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अलीगढ़ : मेरठ में भ्रष्टाचार में फंसे दरोगा धर्मेंद्र पर अलीगढ़ में भी दर्ज है मुकदमा
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मेरठ में आय से अधिक संपत्ति के आरोपों में फंसे दरोगा धर्मेंद्र कुमार व उसके साथी दरोगा सुधीर कुमार डागर पर अलीगढ़ में भी भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज है। लोधा थाने में दर्ज मुकदमे की विवेचना एंटी करप्शन ब्यूरो आगरा शाखा द्वारा की जा रही है, जो लगभग पूरी हो गई है।
ये है घटनाक्रम
वाकया 2015 के ग्राम पंचायत चुनाव का है। मतदान के दिन एक दिसंबर की शाम मतदान समाप्त होने पर पुलिस ने गांव नदरोई के प्रधान प्रत्याशी परिवार के राम कुमार व उनके भतीजे हरीश कुमार को शांतिभंग की आशंका में पाबंद किया था। आरोप है कि दोनों को थाना लोधा बुलाकर हिरासत में ले लिया गया था। फिर दोनों से तत्कालीन थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार व हल्का एसआई सुधीर कुमार डागर ने 80 हजार रुपये की रिश्वत मांगी। यह राशि लेकर रात करीब साढ़े 11 बजे दोनों को छोड़ दिया गया, मगर बाद में पता चला कि रिश्वत लेने के बाद भी उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
इसकी शिकायत रामकुमार ने अधिकारियों से की। शासन स्तर से लेकर मुख्यमंत्री तक को शिकात भेजी गई। इसका परिणाम हुआ कि 11 दिसंबर 2015 को थानाध्यक्ष व दारोगा ने रामकुमार के परिचित महेंद्र पाल को थाने बुलाकर रिश्वत वापस कर दी। मगर तीन अक्तूबर 2018 को शासन ने शिकायत पर संज्ञान लिया और जांच एंटी करप्शन को सौंपी। जांच के बाद 28 अक्तूबर 2020 को दोनों के खिलाफ लोधा थाने में एंटी करप्शन के इंस्पेक्टर रामपाल यादव की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया। जिस समय मुकदमा दर्ज हुआ, उस समय धर्मेंद्र मेरठ में तैनात था, जबकि सुधीर कुमार डागुर जिले के पिसावा थाने में बतौर एसओ तैनात था। बाद में उसका भी यहां से नोएडा तबादला हो गया।
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एंटी करप्शन से हो रही विवेचना
इस मामले में पैरोकारी कर रहे शिकायतकर्ता रामकुमार ने बताया कि इस मामले में विवेचना एंटी करप्शन आगरा शाखा द्वारा की जा रही है। वहां से वे लगातार अपडेट ले रहे हैं। विवेचना अंतिम दौर में है और उनका प्रयास है कि जल्द से जल्द आरोपियों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति हो तो वे आगे न्यायालय में लड़ाई लड़ेें। इस विषय में जब विवेचना कर रहे एंटी करप्शन के इंस्पेक्टर जसपाल पवार से मोबाइल पर बात की गई तो उन्होंने बताया कि अभी विवेचना चल रही है।
मेरठ में धर्मेंद्र पर लगा है आय से अधिक संपत्ति का मुकदमा
मेरठ के हस्तिनापुर के पूर्व थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार पर बुधवार को मेडिकल थाने में आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया गया है। जिसमें 9 वर्ष में 62 लाख रुपये की कमाई के बदले करीब डेढ़ करोड़ खर्च करने। मेरठ में फ्लैट समेत कई जगह संपत्ति खड़ी करने। आलीशान फार्म हाउस बनाने जैसे आरोप हैं।
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ये है घटनाक्रम
वाकया 2015 के ग्राम पंचायत चुनाव का है। मतदान के दिन एक दिसंबर की शाम मतदान समाप्त होने पर पुलिस ने गांव नदरोई के प्रधान प्रत्याशी परिवार के राम कुमार व उनके भतीजे हरीश कुमार को शांतिभंग की आशंका में पाबंद किया था। आरोप है कि दोनों को थाना लोधा बुलाकर हिरासत में ले लिया गया था। फिर दोनों से तत्कालीन थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार व हल्का एसआई सुधीर कुमार डागर ने 80 हजार रुपये की रिश्वत मांगी। यह राशि लेकर रात करीब साढ़े 11 बजे दोनों को छोड़ दिया गया, मगर बाद में पता चला कि रिश्वत लेने के बाद भी उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
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इसकी शिकायत रामकुमार ने अधिकारियों से की। शासन स्तर से लेकर मुख्यमंत्री तक को शिकात भेजी गई। इसका परिणाम हुआ कि 11 दिसंबर 2015 को थानाध्यक्ष व दारोगा ने रामकुमार के परिचित महेंद्र पाल को थाने बुलाकर रिश्वत वापस कर दी। मगर तीन अक्तूबर 2018 को शासन ने शिकायत पर संज्ञान लिया और जांच एंटी करप्शन को सौंपी। जांच के बाद 28 अक्तूबर 2020 को दोनों के खिलाफ लोधा थाने में एंटी करप्शन के इंस्पेक्टर रामपाल यादव की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया। जिस समय मुकदमा दर्ज हुआ, उस समय धर्मेंद्र मेरठ में तैनात था, जबकि सुधीर कुमार डागुर जिले के पिसावा थाने में बतौर एसओ तैनात था। बाद में उसका भी यहां से नोएडा तबादला हो गया।
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एंटी करप्शन से हो रही विवेचना
इस मामले में पैरोकारी कर रहे शिकायतकर्ता रामकुमार ने बताया कि इस मामले में विवेचना एंटी करप्शन आगरा शाखा द्वारा की जा रही है। वहां से वे लगातार अपडेट ले रहे हैं। विवेचना अंतिम दौर में है और उनका प्रयास है कि जल्द से जल्द आरोपियों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति हो तो वे आगे न्यायालय में लड़ाई लड़ेें। इस विषय में जब विवेचना कर रहे एंटी करप्शन के इंस्पेक्टर जसपाल पवार से मोबाइल पर बात की गई तो उन्होंने बताया कि अभी विवेचना चल रही है।
मेरठ में धर्मेंद्र पर लगा है आय से अधिक संपत्ति का मुकदमा
मेरठ के हस्तिनापुर के पूर्व थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार पर बुधवार को मेडिकल थाने में आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया गया है। जिसमें 9 वर्ष में 62 लाख रुपये की कमाई के बदले करीब डेढ़ करोड़ खर्च करने। मेरठ में फ्लैट समेत कई जगह संपत्ति खड़ी करने। आलीशान फार्म हाउस बनाने जैसे आरोप हैं।