दिल्ली से जहरीली हवा: धूल-धुएं और स्मॉग में घुट रहा अलीगढ़, एक्यूआई 731 पर पहुंचा
सर्दी बढ़ने के साथ हवा की रफ्तार कम हो जाती है और वातावरण में नमी बढ़ती है। ऐसे में धूल, धुआं और प्रदूषक कण वातावरण में ही जमा रहने लगते हैं। धीरे-धीरे शहर के ऊपर प्रदूषण की एक परत बन जाती है।
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अलीगढ़ की हवा अब दिल्ली से भी ज्यादा प्रदूषित हो गई है। हवा में घुले धूल और धुएं के कणों ने लोगों के लिए सांस लेना मुश्किल कर दिया है। एक्यूआई डॉट इन के मुताबिक शुक्रवार सुबह 9:30 बजे शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 731 तक पहुंच गया, जबकि इसी दौरान दिल्ली का अधिकतम एक्यूआई 728 दर्ज किया गया।
पांच नवंबर से छह नवंबर की सुबह तक अलीगढ़ का प्रदूषण स्तर लगातार 500 से ऊपर बना रहा। सुबह और शाम के समय धुंध की चादर दिखाई दे रही है। आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में परेशानी जैसी शिकायतें भी बढ़ रही हैं। एएमयू के भूगोल विभाग के पूर्व वैज्ञानिक प्रो. अतीक अहमद के अनुसार, धुंध बढ़ने के पीछे केवल मौसम में बदलाव नहीं, बल्कि प्रदूषण और प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों का संयुक्त प्रभाव है।
सर्दी बढ़ने के साथ हवा की रफ्तार कम हो जाती है और वातावरण में नमी बढ़ती है। ऐसे में धूल, धुआं और प्रदूषक कण वातावरण में ही जमा रहने लगते हैं। धीरे-धीरे शहर के ऊपर प्रदूषण की एक परत बन जाती है। उन्होंने बताया कि रात में जमीन के नजदीक की हवा ठंडी हो जाती है, जबकि उसके ऊपर अपेक्षाकृत गर्म हवा की परत रहती है। इसे तापमान का उलटाव (इनवर्जन) कहते हैं। गर्म हवा की यह परत ढक्कन की तरह काम करती है और प्रदूषकों को ऊपर जाने से रोकती है। हवा की गति कम होने पर धूल और जहरीले कण लंबे समय तक वातावरण में बने रहते हैं।
यहां प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का अपना वायु गुणवत्ता मापन केंद्र नहीं है। निगरानी के लिए एएमयू के आंकड़ों पर निर्भरता है।-डॉ. विश्वनाथ शर्मा, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
निर्माण कार्यों से भी बढ़ रही धूल
शहर में जगह-जगह चल रहे सड़क निर्माण, भवन निर्माण, खोदाई और खुले स्थानों पर जमा मिट्टी से उड़ने वाली धूल भी प्रदूषण बढ़ा रही है। रामघाट रोड समेत कई निर्माणाधीन इलाकों में वाहन गुजरने के साथ धूल दोबारा हवा में घुल रही है। बारिश बंद होने के बाद सड़कों पर जमा धूल की मात्रा बढ़ने से स्थिति और खराब हो रही है।
वाहनों और उद्योगों का धुआं भी जिम्मेदार
शहर में डीजल और पेट्रोल वाहनों से निकलने वाला धुआं, औद्योगिक इकाइयों का उत्सर्जन, घरेलू ईंधन और खुले में कचरा जलाना भी प्रदूषण के प्रमुख स्रोत हैं। सामान्य दिनों में इनका असर उतना स्पष्ट नहीं दिखता, लेकिन सर्दियों में हवा की रफ्तार कम होने और तापमान में बदलाव के कारण प्रदूषक वातावरण में ही फंसे रह जाते हैं।
सबसे अधिक प्रदूषित क्षेत्र
रामघाट रोड पीएसी, क्वार्सी चौराहा, बन्ना देवी नुमाइश मैदान, आईटीआई रोड, सासनी गेट औद्योगिक क्षेत्र, एटा चुंगी, सारसौल चौराहा, गड़िया एलमपुर, बरौला बाईपास, फिरदौस नगर, एएमयू किला रोड, देहली गेट, लाल मस्जिद, रोरावर, भुजपुरा, मथुरा रोड
क्या कहता है एएमयू का मापन
एएमयू के सिविल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में लगे वायु प्रदूषण मापक यंत्र में पीएम-10 की मात्रा 194.9, पीएम-2.5 की मात्रा 60.69, सल्फर डाई आक्साइड 24.50 और नाइट्रोजन डाईआक्साइड 303.35 प्रति घनमीटर तक दर्ज हुई है। अगर वातावरण साफ सुथरा हो तो पीएम-10 की मात्रा 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर या इससे कम, पीएम-2.5 की मात्रा 60 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर, नाइट्रोजन डाईऑक्साइड 80 और सल्फर डाईऑक्साइड 80 माइक्रोग्राम या इससे कम होनी चाहिए। अलीगढ़ में पीएम-10, पीएम 2.5 और नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ी हुई मिल रही है। जिससे वायु प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है