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छात्रों की रहनुमाई के बाद बिखेरी जहां में रोशनी
ब्यूूराे, अमर उजाला, अलीगढ़।
Updated Thu, 07 Dec 2017 02:02 AM IST
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आजम खां
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय छात्र संघ कौम की आवाज है। टकसाल से निकले सिक्कों की कीमत मुकर्रर है। लेकिन सर सैयद की इस टकसाल से निकले सिक्के अनमोल एवं बेमिसाल हैं। इनकी रोशनी में कौम के नसीब की सियाही धुल जाती है। छात्र संघ ने देश एवं दुनिया को एक से बढ़कर एक नेता, अधिकारी, साहित्यकार, वैज्ञानिक एवं वैश्विक स्तर के बेहतर इंसान दिए हैं।
1884 में बना सिड्डन यूनियन क्लब 1920 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय बनने के बाद छात्र संघ (एएमयूएसयू) में तब्दील हो गया। 1918 में सिड्डन यूनियन क्लब के उपाध्यक्ष जाकिर हुसैन थे, जो बाद में भारत के राष्ट्रपति बने। छात्र संघ बनने के बाद पहले अध्यक्ष केएम खुदाबख्श बने। एएमयू उर्दू अकादमी के निदेशक डॉ. राहत अबरार ने बताया कि 1924-25 में केजी सैयदैन अध्यक्ष बने, जो बाद में भारत सरकार में शिक्षा सचिव रहे। 1925-26 के अध्यक्ष कुंवर अशरफ अली खान मशहूर इतिहासकार हुए। 1934-35 के अध्यक्ष आले अहमद सुरूर भारतीय उपमहाद्वीप के बहुत बड़े उर्दू साहित्यकार बने। उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया गया।
1941-42 के अध्यक्ष अजीजुर्रहमान उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री बने। 1946-47 के अध्यक्ष एटीएम मुस्तफा आईएएस अधिकारी बने। 1953-54 में दक्षिण अफ्रीका के मो. अमीन बुलबुलिया एएमयू छात्र संघ के अध्यक्ष बने थे। 1958-59 में अध्यक्ष बने आबिदउल्ला गाजी हावर्ड यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर बने और प्रमुख इस्लामी विद्वान है। 1962-63 के अध्यक्ष अनीस उर शेरमानी छर्रा से विधायक एवं उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री बने। 1963-64 के अध्यक्ष वसीर अहमद खान इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के पीवीसी बने। 1967-68 के अध्यक्ष मो. अदीब राज्य सभा सांसद बने। 1972-73 के अध्यक्ष आरिफ मोहम्मद खान उत्तर प्रदेश एवं केंद्र में मंत्री बने। 1989-90 के अध्यक्ष हाफिज मोहम्मद उस्मान सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन बने और वर्तमान में राज्य सूचना आयोग के चेयरमैन हैं। 2006-07 के अध्यक्ष नफीस अहमद उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री बने। अभी विधायक हैं। 1972-73 में एएमयू छात्र संघ के सचिव रहे आजम खां उत्तर प्रदेश के मंत्री बने। वर्तमान में विधायक हैं।
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अलीगढ़ के वर्तमान मेयर मो. फुरकान एएमयू के उपाध्यक्ष एवं अध्यक्ष रह चुके हैं। 1980-81 में सचिव निर्वाचित हुए मोहम्मद अली अशरफ फातिमी बाद में केंद्रीय राज्य मंत्री बने। वहीं डॉ. मैराजुद्दीन उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री बने। इनके अलावा पूर्व दर्जा प्राप्त मंत्री खालिद मसूद भी एएमयू छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे हैं।
एएमयू के बारे में ये कहा था पूर्व राष्ट्रपति ने
एएमयू सार्वभौमिक एवं बहु संस्कृति वादी राष्ट्रीयता का सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां विभिन्न धर्मों, जातियों, भाषाओं तथा क्षेत्रों के छात्र एवं शिक्षक एकसाथ मिल-जुलकर रहते हुए सहकारिता तथा सहयोग की उच्च परंपरा के अंतर्गत देश को आगे बढ़ाने में प्रयासरत हैं। - प्रणब मुखर्जी, पूर्व राष्ट्रपति (17 अक्तूबर 2017 को एएमयू में आए थे, तब यह बात कही थी।)
