिदेव तथा अन्य रंग - बिरंगी राखियां सजेंगी। बाजार में इन राखियों की अच्छी मांग है।
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खास बात यह है कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिला स्वयं सहायता समूह के माध्यम से इन्हें तैयार किया गया है। ऐसे में स्वनिर्मित राखियों की खरीदारी से जहां एक ओर मेक इन इंडिया को बल मिलेगा, वहीं इन जरूरतमंद महिलाओं के परिवार की आजीविका के लिए मददगार होंगी।
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पर्यावरण को सुरक्षित रखने का संकल्प
अतरौली ब्लॉक के नगला खेराबाद ग्राम पंचायत में जय शनिदेव स्वयं सहायता समूह की महिलाएं पहली बार देसी एवं आकर्षक राखियां तैयार कर रहीं हैं। सरकार द्वारा भी स्वरोजगार के लिए अनुदान मिलता है। इसी अनुदान की मदद से समूह की महिलाएं राखी तैयार कर स्वदेशी अभियान में योगदान देने का काम कर रही हैं।
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समूह में शामिल महिलाओं द्वारा तैयार की गईं फैंसी कलावा, स्टोन मोती, चंदन के अलावा टेराकोटा की राखियां इस बार रक्षाबंधन पर बहनें भाइयों को बांधेंगी। उसमें पर्यावरण को सुरक्षित रखने का संकल्प भी होगा। यह संकल्प टेराकोटा की राखियां पूरी करेंगी। राखी खरीदकर पर्यावरण संरक्षण की ओर कदम बढ़ाने के साथ ही शिल्पकारों को और स्वावलंबी बनाने की दिशा में तेजी से काम चल रहा है।
पहली बार में हो रही अच्छी आमदनी
समूह की अध्यक्ष अल्का वर्मा एवं सखी सुमन लता ने बताया कि उनके समूह में 12 महिलाएं शामिल हैं। जो प्रति माह रुपया इकठ्ठा करतीं हैं। इन्हीं रुपयों के अलावा सरकारी अनुदान से पहली बार राखी बनाने का काम शुरू किया है।
मेक इन इंडिया को मजबूती देने के लिहाज से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) की ओर से समूह की महिलाओं को डिस्ट्रिक्ट मिशन मैनेजर (डीएमएम) मोहम्मद असलम के नेतृत्व में बकायदा प्रशिक्षित किया गया है। तैयार होने वाली देसी राखियों को बाजार में दुकानदारों को उपलब्ध कराया गया है। स्वदेशी राखियों की बाजार में काफी मांग है। इससे पूरा समूह उत्साहित है।

- महिलाओं को आत्म निर्भर बनाने के लिए स्वयं सहायता समूहों का गठन किया गया है। इसका सुखद परिणाम भी सामने आ रहा है। महिलाएं समूह के रूप में कार्य करते हुए लगातार बेहतर काम कर रही हैं। इससे उनकी आय तो बढ़ेगी ही, वे आत्मनिर्भर भी बन सकेंगी।
- भालचंद्र त्रिपाठी, उप आयुक्त एनआरएलएम
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