फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   Aligarh: 15 August 1947... Ghee lamps were lit from house to house, celebration was celebrated

अलीगढ़ : 15 अगस्त 1947... घर-घर जले थे घी के दीये, मना था जश्न

Mon, 08 Aug 2022 12:22 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 08 Aug 2022 12:22 AM IST
विज्ञापन
Aligarh: 15 August 1947... Ghee lamps were lit from house to house, celebration was celebrated
आजादी का अमृत महोत्सव के तहत रामघाट रोड तिरंगा यात्रा निकालते होमगार्ड कर्मी । अमर उजाला - फोटो : CITY OFFICE
इकराम वारिस, अलीगढ़।
विज्ञापन

15 अगस्त 1947...अंग्रेजों की गुलामी से मुक्ति और खुले आसमां में सांस लेने का दिन था। हर तरफ उल्लास, उमंग और नई ऊर्जा का संचार हो रहा था। उस दिन एक नए और स्वतंत्र भारत का उदय हुआ था। अलीगढ़ समेत पूरा भारत आजादी के जश्न में डूबा रहा। यह कहना है 15 अगस्त 1947 के उस स्वर्णिम दिन को देख चुके अलीगढ़ शहर के बुजुर्गों का।
उन्होंने बताया कि अलीगढ़ में इस ऐतिहासिक दिन को बड़े ही अभूतपूर्व ढंग से मनाया गया। जगह जगह सजावट की गई थी। घर-घर घी के दीये जलाए गए थे। खादी के तिरंगे फहराए गए थे। स्कूल और कॉलेज में अलग ही उत्साह का संचार हो रहा था। एएमयू में भी माहौल बदला हुआ था।
विज्ञापन

हर तरफ बधाइयों का दौर चल रहा था। देश की आजादी के अगुवा रहे ठा. मलखान सिंह, ज्वाला प्रसाद जिज्ञासु, ठा. टोडर सिंह, नंद कुमार वशिष्ठ, ख्वाजा अब्दुल मजीद ने सभाओं को संबोधित किया। बुजुर्गों ने बताया कि वह भी आजादी के जश्न में हाथों में तिरंगा लेकर सड़कों पर खूब दौड़े थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

आजादी का दिन देखा, अब 75वां साल भी : उवैस
महानगर के पठान मोहल्ला निवासी उवैस मोहम्मद खान (84) बताते हैं कि आजादी से पहले की कहानी सुनकर दिल दुखता था। भारत की जनता पर अंग्रेजों ने बहुत जुल्म किए थे, लेकिन जब देश आजाद हुआ तो वह दृश्य अविस्मरणीय था। लोग उत्साह से भर गए थे। आंखों में आजादी की खुशी के आंसू थे।
लोग हाथों में तिरंगा लेकर घर से निकलते थे। उस वक्त काजीपाड़ा में स्थित एएमयू सिटी गर्ल्स स्कूल में बड़ा आयोजन किया गया था, जिसमें आजादी का जश्न मनाया गया था। उस वक्त उनकी उम्र कम थी, लेकिन उस जश्न के हिस्सा थे। यह उनका सौभाग्य है कि आजादी के 75 साल बाद देश भर में मनाए जा रहे जश्न के गवाह बनने जा रहे हैं।
उत्सव जैसे माहौल का बना था हिस्सा : धर्मेंद्र
महानगर के खिनीगेट निवासी धर्मेंद्र कुमार जैन (83) कहते हैं कि जब देश आजाद हुआ था, उस वक्त उनकी उम्र 8 साल की थी, वह हाथरस में रहते थे। देश की आजादी की लड़ाई की कहानी अपने पिताजी से सुना करते थे, लेकिन जब 15 अगस्त 1947 को देश अंग्रेजों से आजाद हुआ तो देश भर में जश्न का माहौल था।
अलीगढ़ जिले में भी जश्न था। सड़कों पर लोग हाथों में तिरंगा लेकर निकल पड़ थे। उन्हें उस वक्त यह तो नहीं पता था कि आजादी का मतलब क्या होता है, लेकिन उत्सव जैसे माहौल में वह भी उसका हिस्सा बने थे। आज भी वह दृश्य आंखों के सामने घूमने लगता है। उस वक्त न कोई हिंदू था, न मुसलमान था। सभी हिंदुस्तानी थे।
कई दिनों तक चला था आजादी का जश्न : नरेंद्र
महानगर के ज्ञान सरोवर निवासी नरेंद्र मोहन सक्सेना (86) ने बताया कि आजादी का जश्न आज भी याद है। 15 अगस्त 1947 को देश में एक तरफ खुशी का माहौल था तो दूसरी तरफ अराजकता का भी माहौल था। मुसलमान पाकिस्तान की तरफ भाग रहे थे तो हिंदू शरणार्थी बनकर हिंदुस्तान आ रहे थे, लेकिन आजादी का जश्न अपने पूरे जोश में था।

उस समय लोगों ने घरों में तिरंगे लगाए थे। वह भी सड़क पर झंडे लेकर दौड़े थे। सबके हाथों में तिरंगा था। आजादी के जश्न में पूरा हिंदुस्तान डूबा था। आजादी का जश्न केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कई दिनों तक चलता रहा है। उस वक्त सभी लोगों में अलग ही खुशी थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed