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किशोरी से सामूहिक दुष्कर्म के आरोपियों को 20-20 साल की सजा
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एडीजे-7 विशेष न्यायालय लैंगिक अपराध के विद्वान न्यायाधीश अनिल कुमार सिंह प्रथम के न्यायालय से किशोरी को अगवा कर सामूहिक दुष्कर्म के मामले में दो आरोपियों को बीस-बीस साल कैद की सजा और जुर्माने से दंडित किया गया है। प्रकरण अकराबाद क्षेत्र का है, जहां से किशोरी को अगवा कर लाया गया था और उसे क्वार्सी इलाके में रखा गया था।
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता एडीजीसी रघुवंश शर्मा व रविकांत शर्मा के अनुसार अकराबाद क्षेत्र के गांव में बच्चे के जन्म पर 16 दिसंबर 2013 की रात महिला संगीत कार्यक्रम चल रहा था। इस कार्यक्रम में शामिल होने गांव की 16 वर्षीय किशोरी भी आई थी। रात को जब वह संगीत से अपने घर लौट रही थी। तभी गांव के वारिस, संदीप व सुबोध उसे तमंचे के बल पर बाइक पर अगवा कर ले गए। इस दौरान उसका मुंह दबाकर उसे मारने की धमकी दी गई। पहले तो उन्होंने पास के गांव भोजपुर के जंगल में ले जाकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया।
इसके बाद उसे क्वार्सी में एक आरोपी वारिस की रिश्तेदारी में ले आए और बंद कर दिया। इस सूचना पर परिजनों ने उसकी खोज शुरू की और अगले दिन शाम चार बजे पुलिस की मदद से पीड़िता को बरामद कर तीनों आरोपियों को पकड़ लिया गया। थाने पहुंचने पर गांव के दबंग लोगों के दबाव में मुकदमा दर्ज नहीं होने दिया। बाद में 24 दिसंबर को एसएसपी के निर्देश पर मुकदमा दर्ज किया गया।
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दौरान-ए-विवेचना पुलिस ने वारिस व सुबोध के खिलाफ साक्ष्य पाए और दोनों पर चार्जशीट दायर कर दी। अदालत में सत्र परीक्षण के दौरान दोनों को दोषी करार देते हुए बीस-बीस साल की सजा व 27-27 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है। साथ ही निर्देश दिए हैं कि जुर्माने से आधि रकम पीड़िता को दी जाए।
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अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता एडीजीसी रघुवंश शर्मा व रविकांत शर्मा के अनुसार अकराबाद क्षेत्र के गांव में बच्चे के जन्म पर 16 दिसंबर 2013 की रात महिला संगीत कार्यक्रम चल रहा था। इस कार्यक्रम में शामिल होने गांव की 16 वर्षीय किशोरी भी आई थी। रात को जब वह संगीत से अपने घर लौट रही थी। तभी गांव के वारिस, संदीप व सुबोध उसे तमंचे के बल पर बाइक पर अगवा कर ले गए। इस दौरान उसका मुंह दबाकर उसे मारने की धमकी दी गई। पहले तो उन्होंने पास के गांव भोजपुर के जंगल में ले जाकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया।
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इसके बाद उसे क्वार्सी में एक आरोपी वारिस की रिश्तेदारी में ले आए और बंद कर दिया। इस सूचना पर परिजनों ने उसकी खोज शुरू की और अगले दिन शाम चार बजे पुलिस की मदद से पीड़िता को बरामद कर तीनों आरोपियों को पकड़ लिया गया। थाने पहुंचने पर गांव के दबंग लोगों के दबाव में मुकदमा दर्ज नहीं होने दिया। बाद में 24 दिसंबर को एसएसपी के निर्देश पर मुकदमा दर्ज किया गया।
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दौरान-ए-विवेचना पुलिस ने वारिस व सुबोध के खिलाफ साक्ष्य पाए और दोनों पर चार्जशीट दायर कर दी। अदालत में सत्र परीक्षण के दौरान दोनों को दोषी करार देते हुए बीस-बीस साल की सजा व 27-27 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है। साथ ही निर्देश दिए हैं कि जुर्माने से आधि रकम पीड़िता को दी जाए।