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बांटने वालों को आधी मिली न पूरी पाए..
Aligarh
Updated Tue, 20 May 2014 05:30 AM IST
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अलीगढ़। आधी मिली न पूरी पाए.. लौट के बुद्धु घर को आए..। जी हां.. कुछ ऐसी ही हालत हो गई है गैरभाजपाई राजनीतिक दलाें की। जो न तो अल्पसंख्यकों के सरपरस्त बन सके न ही बहुसंख्यकों के बीच अपना अस्तित्व ही बचा सके। इन दलों को अहसास भी नहीं हुआ कि देश को बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक के बीच बांटने की राजनीति में वह दोनों की नाराजगी का शिकार हो रहे हैं। नतीजा यह है कि एक तरफ बहुसंख्यक वोट अंदरखाने एकजुट होता गया तो दूसरी तरफ अल्पसंख्यक इन दलों की घटिया खींचतान से बेहद नाराज हो गए।
इस चुनाव में अल्पसंख्यक मतदाताओं ने जबरन सरपरस्त बनने वाले दलों और नेताओं को कड़ा सबक सिखाया है। कांग्रेस, बसपा, सपा और रालोद खुद ही अल्पसंख्यकों का जबरदस्ती का सरपरस्त बनने में कहीं नहीं चूकते थे, लेकिन इन मतदाताओं ने उनकी इस गलतफहमी को दूर कर दिया है। लोकतांत्रिक देश में जहां एकता और अखंडता की बात होनी चाहिए वहां वर्ग विशेष को लुभाने के लिए हर तरह के हथकंडे अपनाए गए। नतीजा सबके सामने हैं कि बहुसंख्यक आबादी ने एकजुटता से वोट किया और प्रचंड बहुमत भाजपा के खाते में गया। बहुसंख्यक आबादी को अब तक बंटा हुआ मानने वाले धुर राजनेता भी इस जोरदार बदलाव से सकते में आ गए हैं। कश्मीर से कन्याकुमारी तक बही इस बयार ने कई दलों का सफाया कर दिया है, अब इन दलों को अपने अस्तित्व की लड़ाई नए सिरे से लड़नी होगी और यह भी समझना होगा कि सभी को साथ लेकर चलने से ही उन्हें नेतृत्व मिल सकता है।
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इस चुनाव में अल्पसंख्यक मतदाताओं ने जबरन सरपरस्त बनने वाले दलों और नेताओं को कड़ा सबक सिखाया है। कांग्रेस, बसपा, सपा और रालोद खुद ही अल्पसंख्यकों का जबरदस्ती का सरपरस्त बनने में कहीं नहीं चूकते थे, लेकिन इन मतदाताओं ने उनकी इस गलतफहमी को दूर कर दिया है। लोकतांत्रिक देश में जहां एकता और अखंडता की बात होनी चाहिए वहां वर्ग विशेष को लुभाने के लिए हर तरह के हथकंडे अपनाए गए। नतीजा सबके सामने हैं कि बहुसंख्यक आबादी ने एकजुटता से वोट किया और प्रचंड बहुमत भाजपा के खाते में गया। बहुसंख्यक आबादी को अब तक बंटा हुआ मानने वाले धुर राजनेता भी इस जोरदार बदलाव से सकते में आ गए हैं। कश्मीर से कन्याकुमारी तक बही इस बयार ने कई दलों का सफाया कर दिया है, अब इन दलों को अपने अस्तित्व की लड़ाई नए सिरे से लड़नी होगी और यह भी समझना होगा कि सभी को साथ लेकर चलने से ही उन्हें नेतृत्व मिल सकता है।
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