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स्वायतता को सुनहरे अवसर के रूप में देख रहे एएमयू के शिक्षक
Updated Thu, 22 Mar 2018 02:07 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
सरकार ने जेएनयू, बीएचयू एवं एएमयू सहित देश के पांच केंद्रीय विश्वविद्यालयों को स्वायत्त घोषित कर दिया है। यानी अब एएमयू को कुछ नए कोर्स शुरू करने या किसी फैसले के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का मुंह नहीं ताकना पड़ेगा। एएमयू के शिक्षकों का एक बड़ा वर्ग सरकार के स्वायत्तता के इस फैसले को सुनहरे अवसर के रूप में देख रहा है। वहीं कुछ लोग आशंकित भी हैं और उन्हें डर है कि भविष्य में उच्च शिक्षा महंगी हो जाएगी।
एएमयू वीसी प्रो. तारिक मंसूर के ओएसडी प्रो. ए सलाम केंद्र के फैसले का स्वागत करते हैं। उनका कहना है कि अभी नए कोर्स सहित अन्य चीजों के लिए यूजीसी से अनुमति लेने में समय लगता था। अब बिना विलंब एवं व्यवधान के सारे कार्य समय से हो जाएंगे।
एएमयू विधि संकाय के पूर्व डीन एवं यूनिवर्सिटी के सलाहकार रह चुके प्रो. एम शब्बीर कहते हैं कि आजादी के बाद से लोग स्वायत्तता की वकालत करते आए हैं, जो आज मिली है। यह बहुत पहले ही हो जाना चाहिए था। अब यूजीसी या एमएचआरडी का हस्तक्षेप नहीं रहेगा। एएमयू टेक्निकल स्टाफ एसोसिएशन के फैसल गांधी आशंकित है कि इससे शिक्षा महंगी होंगी और भविष्य में परेशानियां बढ़ेंगी।
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हालांकि वह यह भी कहते है कि बीएचयू एवं जेएनयू आदि के साथ एएमयू को स्वायत्त घोषित करने से यह साफ हो गया है कि केंद्र की भाजपा सरकार की सोच सिर्फ मुस्लिम विरोधी नहीं है। वह इससे बाहर जाकर सोच रही है, जो स्वागत योग्य है। एएमयू के आईक्यूएसी के प्रो. रिजवान खान कहते है कि हमारे लिए गर्व की बात है कि एएमयू देश के शीर्ष पांच विश्वविद्यालयों में शामिल है।
विश्वविद्यालय के लिए यह सुनहरा अवसर है। अच्छे कोर्सेज शुरू कर तथा गुणवत्ता को बरकरार रखते हुए आर्थिक संसाधन जुटाने का अच्छा मौका है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय को चाहिए कि एक कमेटी बनाए, जो यह देखे कि हम अपने संसाधनों का अधिकतम इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं। एएमयू रजिस्ट्रार प्रो. जावेद अख्तर कहते हैं कि अभी इससे संबंधित कोई दस्तावेज नहीं आया है।
उसके आने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट होगी और कुछ कहा जा सकेगा। एएमयू छात्र संघ के सचिव मो. फहद भी अभी कुछ कहना जल्दबाजी समझ रहे हैं। एएमयू छात्र संघ के पूर्व उपाध्यक्ष नदीम अंसारी कहते है कि पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए यह आरएसएस की चाल है।
इससे गरीब छात्रों को नुकसान होगा। सरकार विश्वविद्यालयों को स्वायत्तता दे, लेकिन फी स्ट्रक्चर अपने हाथ में रखे, ताकि उच्च शिक्षा महंगी न हो सके। वहीं फोरम फॉर मुस्लिम स्टडीज एंड एनालिसिस के डायरेक्टर डॉ. जसीम मोहम्मद कहते है कि एएमयू को पूर्ण स्वायत्तता प्रधानमंत्री का क्रांतिकारी कदम है।
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सरकार ने जेएनयू, बीएचयू एवं एएमयू सहित देश के पांच केंद्रीय विश्वविद्यालयों को स्वायत्त घोषित कर दिया है। यानी अब एएमयू को कुछ नए कोर्स शुरू करने या किसी फैसले के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का मुंह नहीं ताकना पड़ेगा। एएमयू के शिक्षकों का एक बड़ा वर्ग सरकार के स्वायत्तता के इस फैसले को सुनहरे अवसर के रूप में देख रहा है। वहीं कुछ लोग आशंकित भी हैं और उन्हें डर है कि भविष्य में उच्च शिक्षा महंगी हो जाएगी।
एएमयू वीसी प्रो. तारिक मंसूर के ओएसडी प्रो. ए सलाम केंद्र के फैसले का स्वागत करते हैं। उनका कहना है कि अभी नए कोर्स सहित अन्य चीजों के लिए यूजीसी से अनुमति लेने में समय लगता था। अब बिना विलंब एवं व्यवधान के सारे कार्य समय से हो जाएंगे।
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एएमयू विधि संकाय के पूर्व डीन एवं यूनिवर्सिटी के सलाहकार रह चुके प्रो. एम शब्बीर कहते हैं कि आजादी के बाद से लोग स्वायत्तता की वकालत करते आए हैं, जो आज मिली है। यह बहुत पहले ही हो जाना चाहिए था। अब यूजीसी या एमएचआरडी का हस्तक्षेप नहीं रहेगा। एएमयू टेक्निकल स्टाफ एसोसिएशन के फैसल गांधी आशंकित है कि इससे शिक्षा महंगी होंगी और भविष्य में परेशानियां बढ़ेंगी।
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हालांकि वह यह भी कहते है कि बीएचयू एवं जेएनयू आदि के साथ एएमयू को स्वायत्त घोषित करने से यह साफ हो गया है कि केंद्र की भाजपा सरकार की सोच सिर्फ मुस्लिम विरोधी नहीं है। वह इससे बाहर जाकर सोच रही है, जो स्वागत योग्य है। एएमयू के आईक्यूएसी के प्रो. रिजवान खान कहते है कि हमारे लिए गर्व की बात है कि एएमयू देश के शीर्ष पांच विश्वविद्यालयों में शामिल है।
विश्वविद्यालय के लिए यह सुनहरा अवसर है। अच्छे कोर्सेज शुरू कर तथा गुणवत्ता को बरकरार रखते हुए आर्थिक संसाधन जुटाने का अच्छा मौका है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय को चाहिए कि एक कमेटी बनाए, जो यह देखे कि हम अपने संसाधनों का अधिकतम इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं। एएमयू रजिस्ट्रार प्रो. जावेद अख्तर कहते हैं कि अभी इससे संबंधित कोई दस्तावेज नहीं आया है।
उसके आने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट होगी और कुछ कहा जा सकेगा। एएमयू छात्र संघ के सचिव मो. फहद भी अभी कुछ कहना जल्दबाजी समझ रहे हैं। एएमयू छात्र संघ के पूर्व उपाध्यक्ष नदीम अंसारी कहते है कि पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए यह आरएसएस की चाल है।
इससे गरीब छात्रों को नुकसान होगा। सरकार विश्वविद्यालयों को स्वायत्तता दे, लेकिन फी स्ट्रक्चर अपने हाथ में रखे, ताकि उच्च शिक्षा महंगी न हो सके। वहीं फोरम फॉर मुस्लिम स्टडीज एंड एनालिसिस के डायरेक्टर डॉ. जसीम मोहम्मद कहते है कि एएमयू को पूर्ण स्वायत्तता प्रधानमंत्री का क्रांतिकारी कदम है।