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22 साल बाद छूटा सियासी जय से ‘वीर’ का साथ

Sun, 04 Sep 2022 12:06 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 04 Sep 2022 12:06 AM IST
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After 22 years, Veer's support from Political Jai left
अभिषेक शर्मा, अलीगढ़।
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जिले के सियासी इतिहास की बात करें तो कई दिग्गजों के नाम शुमार हैं, मगर 1996 से 2012 तक का एक दौर ऐसा रहा, जिसमें हाथरस के रामवीर उपाध्याय और अलीगढ़ के जयवीर सिंह की जोड़ी सियासी धुरंधर के तौर पर मंडल में सिरमौर रही। इस जोड़ी ने कई सियासी कीर्तिमान बनाए। हाथरस के साथ-साथ अलीगढ़ जनपद की सियासत में रामवीर खासा दखल रखते थे।
इसी की बदौलत उन्होंने इगलास उप चुनाव में अपने छोटे भाई मुकुल उपाध्याय को विधायकी जिताई और 2009 के लोकसभा चुनाव में पत्नी सीमा उपाध्याय को अलीगढ़ से चुनाव लड़ाने का मन बनाया लेकिन जयवीर सिंह ने अपनी पत्नी के चुनाव का प्रस्ताव रखा तो रामवीर ने बड़े भाई की भूमिका निभाते हुए सीमा को आगरा ले गए।
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वर्ष 1993 में रामवीर उपाध्याय ने हाथरस सीट से निर्दलीय और 1996 में बसपा के बैनरतले चुनाव लड़ा। 1997 में रामवीर ने हाथरस को अलग जिला बनवाया। इसी बीच अलीगढ़ बसपा में ठा. जयवीर सिंह क्षत्रिय नेता के रूप में सक्रिय हुए और 2000 में पार्टी जिलाध्यक्ष बने। 2002 के चुनाव में हाथरस से रामवीर उपाध्याय, बरौली से ठा.जयवीर सिंह एक साथ चुनाव जीते और प्रदेश सरकार में मंत्री बने। यहां से इन दोनों की सियासी जोड़ी कीर्तिमान बनाने लगी।
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फिर 2007 के चुनाव में दोनों जीते। अलीगढ़ को जयवीर सिंह ने मंडल का दर्जा दिलाया। इससे पहले 2004-05 में इगलास में उप चुनाव में मुकुल उपाध्याय विधायक बने। 2009 में ठा. जयवीर सिंह की पत्नी राजकुमारी चौहान के अलीगढ़ से व सीमा उपाध्याय के फतेहपुर सीकरी से सांसद निर्वाचित होने के बाद 2010-11 के चुनाव में मुकुल उपाध्याय अलीगढ़-हाथरस एमएलसी सीट पर निर्वाचित हुए।
जिसमें ठा.जयवीर सिंह की अहम भूमिका रही और अलीगढ़ से मुकुल को इकतरफा मत मिले। हालांकि 2012 के चुनाव में जयवीर सिंह चुनाव हार गए। मगर दोनों की सियासी जोड़ी साथ रही। जयवीर सिंह एमएलसी निर्वाचित हुए।
इशारे पर खड़े होते साथ, बीमारी में निभाया साथ
दोनों में ऐसी सियासी जुगलबंदी थी कि इशारों में ही साथ चलते थे। हाथरस जिला पंचायत चुनाव के दौरान रामवीर उपाध्याय का स्वास्थ्य खराब होने पर जयवीर सिंह ने हाथरस में सीमा उपाध्याय को चुनाव जिताने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे पूरे समय हाथरस में रहे और इकतरफा जीत दर्ज कराई।
इधर, 2022 के विधानसभा चुनाव में भी रामवीर का स्वास्थ्य खराब था। वे सोशल मीडिया से खुद का प्रचार कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने बरौली के मतदाताओं के लिए भी सोशल मीडिया पर संदेश प्रसारित किए, जिसमें छोटे भाई जयवीर सिंह के लिए ब्राह्मण मतदाताओं से वोट मांगे।
- रामवीर उपाध्याय का निधन पश्चिमी यूपी की सियासत, उनके परिवार व निजी तौर पर मेरे लिए बड़ी क्षति है। हम दोनों भाइयों में सिर्फ सियासी ही नहीं, बल्कि पारिवारिक रिश्ता भी था है और रहेगा। हम दोनों ने अलीगढ़ मंडल में विकास की गंगा बहाई। वे मुझे हमेशा छोटे भाई की तरह मानते थे।
हालांकि उनके परिवार में उनकी कमी हमेशा खलेगी। मैं हमेशा उस परिवार के संरक्षक की भूमिका में पारिवारिक, राजनीतिक और सामाजिक तौर पर खड़ा रहूंगा। जैसे और जितना मैं अपने बेटे अभिमन्यु के लिए सोचता-करता हूं। उतनी ही जिम्मेदारी छोटे भाई की तरह जीवन पर्यंत चिराग के लिए निभाऊंगा।-ठा.जयवीर सिंह, विधायक/पूर्व मंत्री

अंतिम संस्कार में शामिल हुए अलीगढ़ से तमाम लोग
रामवीर उपाध्याय के देहांत की खबर पर अलीगढ़ से तमाम लोग अंतिम संस्कार में पहुंचे। इस दौरान ठा.जयवीर सिंह, जिलाध्यक्ष चौ.ऋषिपाल सिंह, मंत्री अनूप प्रधान, महामंत्री शिवनारायण शर्मा, चुनमुन शर्मा, पूर्व जिलाध्यक्ष देवराज सिंह, विधायक अनिल पाराशर, मानवेंद्र प्रताप सिंह, अभिमन्यु सिंह आदि तमाम लोग शामिल होने गए।
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