एएमयू छात्र संघ के पहले आजीवन सदस्य हैं महात्मा गांधी
ट्यूनीशिया के इनहदा पार्टी के अध्यक्ष शेख राशिद को 2015 में छात्र संघ की आजीवन सदस्या प्रदान की गई थी। वे आजीवन सदस्य बनने वाली 142वीं हस्ती थे। पहला आजीवन सदस्य महात्मा गांधी को 1920 में बनाया गया था। उसके बाद 1928 में शेख अल्लामा मो. इकबाल को यह सम्मान मिला। एएमयू आजीवन सदस्यों की ऐतिहासिक डायरी पर प्रिंस आगा खां, खान अब्दुल गफ्फार खान, मो. अली जिन्ना (1938), पंडित जवाहर लाल नेहरू (1948), सी राजगोपालाचारी (1948), डॉ. राजेंद्र प्रसाद (1951), डॉ. जाकिर हुसैन (1957), डॉ. जयप्रकाश नारायण (1968), राज नारायण, मदर टेरेसा (1983), जार्ज फर्नांडीस (1990), मुलायम सिंह यादव (1990), वीपी सिंह (1992), सैयद अहमद बुखारी, दलाई लामा, रामविलास पासवान आदि के हस्ताक्षर मौजूद हैं।
एक्ट पास होने के बाद सिड्डन यूनियन क्लब बना एएमएसयू
एक दिसंबर 1920 में मुस्लिम यूनिवर्सिटी एक्ट पास होने के बाद दि सिड्डन यूनियन क्लब को मुस्लिम यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन के नाम से जाना गया। एएमयू के बीए के छात्र फारूख अख्तर ने दि सिड्डन यूनियन क्लब के दिलचस्प इतिहास को इंटरनेट पर डाला है।
मोहम्मडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज में 26 अगस्त 1884 में दि सिड्डन यूनियन क्लब की शुरुआत की गई थी। हेनरी जॉर्ज आई सिड्डन एमएओ कॉलेज के पहले प्रिंसिपल थे। ऑक्सफोर्ड यूनियन से ग्रेजुएट हेनरी जॉर्ज आई सिड्डन के योग्य प्रशासक एवं अनुभवी शिक्षाविद थे। एमएओ कॉलेज के दूसरे प्रिंसिपल थियोडर बेक ने क्लब को कैंब्रिज यूनिवर्सिटी सोसाइटी के मॉडल पर विकसित किया। 15 नवंबर 1884 को पहली डिबेट भारत में महिला शिक्षा पर आयोजित की गई थी।
एएमयू की छात्र राजनीति से दलों को रखा गया दूर
एएमयू की छात्र राजनीति एवं छात्र संघ चुनाव से देश के राजनीतिक दलों को दूर रखा गया है। यह भी प्रावधान है कि छात्र संघ का अध्यक्ष या अन्य किसी पद पर चुने जाने के बाद छात्र नेता पद पर रहते हुए किसी भी राजनीतिक दल की सदस्यता नहीं ले सकता। यदि ऐसा करता है, तो उसे पद से हटाया जा सकता है।
एएमयू छात्र संघ का चुनाव करा चुके विधि विशेषज्ञ प्रो. एम शब्बीर का कहना है कि एएमयू की छात्र राजनीति से दलों को दूर रखा गया है। यहीं कारण है कि एएमयू में छात्र संघ चुनाव में किसी पार्टी के प्रत्याशी नहीं होते हैं। अन्य विश्वविद्यालयों की तरह इसकी इजाजत यहां नहीं हैं। यहां एबीवीपी, एनएसयूआई, आइसा, एसएफआई, सपा छात्र सभा एवं दूसरे छात्र संगठन प्रभावहीन हैं। हालांकि यह अलग बात है कि एएमयू के निर्वाचित छात्र नेताओं का किसी न किसी दल के प्रति झुकाव होता है और कार्यकाल समाप्त होने के बाद अधिकतर किसी न किसी पार्टी का दामन थाम लेते हैं।
पूरी दुनिया में फैले हैं सर सैयद के चमन के बुलबुले
सर सैयद के गुलशन के फूल निराले हैं। यह पूरी दुनिया में फैले हैं। भारत रत्न जाकिर हुसैन एवं खान अब्दुल गफ्फार खान से लेकर चंद्रयान मिशन में शामिल एएमयू की पूर्व छात्रा खुशबू मिर्जा इसमें शामिल हैं। यहां के छात्र एवं शिक्षक रहे करीब 20 हस्तियों ने पद्मभूषण, तो 50 से अधिक ने पद्मश्री हासिल किया है। इस यूनिवर्सिटी ने पाकिस्तान, बंगलादेश एवं मालदीव जैसे देशों में राष्ट्राध्यक्ष तक दिए हैं। यहां की छात्रा अनवरा तैमूर आसाम की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं। दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे साहिब सिंह वर्मा यहीं के छात्र थे। जम्मू कश्मीर को एएमयू ने कई मुख्यमंत्री दिए हैं। सर सैयद के गुलशन के फूल ओलंपियन योगेंद्र सिंह, सुरजीत सिंह, जफर इकबाल, अशोक, असलम शेख, गोविंदा, लाला अमरनाथ, सीएस नायडू, पद्मश्री प्रो. काजी अब्दुल सत्तार, शहरयार, राही मासूम रजा, खलीकुर्रहमान, जावेद अख्तर, जानिसार अख्तर, वाहिद अख्तर, मजाज आदि शामिल हैं।
