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शत्रु संपत्तियों पर प्रशासन की नजर, नए सिरे से होगा सत्यापन
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शत्रु संपत्तियों को लीज पर देने में हुई गड़बड़ी को लेकर जिले की 48 संपत्तियों पर अब प्रशासन की नजर है। गृह मंत्रालय के शत्रु संपत्ति अभिरक्षक कार्यालय ने इनकी विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब की है। इसके बाद इन संपत्तियों के स्वामित्व एवं किरायेदारी के प्रकरण की जांच - पड़ताल शुरू कर दी गई है। अब जिले की सभी तहसीलों में इन संपत्तियों का भौतिक सत्यापन कराया जा रहा है।
आजादी के बाद बंटवारे में पाकिस्तान चले गए लोगों की संपत्ति को शत्रु संपत्ति घोषित किया गया था। जिसकी देखरेख का जिम्मा जिला प्रशासन के पास है, इसका प्रयोग सरकारी संपत्ति की तरह हो रहा है। शासन के निर्देश पर सभी संपत्तियों के चिन्हांकन के साथ तस्दीक की जा रही है कि किसी कब्जेदार ने इन संपत्तियों का दुरुपयोग तो नहीं किया है । जिन संपत्तियों को किराए पर दिया गया है तो उनका किराया समय से जमा हो रहा है अथवा नहीं।
करीब छह साल पहले हुए सर्वे के अनुसार जिले की 48 शत्रु संपत्तियों में से सर्वाधिक 12 संपत्तियां कोल तहसील में हैं। इसके बाद अतरौली, खैर व गभाना तहसील में शत्रु संपत्तियां चिन्हित की गईं हैं। करोड़ों कीमत की इन संपत्तियों पर विभागीय अफसरों व कर्मचारियों की मिली भगत से अवैध कब्जा है। कोल तहसील की अनौना हाउस में दुुकान, आवास, कारखाने आदि बने हुए हैं।
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पान वाली कोठी में रह रहे 21 परिवार
प्रशासन की जांच में दोदपुर स्थित पान वाली कोठी करीब 3200 वर्ग मीटर जमीन पर बनी हुई है। सरकारी दस्तावेजों में इसकी मालकिन अनवर जहां बेगम थी जो अब यह शत्रु संपत्ति के नाम पर दर्ज हैं। इस बेशकीमती कोठी पर 21 परिवार कब्जा किए हुए हैं। इनका कहना है कि वह इस कोठी का किराया तीन साल पहले तक नियमित तौर पर जमा कर रहे थे। अब कोई निजी व्यक्ति किराया वसूल रहा है। सबसे बड़ा सवाल है कि अगर यह शत्रु-संपत्ति है तो निजी व्यक्ति इसका किराया कैसे वसूल सकता है ?
जिले की सभी तहसीलों में एसडीएम, तहसीलदार के जरिए शत्रु संपत्ति का भौतिक सत्यापन कराया जा रहा है, जांच रिपोर्ट आने पर उसे अग्रिम कार्रवाई के लिए शासन को भेजा जाएगा।
- प्रदीप कुमार वर्मा, सिटी मजिस्ट्रेट
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आजादी के बाद बंटवारे में पाकिस्तान चले गए लोगों की संपत्ति को शत्रु संपत्ति घोषित किया गया था। जिसकी देखरेख का जिम्मा जिला प्रशासन के पास है, इसका प्रयोग सरकारी संपत्ति की तरह हो रहा है। शासन के निर्देश पर सभी संपत्तियों के चिन्हांकन के साथ तस्दीक की जा रही है कि किसी कब्जेदार ने इन संपत्तियों का दुरुपयोग तो नहीं किया है । जिन संपत्तियों को किराए पर दिया गया है तो उनका किराया समय से जमा हो रहा है अथवा नहीं।
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करीब छह साल पहले हुए सर्वे के अनुसार जिले की 48 शत्रु संपत्तियों में से सर्वाधिक 12 संपत्तियां कोल तहसील में हैं। इसके बाद अतरौली, खैर व गभाना तहसील में शत्रु संपत्तियां चिन्हित की गईं हैं। करोड़ों कीमत की इन संपत्तियों पर विभागीय अफसरों व कर्मचारियों की मिली भगत से अवैध कब्जा है। कोल तहसील की अनौना हाउस में दुुकान, आवास, कारखाने आदि बने हुए हैं।
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पान वाली कोठी में रह रहे 21 परिवार
प्रशासन की जांच में दोदपुर स्थित पान वाली कोठी करीब 3200 वर्ग मीटर जमीन पर बनी हुई है। सरकारी दस्तावेजों में इसकी मालकिन अनवर जहां बेगम थी जो अब यह शत्रु संपत्ति के नाम पर दर्ज हैं। इस बेशकीमती कोठी पर 21 परिवार कब्जा किए हुए हैं। इनका कहना है कि वह इस कोठी का किराया तीन साल पहले तक नियमित तौर पर जमा कर रहे थे। अब कोई निजी व्यक्ति किराया वसूल रहा है। सबसे बड़ा सवाल है कि अगर यह शत्रु-संपत्ति है तो निजी व्यक्ति इसका किराया कैसे वसूल सकता है ?
जिले की सभी तहसीलों में एसडीएम, तहसीलदार के जरिए शत्रु संपत्ति का भौतिक सत्यापन कराया जा रहा है, जांच रिपोर्ट आने पर उसे अग्रिम कार्रवाई के लिए शासन को भेजा जाएगा।
- प्रदीप कुमार वर्मा, सिटी मजिस्ट्रेट