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बलिया घटना के बाद ‘राशन-राजनीति’ पर पैनी नजर
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आशीष निगम
बलिया के गांव में राशन दुकान आवंटन की खुली बैठक के हुई हिंसा और एक मौत का मामला पूरे प्रदेश में राजनीति गरमा रहा है। हालांकि इस घटना का मुख्य आरोपी पुलिस ने धर लिया है लेकिन बाकी जिलों में राशन की राजनीति पर प्रशासन और शासन की पैनी नजर लग गई है। इसके पीछे की वजह आगामी पंचायत चुनाव भी हैं, क्योंकि ग्रामीण इलाकों में राशन की दुकानें भी राजनीति के प्रमुख केंद्र में होती हैं। जिले में इन राशन की दुकानों के लगभग 30 विवाद सामने आ चुके हैं। जिसमें विभागीय जांच पड़ताल के बाद हुई कार्रवाई में 17 दुकानें निलंबित हो चुकी हैं और 12 कोटेदारों के लाइसेंस निरस्त हो चुके हैं।
लॉकडाउन में दौरान ही अतरौली में प्रति यूनिट एक किलो अनाज कम देने की शिकायतें हुई थीं। जिला स्तरीय प्रशासनिक जांच पड़ताल करने में तत्कालीन जिलापूर्ति अधिकारी चमन शर्मा भी सवालों के घेरे में आए और उनका स्थानांतरण हो गया। इस मामले में मंडलायुक्त ने मंडलीय अधिकारियों से जिलापूर्ति अधिकारी के कार्यों की जांच कराई थी, जिसमें उनकी भूमिका भी निष्पक्ष नहीं थी। इससे पहले जीटी रोड बाईपास के पास कमालपुर में राशन वितरण को लेकर दो समुदायों के बीच जबरदस्त हिंसक तनाव हो गया था। बलिया की घटना के बाद राशन कोटेदारों के खिलाफ आने वाली शिकायतों को और गंभीरता से लिया जा रहा है, ताकि बलिया जैसी कोई पृष्ठभूमि अलीगढ़ में न तैयार हो पाए।
1- 1352 कुल राशन कोटेदार जिले में
2- 24596 अंत्योदय राशनकार्ड धारक
3- 625404 पात्र गृहस्थी कार्ड धारक
4- 2,68,7000 कुल यूनिट अर्थात लाभार्थी
5- 17 दुकानें निलंबित और 12 दुकान निरस्त
निरस्त दुकानों को लेकर खुली बैठक होती है। वर्तमान में इन दुकानों को स्वयं सहायता समूहों को प्राथमिकता के साथ देने के लिए शासन का निर्देश है। जिस पर अलीगढ़ में भी काम हो रहा है। इसी निर्देश के तहत निरस्त दुकानों का आवंटन हो रहा है। राशन कोटेदार से संबंधित शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई भी हो रही है।
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राजेश सोनी, जिलापूर्ति अधिकारी।
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बलिया के गांव में राशन दुकान आवंटन की खुली बैठक के हुई हिंसा और एक मौत का मामला पूरे प्रदेश में राजनीति गरमा रहा है। हालांकि इस घटना का मुख्य आरोपी पुलिस ने धर लिया है लेकिन बाकी जिलों में राशन की राजनीति पर प्रशासन और शासन की पैनी नजर लग गई है। इसके पीछे की वजह आगामी पंचायत चुनाव भी हैं, क्योंकि ग्रामीण इलाकों में राशन की दुकानें भी राजनीति के प्रमुख केंद्र में होती हैं। जिले में इन राशन की दुकानों के लगभग 30 विवाद सामने आ चुके हैं। जिसमें विभागीय जांच पड़ताल के बाद हुई कार्रवाई में 17 दुकानें निलंबित हो चुकी हैं और 12 कोटेदारों के लाइसेंस निरस्त हो चुके हैं।
लॉकडाउन में दौरान ही अतरौली में प्रति यूनिट एक किलो अनाज कम देने की शिकायतें हुई थीं। जिला स्तरीय प्रशासनिक जांच पड़ताल करने में तत्कालीन जिलापूर्ति अधिकारी चमन शर्मा भी सवालों के घेरे में आए और उनका स्थानांतरण हो गया। इस मामले में मंडलायुक्त ने मंडलीय अधिकारियों से जिलापूर्ति अधिकारी के कार्यों की जांच कराई थी, जिसमें उनकी भूमिका भी निष्पक्ष नहीं थी। इससे पहले जीटी रोड बाईपास के पास कमालपुर में राशन वितरण को लेकर दो समुदायों के बीच जबरदस्त हिंसक तनाव हो गया था। बलिया की घटना के बाद राशन कोटेदारों के खिलाफ आने वाली शिकायतों को और गंभीरता से लिया जा रहा है, ताकि बलिया जैसी कोई पृष्ठभूमि अलीगढ़ में न तैयार हो पाए।
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1- 1352 कुल राशन कोटेदार जिले में
2- 24596 अंत्योदय राशनकार्ड धारक
3- 625404 पात्र गृहस्थी कार्ड धारक
4- 2,68,7000 कुल यूनिट अर्थात लाभार्थी
5- 17 दुकानें निलंबित और 12 दुकान निरस्त
निरस्त दुकानों को लेकर खुली बैठक होती है। वर्तमान में इन दुकानों को स्वयं सहायता समूहों को प्राथमिकता के साथ देने के लिए शासन का निर्देश है। जिस पर अलीगढ़ में भी काम हो रहा है। इसी निर्देश के तहत निरस्त दुकानों का आवंटन हो रहा है। राशन कोटेदार से संबंधित शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई भी हो रही है।
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राजेश सोनी, जिलापूर्ति अधिकारी।