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1884 में बना सिड्डन यूनियन क्लब 1920 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय बनने के बाद छात्र संघ (एएमयूएसयू) में तब्दील हो गया। 1918 में सिड्डन यूनियन क्लब के उपाध्यक्ष जाकिर हुसैन थे, जो बाद में भारत के राष्ट्रपति बने। छात्र संघ बनने के बाद पहले अध्यक्ष केएम खुदाबख्श बने। एएमयू उर्दू अकादमी के निदेशक डॉ. राहत अबरार ने बताया कि 1924-25 में केजी सैयदैन अध्यक्ष बने, जो बाद में भारत सरकार में शिक्षा सचिव रहे। 1925-26 के अध्यक्ष कुंवर अशरफ अली खान मशहूर इतिहासकार हुए। 1934-35 के अध्यक्ष आले अहमद सुरूर भारतीय उपमहाद्वीप के बहुत बड़े उर्दू साहित्यकार बने। उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया गया।
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1941-42 के अध्यक्ष अजीजुर्रहमान उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री बने। 1946-47 के अध्यक्ष एटीएम मुस्तफा आईएएस अधिकारी बने। 1953-54 में दक्षिण अफ्रीका के मो. अमीन बुलबुलिया एएमयू छात्र संघ के अध्यक्ष बने थे। 1958-59 में अध्यक्ष बने आबिदउल्ला गाजी हावर्ड यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर बने और प्रमुख इस्लामी विद्वान है। 1962-63 के अध्यक्ष अनीस उर शेरमानी छर्रा से विधायक एवं उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री बने। 1963-64 के अध्यक्ष वसीर अहमद खान इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के पीवीसी बने। 1967-68 के अध्यक्ष मो. अदीब राज्य सभा सांसद बने। 1972-73 के अध्यक्ष आरिफ मोहम्मद खान उत्तर प्रदेश एवं केंद्र में मंत्री बने। 1989-90 के अध्यक्ष हाफिज मोहम्मद उस्मान सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन बने और वर्तमान में राज्य सूचना आयोग के चेयरमैन हैं। 2006-07 के अध्यक्ष नफीस अहमद उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री बने। अभी विधायक हैं। 1972-73 में एएमयू छात्र संघ के सचिव रहे आजम खां उत्तर प्रदेश के मंत्री बने। वर्तमान में विधायक हैं।
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अलीगढ़ के वर्तमान मेयर मो. फुरकान एएमयू के उपाध्यक्ष एवं अध्यक्ष रह चुके हैं। 1980-81 में सचिव निर्वाचित हुए मोहम्मद अली अशरफ फातिमी बाद में केंद्रीय राज्य मंत्री बने। वहीं डॉ. मैराजुद्दीन उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री बने। इनके अलावा पूर्व दर्जा प्राप्त मंत्री खालिद मसूद भी एएमयू छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे हैं।
एएमयू के बारे में ये कहा था पूर्व राष्ट्रपति ने
एएमयू सार्वभौमिक एवं बहु संस्कृति वादी राष्ट्रीयता का सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां विभिन्न धर्मों, जातियों, भाषाओं तथा क्षेत्रों के छात्र एवं शिक्षक एकसाथ मिल-जुलकर रहते हुए सहकारिता तथा सहयोग की उच्च परंपरा के अंतर्गत देश को आगे बढ़ाने में प्रयासरत हैं। - प्रणब मुखर्जी, पूर्व राष्ट्रपति (17 अक्तूबर 2017 को एएमयू में आए थे, तब यह बात कही थी।)
एएमयू छात्र संघ के पहले आजीवन सदस्य हैं महात्मा गांधी
