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Aligarh: मंडल के बंद पड़े 275 ईंट भट्ठों को राहत, फिर से हो सकेंगे शुरू, 25 हजार से ज्यादा को मिलेगा रोजगार

Sat, 31 Jan 2026 04:58 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Sat, 31 Jan 2026 04:58 PM IST
सार

लखनऊ में हुई कैबिनेट की मीटिंग में नई गाइडलाइन जारी की गई है। अब सेल्स टैक्स, खनन और जिला पंचायत में पंजीकृत ईंट भठ्ठों को पुरानी गाइड लाइन के अनुसार संचालन की अनुमति दी जाएगी, ऐसे में जिले में बंद पड़े ईंट भट्ठा संचालकों को राहत मिलेगी।

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Aligarh closed brick kilns restart
अकराबाद में स्थित ईंट-भट्ठा - फोटो : संवाद

विस्तार

यूपी सरकार के नए फैसले से मंडल के बंद पड़े लगभग 275 ईंट भट्ठों को संजीवनी मिल सकती है। भट्ठों के साथ-साथ करीब 25 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार भी मिलेगा। यह भट्ठे कई साल से बंद चल रहे थे। इस कारण संचालकों को भी भारी नुकसान हो रहा था। इसके साथ ही ईंटों की कीमतों पर भी असर पड़ रहा था।

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ईंट भट्ठा स्थापना नियमावली जून 2012 लागू होने के बाद कई ईंट भट्ठों पर इसका प्रभाव पड़ा था। सरकार के नए नियम के तहत राज्य प्रदूषण बोर्ड से संचालन के लिए सहमति प्राप्त न होने वाले 2012 के पहले स्थापित ईंट भट्ठों को प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने बंद करा दिया था, जिसमें मंडल के करीब 275 ईंट भट्ठे बंद हुए थे। इनमें सबसे अधिक अलीगढ़ और सबसे कम कासगंज के हैं। लखनऊ में हुई कैबिनेट की मीटिंग में नई गाइडलाइन जारी की गई है। अब सेल्स टैक्स, खनन और जिला पंचायत में पंजीकृत ईंट भठ्ठों को पुरानी गाइड लाइन के अनुसार संचालन की अनुमति दी जाएगी, ऐसे में जिले में बंद पड़े ईंट भट्ठा संचालकों को राहत मिलेगी।

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सरकार का यह फैसला ईंट भट्ठा उद्योग के हित में है। इससे व्यापारियों का शोषण कम होगा और सरकार को राजस्व भी प्राप्त होगा। साथ ही रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।-हेमेंद्र चौधरी, सचिव, अलीगढ़ ईंट निर्माता समिति

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सरकार ने ईंट उद्योग के क्षेत्र में बड़ा फैसला लिया है। आदेशों के अनुसार कार्य किया जाएगा। इससे बंद पड़े करीब 275 ईंट भट्ठों को राहत मिलेगी।-विश्वनाथ शर्मा, आरओ, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

एक मार्च से शुरू होगा ईंट भट्ठों का संचालन

ईंट-भट्ठा एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष ठाकुर जनक पाल सिंह ने बताया कि जिले में इस समय करीब 500 ईंट-भट्ठों से ईंटों का उत्पादन होता है, लेकिन अभी भी किसी में कार्य शुरू नहीं हुआ है। गंगीरी क्षेत्र के पचौरी ईंट उद्योग के दीपू पचौरी और बजरंग ईंट उद्योग के संचालक विजय अग्रवाल ने बताया कि ईंट-भट्ठों पर इस समय ईंट पथाई की जा रही है। एक ईंट भट्ठे पर सभी कार्यों के लिए 100 से 120 लोगों को विभिन्न प्रकार के कार्यों में लगने से रोजगार मिलता है। जिले में लगभग चार माह ही ईंटों का उत्पादन होता, इसके बाद बारिश होने पर कार्य बंद हो जाता है, फिर प्रशासनिक अनुमति नहीं मिलती है। 15 फरवरी से भट्ठों में ईंट लगाने का काम शुरू कर दिया जाएगा और एक मार्च तक उन्हें पूरा कर भट्ठों में आग डाली जाएगी।

यह हुए मुख्य बदलाव

  • 2012 से पहले बने उन भट्ठों जिनके पास प्रदूषण विभाग की एनओसी नहीं थी, उन्हें वैध माना जाएगा, लेकिन उन्हें जिला पंचायत, वाणिज्य कर और खनन विभाग के उससे पहले के दस्तावेज दिखाने होंगे।
  • जिग-जैग तकनीक का अनिवार्य इस्तेमाल बरकरार रखा गया है। बाग, स्कूल और बस्तियों से ईंट भट्ठों को 800 मीटर की दूरी बनाए रखनी होगी। पहले यह सीमा एक किलोमीटर थी।
  • ईंट भट्ठों के चारों ओर 10 मीटर की हरित पट्टी बनानी होगी। धूल रोकने के लिए पानी का छिड़काव किया जाना अनिवार्य किया गया है। निगरानी के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक समिति बनाई जाएगी।
  • दो ईंट भट्ठों के बीच की दूरी अब एक किलोमीटर होगी। पहले यह 800 मीटर थी। ईंट भट्ठा लगाने के लिए कम से कम दो एकड़ क्षेत्रफल होना जरूरी होगा। चिमनी की ऊंचाई और धुएं के उत्सर्जन मानक भी तय किए गए हैं।
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