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20 ने की आंखें दान 35 की दुनिया हुई रोशन
Aligarh
Updated Sun, 26 Aug 2012 12:00 PM IST
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अलीगढ़। नेत्रदान, महादान है, नेत्रदान किसी के जीवन में रोशनी ला सकता है। इसी क्रम में लोगों को नेत्रदान के लिए जागरूक करने के लिए शनिवार से नेत्रदान पखवाड़ा शुरू हो गया। नेत्रदान पखवाडे़ के तहत समाज में नेत्रदान के प्रति जागरूकता पैदा करने का प्रयास किया जाएगा। उधर एएमयू के नेत्र बैंक ने अपनी स्थापना से अब तक के छह साल के सफर में 35 लोगों के नेत्र प्रत्यारोपण कर उनकी दुनिया रोशन की है।
गांधी नेत्र चिकित्सालय में संचालित एएमयू की नेत्र बैंक के इंजार्च डॉ. अदीब आलम खान ने बताया कि नेत्रदान पखवाड़ा शुरू हो गया है। पखवाड़े के आयोजन के संबंध में बैनर पोस्टर लगाए गए हैं। पखवाड़े का मकसद नेत्रदान के प्रति लोगों को जागरूक करना है ताकि नेत्रदान के लिए लोग आगे आएं। पखवाड़े के तहत स्वास्थ्य विभाग व अन्य विभागों के सहयोग से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। नेत्र बैंक की स्थापना जनवरी 2006 में हुई थी। तब से 1456 लोगों ने नेत्रदान के लिए संकल्प पत्र भरे हैं। आंख लगवाने के लिए बैंक में 610 लोगों के पंजीकरण हैं। इस छह साल की अवधि में 20 लोगों ने नेत्रदान किया है। इन 20 लोगों की 40 आंखों से 35 लोगों की दुनिया रोशन हुई है। अर्थात मरने के बाद 20 लोगों की 40 आंखों में से 35 अब भी इस दुनिया को देख रही हैं। नेत्रदान की हुई पांच आंखें तकनीक त्रुटियों के कारण खराब हो गईं थीं जिन्हें प्रत्यारोपित नहीं किया जा सका।
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गांधी नेत्र चिकित्सालय में संचालित एएमयू की नेत्र बैंक के इंजार्च डॉ. अदीब आलम खान ने बताया कि नेत्रदान पखवाड़ा शुरू हो गया है। पखवाड़े के आयोजन के संबंध में बैनर पोस्टर लगाए गए हैं। पखवाड़े का मकसद नेत्रदान के प्रति लोगों को जागरूक करना है ताकि नेत्रदान के लिए लोग आगे आएं। पखवाड़े के तहत स्वास्थ्य विभाग व अन्य विभागों के सहयोग से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। नेत्र बैंक की स्थापना जनवरी 2006 में हुई थी। तब से 1456 लोगों ने नेत्रदान के लिए संकल्प पत्र भरे हैं। आंख लगवाने के लिए बैंक में 610 लोगों के पंजीकरण हैं। इस छह साल की अवधि में 20 लोगों ने नेत्रदान किया है। इन 20 लोगों की 40 आंखों से 35 लोगों की दुनिया रोशन हुई है। अर्थात मरने के बाद 20 लोगों की 40 आंखों में से 35 अब भी इस दुनिया को देख रही हैं। नेत्रदान की हुई पांच आंखें तकनीक त्रुटियों के कारण खराब हो गईं थीं जिन्हें प्रत्यारोपित नहीं किया जा सका।
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