ट्यूनीशिया के इनहदा पार्टी के अध्यक्ष शेख राशिद को 2015 में छात्र संघ की आजीवन सदस्या प्रदान की गई थी। वे आजीवन सदस्य बनने वाली 142वीं हस्ती थे। पहला आजीवन सदस्य महात्मा गांधी को 1920 में बनाया गया था। उसके बाद 1928 में शेख अल्लामा मो. इकबाल को यह सम्मान मिला। एएमयू आजीवन सदस्यों की ऐतिहासिक डायरी पर प्रिंस आगा खां, खान अब्दुल गफ्फार खान, मो. अली जिन्ना (1938), पंडित जवाहर लाल नेहरू (1948), सी राजगोपालाचारी (1948), डॉ. राजेंद्र प्रसाद (1951), डॉ. जाकिर हुसैन (1957), डॉ. जयप्रकाश नारायण (1968), राज नारायण, मदर टेरेसा (1983), जार्ज फर्नांडीस (1990), मुलायम सिंह यादव (1990), वीपी सिंह (1992), सैयद अहमद बुखारी, दलाई लामा, रामविलास पासवान आदि के हस्ताक्षर मौजूद हैं।
एक्ट पास होने के बाद सिड्डन यूनियन क्लब बना एएमएसयू
एक दिसंबर 1920 में मुस्लिम यूनिवर्सिटी एक्ट पास होने के बाद दि सिड्डन यूनियन क्लब को मुस्लिम यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन के नाम से जाना गया। एएमयू के बीए के छात्र फारूख अख्तर ने दि सिड्डन यूनियन क्लब के दिलचस्प इतिहास को इंटरनेट पर डाला है।
मोहम्मडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज में 26 अगस्त 1884 में दि सिड्डन यूनियन क्लब की शुरुआत की गई थी। हेनरी जॉर्ज आई सिड्डन एमएओ कॉलेज के पहले प्रिंसिपल थे। ऑक्सफोर्ड यूनियन से ग्रेजुएट हेनरी जॉर्ज आई सिड्डन के योग्य प्रशासक एवं अनुभवी शिक्षाविद थे। एमएओ कॉलेज के दूसरे प्रिंसिपल थियोडर बेक ने क्लब को कैंब्रिज यूनिवर्सिटी सोसाइटी के मॉडल पर विकसित किया। 15 नवंबर 1884 को पहली डिबेट भारत में महिला शिक्षा पर आयोजित की गई थी।
एएमयू की छात्र राजनीति से दलों को रखा गया दूर
एएमयू की छात्र राजनीति एवं छात्र संघ चुनाव से देश के राजनीतिक दलों को दूर रखा गया है। यह भी प्रावधान है कि छात्र संघ का अध्यक्ष या अन्य किसी पद पर चुने जाने के बाद छात्र नेता पद पर रहते हुए किसी भी राजनीतिक दल की सदस्यता नहीं ले सकता। यदि ऐसा करता है, तो उसे पद से हटाया जा सकता है।
एएमयू छात्र संघ का चुनाव करा चुके विधि विशेषज्ञ प्रो. एम शब्बीर का कहना है कि एएमयू की छात्र राजनीति से दलों को दूर रखा गया है। यहीं कारण है कि एएमयू में छात्र संघ चुनाव में किसी पार्टी के प्रत्याशी नहीं होते हैं। अन्य विश्वविद्यालयों की तरह इसकी इजाजत यहां नहीं हैं। यहां एबीवीपी, एनएसयूआई, आइसा, एसएफआई, सपा छात्र सभा एवं दूसरे छात्र संगठन प्रभावहीन हैं। हालांकि यह अलग बात है कि एएमयू के निर्वाचित छात्र नेताओं का किसी न किसी दल के प्रति झुकाव होता है और कार्यकाल समाप्त होने के बाद अधिकतर किसी न किसी पार्टी का दामन थाम लेते हैं।
पूरी दुनिया में फैले हैं सर सैयद के चमन के बुलबुले
सर सैयद के गुलशन के फूल निराले हैं। यह पूरी दुनिया में फैले हैं। भारत रत्न जाकिर हुसैन एवं खान अब्दुल गफ्फार खान से लेकर चंद्रयान मिशन में शामिल एएमयू की पूर्व छात्रा खुशबू मिर्जा इसमें शामिल हैं। यहां के छात्र एवं शिक्षक रहे करीब 20 हस्तियों ने पद्मभूषण, तो 50 से अधिक ने पद्मश्री हासिल किया है। इस यूनिवर्सिटी ने पाकिस्तान, बंगलादेश एवं मालदीव जैसे देशों में राष्ट्राध्यक्ष तक दिए हैं। यहां की छात्रा अनवरा तैमूर आसाम की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं। दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे साहिब सिंह वर्मा यहीं के छात्र थे। जम्मू कश्मीर को एएमयू ने कई मुख्यमंत्री दिए हैं। सर सैयद के गुलशन के फूल ओलंपियन योगेंद्र सिंह, सुरजीत सिंह, जफर इकबाल, अशोक, असलम शेख, गोविंदा, लाला अमरनाथ, सीएस नायडू, पद्मश्री प्रो. काजी अब्दुल सत्तार, शहरयार, राही मासूम रजा, खलीकुर्रहमान, जावेद अख्तर, जानिसार अख्तर, वाहिद अख्तर, मजाज आदि शामिल हैं।