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अलीगढ़ : ‘अजीब बच्ची’ की देखभाल करना डॉक्टरों के लिए चुनौती
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विष्णुपुरी स्थित वरुण हास्पिटल में जन्मी अजीब बच्ची की देखभाल डॉक्टरों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। चिकित्सक उसे बचाने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं। फिलहाल, नवजात अभी ठीक है। उसे मां का दूध दिया जा रहा है।
कासगंज के गंजडुंडवारा निवासी एक 35 वर्षीय महिला ने ऑपरेशन के बाद शनिवार को वरुण हास्पिटल में नवजात को जन्म दिया था। चिकित्सक डॉ. मणि भार्गव का कहना है कि बच्ची की त्वचा छूने पर क्रैक हो रही है। आंखें लाल, बड़ी-बड़ी और हमेशा खुली रहती हैं। त्वचा पर दवा लगाई जा रही है और अन्य दवाएं नली के माध्यम से दी जा रही है। मां का दूध भी नली के माध्यम से दिया जा रहा है। उनका कहना है कि वह इस संबंध में जेएन मेडिकल कॉलेज व दूसरे संस्थान के चिकित्सकों से बातचीत करेंगी। कुछ बात हुई भी है। बच्ची को देखकर परिजन भी परेशान हैं। सबसे बड़ी समस्या नवजात की देखभाल को लेकर है। गांव में देखभाल मुश्किल है। इंफेक्शन का खतरा है।
उनका कहना है कि एम्स या दूसरे संस्थान या नर्सिंगहोम में नवजात को रखा जा सकता है। लेकिन अंतिम निर्णय परिजनों को ही लेना है। परिजन उसे लेकर गांव नहीं जाना चाहते हैं।
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कासगंज के गंजडुंडवारा निवासी एक 35 वर्षीय महिला ने ऑपरेशन के बाद शनिवार को वरुण हास्पिटल में नवजात को जन्म दिया था। चिकित्सक डॉ. मणि भार्गव का कहना है कि बच्ची की त्वचा छूने पर क्रैक हो रही है। आंखें लाल, बड़ी-बड़ी और हमेशा खुली रहती हैं। त्वचा पर दवा लगाई जा रही है और अन्य दवाएं नली के माध्यम से दी जा रही है। मां का दूध भी नली के माध्यम से दिया जा रहा है। उनका कहना है कि वह इस संबंध में जेएन मेडिकल कॉलेज व दूसरे संस्थान के चिकित्सकों से बातचीत करेंगी। कुछ बात हुई भी है। बच्ची को देखकर परिजन भी परेशान हैं। सबसे बड़ी समस्या नवजात की देखभाल को लेकर है। गांव में देखभाल मुश्किल है। इंफेक्शन का खतरा है।
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उनका कहना है कि एम्स या दूसरे संस्थान या नर्सिंगहोम में नवजात को रखा जा सकता है। लेकिन अंतिम निर्णय परिजनों को ही लेना है। परिजन उसे लेकर गांव नहीं जाना चाहते हैं।
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