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कोल विधायक और सीओ के खिलाफ तहरीर
Aligarh
Updated Tue, 09 Sep 2014 05:30 AM IST
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अलीगढ़। अपने करीबी की अवैध आरामशीन के खिलाफ वन विभाग की कार्रवाई में बाधा डालने पर कोल विधायक जमीरउल्लाह की मुसीबत बढ़ सकती है। रेंजर की ओर से थाना क्वार्सी में दी गई तहरीर में विधायक और सीओ तृतीय सुरेश चंद रावत को भी आरोपी बनाया गया है। डीएफओ ने भी पीठ दिखाने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने को डीजीपी को पत्र लिखा है। वहीं रविवार के घटनाक्रम को लेकर वन कर्मचारियों में पुलिस के खिलाफ असंतोष पैदा हो गया है। उन्होंने अवैध आरा मशीनों के खिलाफ कार्रवाई की जिम्मेदारी पुलिस की तय करने की मांग करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है।
रविवार को वन विभाग की टीम स्थानीय पुलिस बल के साथ अनूप शहर रोड स्थित तस्लीम की अवैध आरा मशीन को विखंडित करने और अवैध लकड़ी को जब्त करने गई थी। इस दौरान सपा विधायक समर्थकों के साथ पहुंच गए। कार्रवाई को रुकवा दिया। तस्लीम की पत्नी की ओर से वन अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ डकैती व अन्य आरोप का मुकदमा दर्ज कराने को तहरीर दे दी। सत्ताधारी दल के विधायक के दबाव में सीओ सुरेश चंद रावत भी आ गए। उन्होंने केस प्रापर्टी बन चुके वन विभाग द्वारा जब्त सामान को आरा मशीन संचालकों के हवाले करवा दिया। साथ ही वन विभाग की जेसीबी और टेंपो को जब्त कर थाना क्वार्सी पहुंचवा दिया। इस मामले में वन क्षेत्राधिकारी अलीगढ़ रामसिंह विष्ट द्वारा थाना क्वार्सी में तहरीर दी गई। इसमें विधायक जमीरउल्लाह और सीओ सुरेश चंद्र को भारतीय वन अधिनियम की धारा 66 ए का आरोपी बनाया गया है। उधर, अवैध आरा मशीन पर कार्रवाई के दौरान के घटनाक्रम ने वन विभाग के कर्मचारियों का मनोबल तोड़ दिया है। वह अब विभागीय अधिकारियों पर दबाव बना रहे हैं। कर्मचारियों ने डीएफओ को अपने आक्रोश से अवगत करा दिया है। उनसे मांग की है कि उनको कार्रवाई करने न भेजा जाए। साथ ही उन पर निलंबन जैसी कार्रवाई न हो
बयान
दोनों तरफ से तहरीर प्राप्त हुई है। दोनों पक्षों की ओर से घटना के वक्त की गई कार्रवाई की गहन जांच कराई जा रही है। अभी तक मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है। संबंधित पुलिस अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया था कि वन विभाग की टीम मौके पर सर्वे करने जा रही है, जिसके लिए फोर्स मांगा गया था लेकिन मशीनों के जब्तीकरण की कार्रवाई होगी यह सूचना नहीं दी गई थी।
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- मोहित गुप्ता, एसएसपी
वर्जन
मैंने तहरीर में पूरे घटनाक्रम का ब्यौरा दिया है। लिखकर दिया है कि विधायक द्वारा कैसे सरकारी काम में बाधा डाली गई। सीओ सुुुरेश चंद्र रावत ने कानून का पालन करवाने की जगह हमारी कार्रवाई को दोषपूर्ण माना। हमारे द्वारा बरामद सामग्री जो केस प्रापर्टी थी सीओ ने अभियुक्तों के हवाले करवा दिया। लोडर ओर क्रेन को थाने भिजवा दिया।
- राम सिंह, वन क्षेत्राधिकारी, अलीगढ़
वर्जन
अलीगढ़ में 97 अवैध आरा मशीनें चिह्नित की गई थीं। जिसमें 92 पर कार्रवाई हो चुकी थी। पांच बची थीं, अनूपशहर रोड पर पकड़ी गई आरा मशीन अवैध है इसके खिलाफ हुई कार्रवाई उचित है। इस मामले में नियमानुसार प्रशासन आगे भी कार्रवाई जारी रखेगा
- अभिषेक प्रकाश, डीएम
वर्जन
पुलिस जीवनगढ़ और जवां में कार्रवाई के दौरान मददगार बनकर गई थी लेकिन वह ऐन वक्त पर वन अपराधियों के की मदद कर देती है। डीजीपी को रविवार और पुराने मामलों से अवगत करा रहा हूं। उनसे दोषी पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई का अनुरोध किया है।
- डीपी गुप्ता, डीएफओ
वर्जन
अवैध आरा मशीनों के खिलाफ जिला प्रशासन का अभियान सही है। जनप्रतिनिधियों को इसमें सहयोग करना चाहिए। जिससे पर्यावरण संरक्षण में मदद मिल सके।
- रंजन राणा, प्रबंधक , पर्यावरण एवं पर्यटन विकास समिति
बाक्स
बिजली विभाग भी बना फजीहत का कारण
बिजली विभाग यदि अपनी ड्यूटी ठीक से करता तो रविवार को वनी विभाग और पुलिस प्रशासन की फजीहत नहीं होती। विधायक के करीबी तस्लीम की आरा मशीन का लाइसेंस 2011 में निरस्त कर दिया गया था। इसके बाद बिजली विभाग को उसका विद्युत कनेक्शन काट देना था। वन क्षेत्राधिकारी रामसिंह ने बताया कि बिजली विभाग ने अपना काम नहीं किया। आरा मशीन का लाइसेंस निरस्त होने के बाद भी उसे बिजली सुचारू रूप में मिलती रही। बिजली विभाग की इस लापरवाही को ही उसने अपने बचाव का हथियार बनाया। बिजली कनेक्शन के आधार पर ही वह अपनी आरा मशीन को वैध बताता आ रहा है
