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कर्ज लेकर साइबर ठगों को दे दिए, तब शिक्षक को हुआ ठगी का अहसास

Sat, 31 Oct 2020 01:33 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 31 Oct 2020 01:33 AM IST
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After giving loan to cyber thugs, the teacher felt cheated
पुलिस की गिरफ्तर में ऑनलाइन ठगी करने वाले गिरोह के सदस्य। - फोटो : CITY OFFICE
कहते हैं कि लालच और मजबूरी कुछ भी करा देती है। ऐसा ही कुछ विदेशी साइबर ठगों का शिकार बने किशनपुर के शिक्षक संग हुआ। उन्होंने इन ठगों को कर्ज देकर भी रुपयों का भुगतान किया और एक साल में करीब 22 बार ऑनलाइन भुगतान करने के बाद इन्हें यह अहसास हुआ कि वे ठगी का शिकार हो रहे हैं। तब वे एसएसपी मुनिराज जी से मिलने पहुंचे। पूरा वाकया बताया तो एसएसपी भी सुनकर दंग रह गए। तत्काल साइबर सेल व क्वार्सी इंस्पेक्टर छोटेलाल को प्रकरण की गंभीरता समझ जांच में लगाया गया। तीन महीने की जांच में पुलिस को सफलता हाथ लग गई।
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शिक्षक भगवती दत्त शर्मा ने बताया कि फरवरी 2019 में उन्हें ब्रेडमैन नाम से एक व्यक्ति की फेसबुक फ्रेंड रिक्वेस्ट आई थी। उन्होंने इस अनुरोध को स्वीकार कर लिया। इसके बाद मार्च में उधर से फेसबुक मैसेंजर पर बातचीत के दौरान बताया गया कि आपसे प्रभावित होकर हमारी कंपनी आपको किसी चैरिटेबल ट्रस्ट में लगाने के लिए 50 हजार डॉलर (लगभग 35 लाख रुपये) दिए जाएंगे। इसके लिए उन्हें फेसबुक मैसेंजर पर ही उसका गिफ्ट वाउचर पैक भी दिखाया गया।
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इसके बाद रजिस्ट्रेशन के नाम पर 17 सौ और 18 सौ रुपये ऑनलाइन लिए गए। इसके बाद कस्टम ड्यूटी के नाम पर 78 हजार रुपये लिए गए। हर भुगतान नए बैंक एकाउंट में ही लिया जाता था। फिर एक दिन कस्टम अधिकारी का फोन आया और उसने गलत गिफ्ट पैक छुड़ाने के नाम पर 2.78 लाख रुपये मांगे तो वह भुगतान भी किया। इसके बाद सीबीआई का खौफ दिखाया गया और कुल मिलाकर अलग-अलग नाम से बहाने से 22 बार में कुल 31.23 लाख रुपये लिए गए। जुलाई 2020 में जब शर्मा को ठगी का अहसास हुआ तो वे पुलिस के पास गए। अब वे पुलिस के खुलासे संतुष्ट हैं। वे कहते हैं कि लोगों को इस तरह के लालच से दूर ही रहना चाहिए।
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किराये पर खाता लेता है गिरोह
पुलिस जांच में पाया गया कि 22 अलग-अलग खाते में रुपये लिए गए। हर एकाउंट इन लोगों ने किराये पर ले रखा था। इसकी एवज में खाताधारक को भुगतान भी देते हैं। इसके अलावा कोई भी मोबाइल, सिम या यहां तक कि दिल्ली में दोपहिया भी इन नाइजीरियन युवकों के नाम पर नहीं है। वह भी किराये पर ही ले रखा है। जितनी रकम ये लोग ठगी से जुटाते हैं, उसमें से ज्यादातर नाइजीरिया ट्रांसफर कर देते हैं और अपने खर्चे लायक ही पास रखते हैं।
वीजा भी फर्जी होने का अंदेशा, महंगे शौक
पुलिस जांच में पाया गया है कि इनके शौक महंगे थे। जिस इलाके में यह लोग रह रहे थे। वहां इन्हें छात्र माना जाता है। खुद जब पुलिस ने इन्हें पकड़ा तो उस समय भी छात्र ही बताया। वीजा देखने से पता चला कि वह तो खत्म हो चुका है। उसके फर्जी होने का अंदेशा है। पुलिस ने वीजा व पासपोर्ट जब्त कर लिए हैं। उनकी जांच कराई जा रही है। जांच में जो सामने आएगा, उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
ऐसे इस गिरोह तक पहुंची साइबर टीम
जिला पुलिस की साइबर टीम ने सबसे पहले सुमीर तक पहुंची। जब सुमीर से पूछताछ हुई तो वह टूट गया और उसने सच्चाई बता दी। इसके अलावा किसी अन्य खाता धारक तक पुलिस नहीं पहुंच पाई थी। एसपी देहात के अनुसार अब उन सभी खातों की जांच कराई जा रही है। इसके अलावा उन खातों के जरिये यह भी जानने का प्रयास हो रहा है कि किन किन लोगों को ठगा गया है।

पुलिस टीम में ये रहे शामिल
इंस्पेक्टर क्वार्सी छोटेलाल, एसआई अरविंद सिंह, प्रभारी साइबर सेल अरविंद सिवाल, साइबर सेल से सतीश चंद्र, पुष्पेंद्र सिंह, धर्मेंद्र सिंह, तरुण गौड़, अजय कुमार, सतीश कुमार, क्वार्सी थाने से सचिन व रंजना यादव शामिल रहे।
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