Aligarh: 13 वर्षों से अवैध कब्जे में करोड़ों की जमीन एडीए ने कराई मुक्त, आधुनिक तकनीक से साबित हुआ दावा
साल 2013 में कुछ रसूखदार और राजनीतिक लोगों ने इस जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया था। लंबे समय से चल रहे इस विवाद के कारण जमीन का उपयोग नहीं हो पा रहा था।
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अलीगढ़ शहर के रामघाट रोड पर बुधवार को एडीए ने कार्रवाई करते हुए 13 साल पुराने अवैध कब्जे को एक घंटे में ध्वस्त कर दिया। भारी पुलिस बल और दो बुलडोजर के साथ पहुंची एडीए की टीम ने किशनपुर स्थित करीब 2420 वर्ग मीटर बेशकीमती जमीन को भू-माफिया और अवैध कब्जेदारों से मुक्त करा लिया। इस जमीन की कीमत लगभग 12 करोड़ रुपये आंकी जा रही है।
जांच में सामने आया कि गाटा संख्या 21 की यह भूमि एडीए ने साल 1983 में स्वर्ण जयंती नगर योजना के लिए अधिग्रहीत की थी। हालांकि, 2013 में तत्कालीन सपा शासनकाल के दौरान राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर इस सरकारी जमीन पर जबरन बाउंड्रीवाल बनाकर इसे कदीमी कब्रिस्तान का रूप दे दिया गया था। उस समय स्थानीय लोगों के विरोध को भी अनसुना कर दिया गया था।
एडीए सचिव दीपाली भार्गव और उपाध्यक्ष कुलदीप मीणा के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई में आधुनिक तकनीक का सहारा लिया गया। परंपरागत पैमाइश के बजाय डिजिटल मैपिंग और जीपीएस सर्वे के जरिए जमीन की वास्तविकता सिद्ध की गई। तकनीकी साक्ष्यों ने यह स्पष्ट कर दिया कि राजस्व अभिलेखों में यह भूमि एडीए के नाम दर्ज है। इसके बाद कब्जेदारों के पास कोई कानूनी बचाव नहीं बचा।
बुधवार सुबह करीब 10:30 बजे प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। देखते ही देखते बुलडोजर ने अवैध कब्रिस्तान के मुख्य गेट और बाउंड्रीवाल को जमींदोज कर दिया। कार्रवाई के दौरान सपा के कुछ पदाधिकारियों और एक समुदाय के लोगों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया, लेकिन प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए काम जारी रखा। शाम तक एडीए ने पूरी जमीन पर अपनी नई दीवार खड़ी कर निजी स्वामित्व का बोर्ड लगा दिया।
आधुनिक तकनीक का उपयोग कर जमीन की वास्तविकता को सिद्ध किया है। 2013 से लंबित इस मामले में 2400 वर्ग मीटर जमीन को अब पूरी तरह कब्जा मुक्त करा लिया गया है। सरकारी संपत्ति पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।- कुलदीप मीणा, उपाध्यक्ष, एडीए
कार्रवाई के विरोध में उतरे बसपा नेता
अलीगढ़ विकास प्राधिकरण (एडीए) द्वारा कब्जा लेने की कार्रवाई का कांग्रेस, बसपा और सपा नेताओं ने विरोध किया। घटना की सूचना मिलते ही बसपा नेता सलमान शाहिद, समाजवादी पार्टी के महानगर अध्यक्ष अब्दुल हमीद घोसी, कांग्रेस महानगर अध्यक्ष नवेद खान और सपा महासचिव मनोज यादव समेत कई नेता मौके पर पहुंचे। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी से वार्ता कर इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई।
जिलाधिकारी के निर्देश पर एडीएम सिटी ने प्रतिनिधियों को अपनी बात और साक्ष्य रखने के लिए दो दिन का समय दिया है। बसपा नेता सलमान शाहिद ने कहा कि यह कब्रिस्तान कोई नया निर्माण नहीं, बल्कि सैकड़ों वर्ष पुराना है। उन्होंने आरोप लगाया कि एडीए द्वारा प्राचीन कब्रिस्तान पर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। मौके पर पहुंचने वालों में मुफ्ती जैद मजाहिरी, मुईन मोनू, इकबाल भाई आदि शामिल रहे। बाद में यह सभी नेता शहरमुफ्ती मोहम्मद खालिद हमीद से भी मिले और पूरा मामला उनके सामने रखा।