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रविवार को वन विभाग की टीम स्थानीय पुलिस बल के साथ अनूप शहर रोड स्थित तस्लीम की अवैध आरा मशीन को विखंडित करने और अवैध लकड़ी को जब्त करने गई थी। इस दौरान सपा विधायक समर्थकों के साथ पहुंच गए। कार्रवाई को रुकवा दिया। तस्लीम की पत्नी की ओर से वन अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ डकैती व अन्य आरोप का मुकदमा दर्ज कराने को तहरीर दे दी। सत्ताधारी दल के विधायक के दबाव में सीओ सुरेश चंद रावत भी आ गए। उन्होंने केस प्रापर्टी बन चुके वन विभाग द्वारा जब्त सामान को आरा मशीन संचालकों के हवाले करवा दिया। साथ ही वन विभाग की जेसीबी और टेंपो को जब्त कर थाना क्वार्सी पहुंचवा दिया। इस मामले में वन क्षेत्राधिकारी अलीगढ़ रामसिंह विष्ट द्वारा थाना क्वार्सी में तहरीर दी गई। इसमें विधायक जमीरउल्लाह और सीओ सुरेश चंद्र को भारतीय वन अधिनियम की धारा 66 ए का आरोपी बनाया गया है। उधर, अवैध आरा मशीन पर कार्रवाई के दौरान के घटनाक्रम ने वन विभाग के कर्मचारियों का मनोबल तोड़ दिया है। वह अब विभागीय अधिकारियों पर दबाव बना रहे हैं। कर्मचारियों ने डीएफओ को अपने आक्रोश से अवगत करा दिया है। उनसे मांग की है कि उनको कार्रवाई करने न भेजा जाए। साथ ही उन पर निलंबन जैसी कार्रवाई न हो
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दोनों तरफ से तहरीर प्राप्त हुई है। दोनों पक्षों की ओर से घटना के वक्त की गई कार्रवाई की गहन जांच कराई जा रही है। अभी तक मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है। संबंधित पुलिस अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया था कि वन विभाग की टीम मौके पर सर्वे करने जा रही है, जिसके लिए फोर्स मांगा गया था लेकिन मशीनों के जब्तीकरण की कार्रवाई होगी यह सूचना नहीं दी गई थी।
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- मोहित गुप्ता, एसएसपी
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मैंने तहरीर में पूरे घटनाक्रम का ब्यौरा दिया है। लिखकर दिया है कि विधायक द्वारा कैसे सरकारी काम में बाधा डाली गई। सीओ सुुुरेश चंद्र रावत ने कानून का पालन करवाने की जगह हमारी कार्रवाई को दोषपूर्ण माना। हमारे द्वारा बरामद सामग्री जो केस प्रापर्टी थी सीओ ने अभियुक्तों के हवाले करवा दिया। लोडर ओर क्रेन को थाने भिजवा दिया।
- राम सिंह, वन क्षेत्राधिकारी, अलीगढ़
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अलीगढ़ में 97 अवैध आरा मशीनें चिह्नित की गई थीं। जिसमें 92 पर कार्रवाई हो चुकी थी। पांच बची थीं, अनूपशहर रोड पर पकड़ी गई आरा मशीन अवैध है इसके खिलाफ हुई कार्रवाई उचित है। इस मामले में नियमानुसार प्रशासन आगे भी कार्रवाई जारी रखेगा
- अभिषेक प्रकाश, डीएम
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पुलिस जीवनगढ़ और जवां में कार्रवाई के दौरान मददगार बनकर गई थी लेकिन वह ऐन वक्त पर वन अपराधियों के की मदद कर देती है। डीजीपी को रविवार और पुराने मामलों से अवगत करा रहा हूं। उनसे दोषी पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई का अनुरोध किया है।
- डीपी गुप्ता, डीएफओ
वर्जन
अवैध आरा मशीनों के खिलाफ जिला प्रशासन का अभियान सही है। जनप्रतिनिधियों को इसमें सहयोग करना चाहिए। जिससे पर्यावरण संरक्षण में मदद मिल सके।
- रंजन राणा, प्रबंधक , पर्यावरण एवं पर्यटन विकास समिति
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बिजली विभाग भी बना फजीहत का कारण
बिजली विभाग यदि अपनी ड्यूटी ठीक से करता तो रविवार को वनी विभाग और पुलिस प्रशासन की फजीहत नहीं होती। विधायक के करीबी तस्लीम की आरा मशीन का लाइसेंस 2011 में निरस्त कर दिया गया था। इसके बाद बिजली विभाग को उसका विद्युत कनेक्शन काट देना था। वन क्षेत्राधिकारी रामसिंह ने बताया कि बिजली विभाग ने अपना काम नहीं किया। आरा मशीन का लाइसेंस निरस्त होने के बाद भी उसे बिजली सुचारू रूप में मिलती रही। बिजली विभाग की इस लापरवाही को ही उसने अपने बचाव का हथियार बनाया। बिजली कनेक्शन के आधार पर ही वह अपनी आरा मशीन को वैध बताता आ रहा है