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प्राइवेट अस्पतालों के एजेंट का खेल: आप तो मरीज को ले आओ.. हम तो मर्दे में भी जान डलवा देंगे

Sat, 21 Jun 2025 10:57 AM IST
चमन शर्मा दीपक शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़
दीपक शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Sat, 21 Jun 2025 10:57 AM IST
सार

अलीगढ़ में प्राइवेट अस्पतालों के कमीशन एजेंट का खेल जोरों पर चल रहा है। मेडिकल में मरीज के तीमारदार को एजेंट कहते हैं कि जब मेडिकल के डॉक्टर कहते हैं कि मरीज में कुछ नहीं है घर ले जाओ और हम उन्हें अच्छे अस्पतालों में भर्ती कराते हैं और वहां मरीज ठीक हो जाते हैं। 

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Agents of private hospitals in Aligarh
जेएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी के बाहर बैठे मरीज के तीमादार व प्राइवेट एम्बुलेंस - फोटो : संवाद

विस्तार

एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज में कुछ प्राइवेट अस्पतालों के एजेंट दिन रात घूमते हैं। मरीज पहुंचा नहीं कि घेर लेंगे। पहले बीमारी पूछेंगे और फिर अच्छे अस्पताल से लेकर रोग के विशेषज्ञ डॉक्टर तक का नाम बता देंगे। मेडिकल कालेज के डॉक्टरों और व्यवस्थाओं में तमाम खामियां गिनाते हुए अपने पसंद के अस्पताल की मार्केटिंग भी शुरू कर देंगे। 

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अमर उजाला की टीम ने जब एक 85 वर्षीय बुजुर्ग के बीमार होने और मेडिकल कालेज के चिकित्सकों द्वारा जवाब दे देने की बात एजेंट को बताई तो उसने साफ कहा कि हर रोज ऐसे गंभीर मामले आते हैं जब मेडिकल के डॉक्टर कहते हैं कि मरीज में कुछ नहीं है घर ले जाओ और हम उन्हें अच्छे अस्पतालों में भर्ती कराते हैं और वहां मरीज ठीक हो जाते हैं।
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वक्त: 1-40 का। अमर उजाला की टीम जेएन मेडिकल कॉलेज पहुंची। यहां एक 85 वर्षीय बुजुर्ग के तीमारदार बनकर इन एजेंटों से बात की। इनसे कहा कि बुजुर्ग के इलाज के लिए डॉक्टर मना कर रहे हैं। उन्होंने जवाब दे दिया है और कह रहे हैं कि घर जाकर सेवा करो। 

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प्रस्तुत है एजेंट और रिपोर्टर की बातचीत के अंश ( बातचीत की रिकार्डिंग हमारे पास मौजूद है)

मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी के सामने ही प्राइवेट एंबुलेंस के आसपास लोग खड़े हैं। पास में बैठे तीमारदारों से पूछा कि एंबुलेंस का ड्राइवर कहा हैं। एक व्यक्ति ने एक एंबुलेंस पर लिखे नंबर की ओर इशारा करके कहा, यह लिखा है मिला लें
(नंबर मिलाने के बाद बातचीत)


रिपोर्टर- 85 वर्षीय बुजुर्ग हैं, सांस उखड़ रही है। यहां (मेडिकल कॉलेज) में मना कर दिया है। प्राइवेट में ले जाना है। एंबुलेंस मिलेगी
एजेंट- अंदर एक काउंटर बना है। वहां चले जाएं, कोई मिल जाएगा
(फोन रखे हुए अभी दो मिनट भी नहीं हुए दो युवक उसी एंबुलेंस के पास आ गए)
एजेंट- आप ही ने फोन लगाया था क्या
रिपोर्टर- हां, 85 वर्षीय बुजुर्ग हैं। प्राइवेट में ले जाना है। यहां डॉक्टर कह रहे हैं घर ले जाएं
एजेंट - देखो भाईसाब, रामघाट रोड वाले में ले जाओगे तो कम से कम 25 हजार रुपये आईसीयू एक दिन का होगा। जांच का खर्चा अलग से। यहां ( केला नगर और धौर्रा के तीन चार आसपास के प्राइवेट हॉस्पिटल के नाम लिए ) हैं। किसी में भी चलो 5 से 7 हजार के बीच काम हो जाएगा। मरीज भी चंगा हो जाएगा।
रिपोर्टर- यहां पर कौन डॉक्टर देखेंगे।
एजेंट- मेडिकल के डॉक्टर हैं। जो यहां हैं वही वहां भी देखेंगे।
रिपोर्टर- इसका खर्चा अलग से होगा क्या
एजेंट- नहीं, 6 हजार रुपये एक दिन के हैं। डॉक्टर का खर्चा भी इसी में शामिल है। आपको बस दवाएं अलग से लेनी हैं।
रिपोर्टर- ठीक है हम परिवार के अन्य लोगों से बात कर लेते हैं।
(10 मिनट इमरजेंसी में अंदर वेटिंग रूम में बिताने के बाद बाहर आने पर वही दो एजेंट मिल जाते हैं)
एजेंट - हां तो भाईसाहब बताओ
रिपोर्टर- कोई छिपा हुआ खर्चा तो नहीं है पहले अपने वाले हॉस्पिटल से बात कर लो
(एजेंट रिपोर्टर के साथी के मोबाइल से हॉस्पिटल मैनेजर का नंबर लगाता है। कॉल रिसीव होने पर फोन एजेंट को थमा दिया गया।)
एजेंट (फोन पर) - बबलू बोल रहा हूं.
मैनेजर (फोन पर)- हां क्या केस है
एजेंट (फोन पर मैनेजर से)- इनका मरीज है। 6 हजार रुपये बताए हैं। एएमयू के डॉ. .... हैं, यही दखेंगे। बता दिया है।
(इसी तरह एजेंट ने एक और निजी हॉस्पिटल के मैनेजर से बात कराई, दोनों ही जगह कहा मरीज को ले आएं। एक जगह 5600 रुपये एक दिन का और एक जगह 6 हजार रुपये एक दिन का खर्चा बताया गया)

हम जानते हैं एजेंटों की समस्या गंभीर है : चिकित्सा अधीक्षक

जेएन मेडिकल कॉलेज अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. अमजद रिजवी कहते हैं कि हमें पता है कि एंबुलेंस एजेंट की समस्या गंभीर है। हमने इनके प्रवेश पर रोक लगाई। गार्ड बैठाए। एंबुलेंस मरीज लेकर आएं तो टीक लेकिन वहां खड़े होकर मरीज के तीमारदारों को प्रभावित करना बहुत गलत है। हमने इन एंबुलेंस के लिए जकरिया के पास खड़े होने की व्यवस्था की जिससे यह इमरजेंसी से दूर रहें। अब देखेंगे कि इस समस्या के लिए और क्या कर सकते हैं। प्रॉक्टर कार्यालय और पुलिस प्रशासन से भी वार्ता करेंगे।

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